बिहार में जमीन और रेत माफियाओं के खिलाफ सरकार एक्शन के मोड में है। इन माफियाओं की बाकायदा लिस्ट भी तैयार कर ली गई है।
बिहार में माफियाओं के खिलाफ सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। गृह मंत्री बनने के बाद से ही सम्राट चौधरी लगातार सख्त रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि बिहार में तीन तरह के माफिया सबसे ज्यादा सक्रिय हैं—जमीन माफिया, शराब माफिया और बालू माफिया—और इन तीनों के खिलाफ सरकार किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतेगी। अब उनके इस बयान को जमीन पर उतारते हुए प्रशासन ने माफियाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई शुरू कर दी है।

सूत्रों के मुताबिक, बिहार में सक्रिय जमीन माफिया और बालू माफियाओं की एक नई सूची तैयार की गई है। इस लिस्ट में कुल 19 नाम शामिल हैं, जिन पर लंबे समय से अवैध गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय की ओर से तैयार की गई इस सूची के आधार पर आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि इन माफियाओं के खिलाफ एफआईआर, कुर्की-जप्ती और गैंगस्टर एक्ट के तहत कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि सरकार की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और आम जनता को माफिया राज से मुक्ति दिलाना है। उन्होंने कहा था कि जमीन माफिया गरीबों और किसानों की जमीन हड़पने का काम करते हैं, जबकि बालू माफिया अवैध खनन के जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंचाते हैं। शराब माफिया को लेकर भी उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि शराबबंदी कानून से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नई सूची में शामिल कई नाम ऐसे हैं, जिन पर पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन राजनीतिक संरक्षण या कानूनी दांव-पेंच के कारण वे कार्रवाई से बचते रहे। अब सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि पद, रसूख या राजनीतिक पहचान के आधार पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। गृह विभाग ने जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि सूची में शामिल लोगों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाए और ठोस सबूत जुटाकर त्वरित कार्रवाई की जाए।
बालू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर खास रणनीति बनाई गई है। अवैध खनन स्थलों पर ड्रोन से निगरानी, ट्रकों की GPS ट्रैकिंग और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही तय करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं जमीन माफियाओं के मामलों में राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें बनाई गई हैं, ताकि फर्जी दस्तावेजों और अवैध कब्जों की पहचान कर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सम्राट चौधरी का यह सख्त रुख आगामी चुनावी माहौल के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। लंबे समय से बिहार में माफिया राज को लेकर जनता में नाराजगी रही है, ऐसे में सरकार का यह कदम जनता के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि विपक्ष इसे राजनीतिक दिखावा करार दे रहा है और मांग कर रहा है कि कार्रवाई निष्पक्ष हो तथा इसमें किसी तरह का भेदभाव न किया जाए।
गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने दो टूक कहा है कि यह अभियान लंबे समय तक चलेगा और सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि माफिया नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि “बिहार को अपराध और माफिया मुक्त बनाना सरकार का संकल्प है। जो भी कानून तोड़ेगा, वह चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, कार्रवाई से नहीं बचेगा।”
कुल मिलाकर, बिहार में जमीन और बालू माफियाओं की नई सूची तैयार होना इस बात का संकेत है कि सरकार अब कठोर फैसले लेने के मूड में है। आने वाले दिनों में इन माफियाओं पर होने वाली कार्रवाई यह तय करेगी कि यह अभियान सिर्फ चेतावनी बनकर रह जाता है या वाकई बिहार में माफिया राज के अंत की शुरुआत साबित होता है।
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