बीएमसी चुनाव 15 जनवरी को होने हैं और 16 जनवरी को नतीजों का ऐलान होगा। इसके लिए उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी गई है।
मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को तेज करते हुए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 66 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। सूची जारी होते ही महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि इसमें कई नए चेहरों के साथ-साथ प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों से जुड़े नाम भी सामने आए हैं। खास बात यह है कि इस पहली सूची में भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया के बेटे नील सोमैया को भी टिकट दिया गया है।

भाजपा ने नील सोमैया को मुंबई के मुलुंड पश्चिम स्थित बीएमसी वार्ड नंबर 107 से अपना उम्मीदवार बनाया है। नील सोमैया की उम्मीदवारी को भाजपा की संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। किरीट सोमैया लंबे समय से मुंबई की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उनका प्रभाव खास तौर पर उत्तर-पूर्वी मुंबई और आसपास के इलाकों में माना जाता है। ऐसे में उनके बेटे को मैदान में उतारना भाजपा के लिए स्थानीय स्तर पर मजबूती बढ़ाने का कदम माना जा रहा है।
भाजपा की इस पहली सूची में कुल 66 नामों को जगह दी गई है, जिनमें अनुभवी पार्षदों के साथ-साथ नए और युवा चेहरों को भी अवसर दिया गया है। पार्टी नेतृत्व ने इस सूची के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह अनुभव और युवा ऊर्जा के संतुलन के साथ चुनाव मैदान में उतर रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शेष सीटों के लिए उम्मीदवारों की अगली सूची भी जल्द जारी की जाएगी।
BMC चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा से ही बेहद अहम रहे हैं। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और बीएमसी एशिया की सबसे समृद्ध नगरपालिकाओं में से एक मानी जाती है। ऐसे में इस चुनाव पर सभी राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं। भाजपा पिछले कई चुनावों से बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी रही है, लेकिन सत्ता पर अब तक शिवसेना का कब्जा रहा है। इस बार भाजपा पूरी ताकत के साथ बीएमसी पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो भाजपा ने महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के लिए शिवसेना के साथ अधिकतर सीटों पर गठबंधन बरकरार रखा है। दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा आपसी सहमति से किया गया है, ताकि वोटों का बिखराव रोका जा सके। भाजपा और शिवसेना का यह गठबंधन शहरी क्षेत्रों में खासा प्रभाव रखता है और इसका सीधा असर बीएमसी चुनाव के नतीजों पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में चल रही अंदरूनी खींचतान ने चुनावी माहौल को और रोचक बना दिया है। अजित पवार ने इस बार अलग होकर निकाय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। वह कुछ सीटों पर अकेले मैदान में उतर रहे हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में उन्होंने शरद पवार गुट के साथ गठबंधन किया है। इस असामान्य गठजोड़ ने विपक्षी खेमे की रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं और इसका फायदा भाजपा-शिवसेना गठबंधन को मिलने की संभावना जताई जा रही है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी विकास, सुशासन और पारदर्शिता के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। बीएमसी के कामकाज, बुनियादी सुविधाओं, सड़क, पानी, सफाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को भाजपा अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल कर रही है। नील सोमैया सहित कई नए उम्मीदवारों को मौका देकर पार्टी यह दिखाना चाहती है कि वह भविष्य की राजनीति के लिए नई पीढ़ी को तैयार कर रही है।
कुल मिलाकर, भाजपा की पहली सूची के जारी होते ही बीएमसी चुनाव की सियासी तस्वीर और साफ होने लगी है। आने वाले दिनों में अन्य दलों की सूचियां सामने आने के साथ मुकाबला और भी दिलचस्प होगा। अब देखना यह है कि भाजपा की यह रणनीति, गठबंधन और उम्मीदवार चयन मुंबई की सत्ता की कुंजी हासिल करने में कितनी कारगर साबित होती है।