ओपी राजभर का अखिलेश पर तंज, ब्राह्मण प्रेम को लेकर रखी शर्त !

ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर यादवों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया. उन्होंने अखिलेश को चुनौती दी कि यदि वे ब्राह्मणों के सच्चे हितैषी हैं तो यूपी चुनाव में सभी टिकट उन्हें दे दें.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की हालिया बैठक के बाद न सिर्फ विपक्ष बल्कि पार्टी संगठन के भीतर भी हलचल देखने को मिली। बीजेपी संगठन ने इस बैठक पर असहजता जाहिर की, वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लेकर तंज कसते हुए बीजेपी पर सवाल खड़े किए। अखिलेश यादव ने ब्राह्मण विधायकों की नाराजगी का जिक्र करते हुए इसे बीजेपी के भीतर असंतोष का संकेत बताया था।

ओपी राजभर का अखिलेश पर तंज, ब्राह्मण प्रेम को लेकर रखी शर्त !
ओपी राजभर का अखिलेश पर तंज, ब्राह्मण प्रेम को लेकर रखी शर्त !

अखिलेश यादव के इस बयान के बाद अब योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर खुलकर मैदान में उतर आए हैं। ओपी राजभर ने न सिर्फ अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार किया, बल्कि उन्हें खुले तौर पर एक राजनीतिक चुनौती भी दे दी है।

अखिलेश के तंज पर राजभर का जवाब

अखिलेश के तंज पर राजभर का जवाब
अखिलेश के तंज पर राजभर का जवाब

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को दूसरों की चिंता करने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने सपा प्रमुख पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव सच में ब्राह्मणों के हितैषी हैं और उन्हें ब्राह्मण समाज की इतनी ही चिंता है, तो उन्हें इसका प्रमाण देना चाहिए। राजभर ने साफ शब्दों में कहा, “सिर्फ बयानबाजी और तंज कसने से ब्राह्मण समाज का भला नहीं होता, उसके लिए ठोस कदम उठाने पड़ते हैं।”

‘काम करके दिखाएं’—राजभर की चुनौती

ओपी राजभर ने अखिलेश यादव को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर सपा प्रमुख वास्तव में ब्राह्मण प्रेमी हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से यह ऐलान करना चाहिए कि वे सत्ता में आने पर ब्राह्मण समाज के लिए क्या विशेष करेंगे। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के कार्यकाल में ब्राह्मणों को क्या मिला, यह प्रदेश की जनता अच्छी तरह जानती है।

राजभर ने आरोप लगाया कि सपा हमेशा जातिगत राजनीति करती आई है और चुनाव के समय ही अलग-अलग वर्गों की याद आती है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज को सिर्फ वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया गया, जबकि वास्तविक विकास और सम्मान देने का काम मौजूदा सरकार कर रही है।

बीजेपी विधायकों की बैठक और सियासी हलचल

गौरतलब है कि हाल ही में बीजेपी के कुछ ब्राह्मण विधायकों ने एक बैठक की थी, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि इस बैठक में विधायकों ने संगठन और सरकार से जुड़ी कुछ चिंताओं को साझा किया। हालांकि बीजेपी संगठन ने इस बैठक को लेकर नाराजगी जताई और इसे अनुशासनहीनता से जोड़कर देखा गया।

इस बैठक के बाद विपक्ष ने बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया। अखिलेश यादव ने इसे बीजेपी के अंदरूनी असंतोष का संकेत बताते हुए कहा था कि सत्ता में रहते हुए भी बीजेपी अपने विधायकों की नाराजगी दूर नहीं कर पा रही है।

राजभर ने सपा के पुराने शासन पर उठाए सवाल

ओपी राजभर ने अखिलेश यादव के शासनकाल को याद दिलाते हुए कहा कि सपा सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था की हालत किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने कहा कि उस दौर में अपराध चरम पर थे और समाज के सभी वर्ग, चाहे वह ब्राह्मण हों या पिछड़े और दलित, खुद को असुरक्षित महसूस करते थे।

राजभर ने दावा किया कि मौजूदा सरकार में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है और सभी वर्गों को समान रूप से सम्मान और सुरक्षा मिल रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार जाति के आधार पर नहीं, बल्कि विकास और सुशासन के आधार पर काम कर रही है।

सियासी बयानबाजी से गरमाया माहौल

ब्राह्मण विधायकों की बैठक से शुरू हुआ यह मुद्दा अब सियासी बयानबाजी में तब्दील हो चुका है। एक तरफ अखिलेश यादव बीजेपी को घेरने में लगे हैं, तो दूसरी तरफ ओपी राजभर जैसे सहयोगी दलों के नेता सपा पर तीखे हमले कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पूरा विवाद आने वाले चुनावों से पहले ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है।

फिलहाल, ओपी राजभर की खुली चुनौती के बाद अब निगाहें अखिलेश यादव की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा प्रमुख इस चुनौती को किस तरह लेते हैं और क्या वे राजभर के सवालों का जवाब देते हैं या नहीं।

Also Read :

जमानत पर रोक के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज, बृजभूषण का विनेश पर तंज !