उपेंद्र कुशवाहा के तीन विधायक, रामेश्वर महतो, माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह ने एक तस्वीर शेयर की है, जिससे सियासी खलबली मच गई है. उन्होंने नितिन नबीन से मुलाकात की थी.
बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज होती दिख रही है। सत्तारूढ़ महायुति की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में अंदरूनी कलह की खबरें सामने आ रही हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र सिंह कुशवाहा के नेतृत्व वाली आरएलएम पर टूट का खतरा मंडराने लगा है। संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के चार में से तीन विधायक नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं, जिससे सियासी हलकों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।

दरअसल, बिहार विधानसभा में आरएलएम के कुल चार विधायक हैं। इनमें बाजपट्टी से विधायक रामेश्वर महतो, मधुबनी से विधायक माधव आनंद और दिनारा से विधायक आलोक कुमार सिंह के नाम प्रमुख रूप से नाराज नेताओं में शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों विधायकों की नाराजगी की मुख्य वजह हाल ही में हुए बिहार सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से जुड़ी है।
बताया जा रहा है कि शपथ ग्रहण के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री पद दिलवाया, जबकि वह न तो विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य हैं। इस फैसले से पार्टी के भीतर असंतोष गहराता चला गया। पार्टी के विधायकों का मानना है कि उन्होंने चुनाव जीतकर पार्टी को मजबूती दी, लेकिन मंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी को नजरअंदाज कर दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि ये तीनों विधायक काफी समय से मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे थे। महायुति सरकार में आरएलएम की हिस्सेदारी को देखते हुए उन्हें भरोसा था कि पार्टी नेतृत्व उनकी बात रखेगा। लेकिन ऐन मौके पर उपेंद्र कुशवाहा द्वारा बेटे को मंत्री बनवाने के फैसले ने विधायकों को झटका दिया है। यही कारण है कि अब पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
नाराजगी की चर्चाओं के बीच हाल ही में एक और सियासी संकेत सामने आया, जिसने इन अटकलों को और हवा दे दी। जानकारी के अनुसार, आरएलएम के तीनों नाराज विधायक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री नितिन नबीन से मुलाकात करते नजर आए। इस मुलाकात की तस्वीरें और खबरें सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा कि क्या आरएलएम में टूट की पटकथा लिखी जा रही है।
हालांकि, इस मुलाकात को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे महज शिष्टाचार भेंट मानने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि मौजूदा हालात में इस तरह की मुलाकात के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। खासकर तब, जब यह चर्चा पहले से चल रही है कि आरएलएम के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है।
इस बीच यह भी सामने आया है कि ये तीनों विधायक पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा द्वारा हाल ही में आयोजित लिट्टी भोज कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुए थे। लिट्टी भोज को पार्टी की एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा था। ऐसे अहम कार्यक्रम से विधायकों की गैरहाजिरी ने अंदरूनी मतभेदों को और उजागर कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उपेंद्र कुशवाहा समय रहते नाराज विधायकों को मनाने में सफल नहीं होते हैं, तो पार्टी को बड़ा झटका लग सकता है। चार विधायकों वाली पार्टी में तीन विधायकों की नाराजगी संगठन की स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है। अगर ये विधायक अलग रुख अपनाते हैं, तो महायुति की राजनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
फिलहाल, आरएलएम या उपेंद्र कुशवाहा की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, बीजेपी खेमे में भी इस मुलाकात को लेकर चुप्पी साधी गई है। लेकिन बिहार की राजनीति में जिस तरह से समीकरण तेजी से बदलते हैं, उसे देखते हुए आने वाले दिनों में आरएलएम के भविष्य को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।
कुल मिलाकर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के भीतर चल रही यह खींचतान अब सिर्फ अंदरूनी मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह बिहार की सियासत में एक बड़े घटनाक्रम की भूमिका भी बन सकती है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उपेंद्र कुशवाहा इस संकट से पार्टी को कैसे उबारते हैं या फिर आरएलएम किसी बड़े राजनीतिक मोड़ की ओर बढ़ती है।