जमुई में पोस्टर अभियान, ‘लापता’ सांसद की तलाश !

राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल मच गई जब जमुई के सांसद अरुण भारती के लापता होने के कई पर्चे बुधवार की सुबह शहर के केकेएम कॉलेज के मुख्य द्वार के अलावा रजिस्ट्री ऑफिस और कचहरी चौक पास चिपके पाए गए।

बिहार की राजनीति में उस समय अचानक हलचल मच गई, जब जमुई से सांसद अरुण भारती के ‘लापता’ होने से जुड़े पोस्टर शहर के कई प्रमुख स्थानों पर चिपके पाए गए। बुधवार की सुबह जमुई शहर के केकेएम कॉलेज के मुख्य द्वार, रजिस्ट्री ऑफिस परिसर और कचहरी चौक के पास इन पोस्टरों को देखकर लोग हैरान रह गए। पोस्टरों में सांसद अरुण भारती को ‘लापता’ बताया गया था, जिसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई।

जमुई में पोस्टर अभियान, ‘लापता’ सांसद की तलाश !
जमुई में पोस्टर अभियान, ‘लापता’ सांसद की तलाश !

सांसद के लापता होने से जुड़े पर्चों की सूचना मिलते ही शहर में चर्चा का दौर शुरू हो गया। देखते ही देखते जमुई से सांसद अरुण भारती के ‘लापता’। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि सार्वजनिक स्थानों पर सांसद को खोजने की अपील वाले पर्चे चिपकाए गए थे। हालांकि प्रशासन और स्थानीय नेताओं की सक्रियता के बाद इन पोस्टरों को कुछ ही समय में हटा दिया गया, लेकिन तब तक तस्वीरें और वीडियो मोबाइल कैमरों में कैद हो चुके थे।

पोस्टरों में सांसद अरुण भारती के अचानक ‘गायब’ होने को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसे लेकर आम लोगों के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। कोई इसे विपक्ष की सियासी चाल बता रहा है तो कोई इसे जनप्रतिनिधि की सक्रियता पर सवाल उठाने का तरीका मान रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग इस मामले पर तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और इसे लोकतंत्र से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं।

अरुण भारती, जो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद हैं और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के जीजा भी हैं, लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम नजर आने को लेकर पहले भी चर्चा में रहे हैं। ऐसे में उनके ‘लापता’ होने के पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे जनप्रतिनिधि की जवाबदेही से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन से जुड़े नेताओं ने इसे दुर्भावनापूर्ण राजनीति करार दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है। पोस्टर लगने की सूचना मिलते ही नगर प्रशासन और पुलिस हरकत में आई और तत्काल सभी पर्चों को हटवाया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर लगाना नियमों का उल्लंघन है और मामले की जांच की जा रही है कि ये पोस्टर किसने और किन उद्देश्यों से लगाए।

वहीं, सांसद अरुण भारती की ओर से इस मुद्दे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि सांसद पूरी तरह सुरक्षित हैं और अपने संसदीय कार्यों में व्यस्त हैं। समर्थकों ने इसे विपक्ष की ओर से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया और पोस्टरों के जरिए गलत संदेश फैलाया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में और तूल पकड़ सकता है। जमुई जैसे संवेदनशील राजनीतिक क्षेत्र में इस तरह के पोस्टर सामने आना यह संकेत देता है कि राजनीतिक टकराव अब सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक खुलकर दिखाई देने लगा है। विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर सरकार और सत्ताधारी दल पर हमलावर हो सकता है, जबकि सत्तापक्ष इसे साजिश बताकर पलटवार की रणनीति अपना सकता है।

फिलहाल, जमुई में लगे इन पोस्टरों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जनप्रतिनिधियों की जनता के बीच मौजूदगी और जवाबदेही कितनी अहम है। ‘लापता सांसद’ के पोस्टरों ने भले ही कुछ घंटों के लिए ही शहर का माहौल गर्म किया हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने दूरगामी माने जा रहे हैं।

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