भदोही से पूर्व विधायक विजय मिश्रा फंसे, ED चार्जशीट पर अदालत की मुहर !

ED की जांच में सामने आया कि विजय मिश्रा और उनके परिवार के खिलाफ यूपी के कई जिलों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें जबरन वसूली, अवैध खनन, अपहरण, हत्या, लूट जैसे आरोप शामिल हैं.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने हलचल मचा दी है। भदोही से पूर्व विधायक विजय मिश्रा और उनकी पत्नी, पूर्व विधान परिषद सदस्य (MLC) राम लाली मिश्रा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय के प्रयागराज सब-जोनल कार्यालय ने दोनों समेत कुल पांच आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के तहत चार्जशीट दाखिल की है, जिस पर अब अदालत ने संज्ञान ले लिया है।

भदोही से पूर्व विधायक विजय मिश्रा फंसे, ED चार्जशीट पर अदालत की मुहर !
भदोही से पूर्व विधायक विजय मिश्रा फंसे, ED चार्जशीट पर अदालत की मुहर !

ईडी द्वारा यह चार्जशीट 31 जुलाई, 2025 को दाखिल की गई थी। इस मामले में लखनऊ स्थित सीबीआई कोर्ट-1 के विशेष न्यायाधीश ने 18 दिसंबर, 2025 को चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद पूर्व विधायक विजय मिश्रा और उनके परिवार की कानूनी चुनौतियां और गंभीर हो गई हैं।

ईडी की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। पुलिस ने विजय मिश्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में 14 जुलाई और 26 जुलाई, 2023 को चार्जशीट दाखिल की थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि सरकारी पदों पर रहते हुए आरोपियों ने अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि विजय मिश्रा, उनकी पत्नी राम लाली मिश्रा और अन्य सह-आरोपियों ने कथित तौर पर करीब 36.07 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति बनाई। यह संपत्ति चल और अचल दोनों रूपों में बताई जा रही है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन संपत्तियों का कोई वैध आय स्रोत नहीं बताया जा सका, जिससे यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आ गया।

सूत्रों के अनुसार, ईडी ने अपनी चार्जशीट में विस्तार से यह उल्लेख किया है कि किस तरह राजनीतिक पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर कथित तौर पर भ्रष्टाचार के जरिए संपत्ति जुटाई गई। आरोप है कि सरकारी योजनाओं, ठेकों और अन्य माध्यमों से अवैध लाभ कमाया गया और फिर उसे अलग-अलग तरीकों से निवेश कर वैध दिखाने की कोशिश की गई।

विजय मिश्रा भदोही जिले की राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं और लंबे समय तक सत्ता और विपक्ष दोनों ही खेमों में उनका प्रभाव रहा है। उनकी पत्नी राम लाली मिश्रा भी एमएलसी रह चुकी हैं। ऐसे में इस मामले ने न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी काफी चर्चा बटोरी है।

ईडी की चार्जशीट में जिन पांच आरोपियों के नाम शामिल हैं, उनमें विजय मिश्रा और राम लाली मिश्रा के अलावा उनके करीबी और कथित सहयोगी भी बताए जा रहे हैं। एजेंसी का कहना है कि इन सभी की भूमिका अवैध धन को छिपाने, स्थानांतरित करने और निवेश करने में सामने आई है।

हालांकि, विजय मिश्रा और उनके परिवार की ओर से इन आरोपों को पहले भी राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया जाता रहा है। उनके समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई विपक्षी नेताओं को दबाने की साजिश का हिस्सा है। वहीं, जांच एजेंसियों का दावा है कि कार्रवाई पूरी तरह साक्ष्यों और कानून के दायरे में की गई है।

कोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद अब इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आरोपियों की पेशी, जमानत और अन्य कानूनी पहलुओं पर सुनवाई तेज हो सकती है। इस केस पर राजनीतिक नजरें भी टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला यूपी की सियासत में भ्रष्टाचार और जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ सकता है।

कुल मिलाकर, ईडी की चार्जशीट और कोर्ट के संज्ञान के बाद भदोही से पूर्व विधायक विजय मिश्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। आने वाले समय में यह मामला किस दिशा में जाता है, यह न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक तौर पर भी अहम माना जा रहा है।

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