योगी आदित्यनाथ का अल्टीमेटम? यूपी BJP विधायकों के भविष्य पर सवाल !

यूपी में एसआईआर को लेकर सीएम योगी ने पार्टी पदाधिकारियों को साफ कह दिया हैं कि जहां भी एसाईआर ठीक नहीं होगा वहां विधायकों को टिकट कटना तय है. इसलिए वो लापरवाही न बरतें.

उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। साफ संकेत दे दिए गए हैं कि एसआईआर में किसी भी तरह की लापरवाही न सिर्फ संगठन के लिए नुकसानदायक होगी, बल्कि संबंधित जनप्रतिनिधियों के राजनीतिक भविष्य पर भी भारी पड़ सकती है। सीएम योगी के सख्त बयान के बाद बीजेपी के भीतर भी हलचल मच गई है।

योगी आदित्यनाथ का अल्टीमेटम? यूपी BJP विधायकों के भविष्य पर सवाल !
योगी आदित्यनाथ का अल्टीमेटम? यूपी BJP विधायकों के भविष्य पर सवाल !

दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईआर को लेकर बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर इस काम को गंभीरता से नहीं लिया गया और सही तरीके से पूरा नहीं किया गया, तो यह एक “खतरे की घंटी” साबित होगी। सीएम ने यहां तक कहा कि एसआईआर में की गई चूक का खामियाजा अगले 20 साल तक भुगतना पड़ सकता है। उनके इस बयान को पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि इस अभियान में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इसी कड़ी में लखनऊ में बीजेपी की एक अहम कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और राष्ट्रीय महामंत्री व उत्तर प्रदेश के केंद्रीय प्रभारी तरुण चुग भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा एसआईआर की प्रगति, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी और आगामी चुनावी रणनीति रहा।

बैठक के दौरान बीजेपी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया कि एसआईआर को सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पार्टी के दीर्घकालिक राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कार्यशाला में यह साफ संकेत दिए गए कि जिन विधानसभा सीटों पर एसआईआर का काम संतोषजनक नहीं पाया जाएगा, वहां के विधायकों का टिकट कटना लगभग तय माना जाएगा। यह संदेश सीधे-सीधे विधायकों और संगठन पदाधिकारियों के लिए चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

पार्टी नेताओं का मानना है कि एसआईआर के जरिए मतदाता सूची को मजबूत और त्रुटिरहित बनाना बेहद जरूरी है। अगर इसमें लापरवाही हुई तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ेगा। यही वजह है कि बीजेपी इस बार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। सीएम योगी ने कार्यशाला में कहा कि हर बूथ पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि योग्य मतदाता सूची से बाहर न रहें, वहीं अपात्र नाम हटाए जाएं।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, सीएम योगी का यह सख्त रुख पार्टी के भीतर अनुशासन मजबूत करने की कोशिश भी है। लंबे समय से यह चर्चा चल रही है कि कुछ सीटों पर स्थानीय विधायक संगठनात्मक कामकाज में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं। एसआईआर को एक पैमाना बनाकर पार्टी ऐसे नेताओं की पहचान करना चाहती है, जो जमीनी स्तर पर कमजोर साबित हो रहे हैं।

इस कार्यशाला के बाद कई बीजेपी विधायकों की चिंता बढ़ गई है। पार्टी के अंदरखाने से यह भी संकेत मिल रहे हैं कि एसआईआर की प्रगति को लेकर जल्द ही रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा सकता है। इसमें बूथ स्तर से लेकर विधानसभा स्तर तक के आंकड़ों की समीक्षा होगी। जिन इलाकों में काम कमजोर पाया जाएगा, वहां सीधे तौर पर जिम्मेदार लोगों से जवाबतलब किया जा सकता है।

बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि आने वाले चुनावों में जीत की नींव अभी से रखनी होगी और एसआईआर इसमें अहम भूमिका निभाएगा। यही कारण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील मामला है।

कुल मिलाकर, यूपी में एसआईआर को लेकर बीजेपी ने सख्त रुख अपना लिया है। सीएम योगी के बयान और लखनऊ की कार्यशाला के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि पार्टी अब प्रदर्शन के आधार पर ही टिकट वितरण करेगी। ऐसे में जिन विधायकों ने एसआईआर को गंभीरता से नहीं लिया, उनके लिए आने वाला समय राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

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