उत्तर प्रदेश में एसआईआर के आंकड़े आने के बाद बीजेपी और समाजवादी पार्टी में एक नई जंग छिड़ गई है. बीजेपी ने जहां छूटे नामों को लिस्ट में शामिल कराने के निर्देश दिए तो वहीं सपा भी सतर्क है.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वोटर लिस्ट को लेकर सियासी तापमान तेज हो गया है। राज्य में चल रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत करीब 2.89 करोड़ वोटों के कटने के बाद समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी आमने-सामने आ गई हैं। इसे लेकर जहां विपक्ष लोकतंत्र पर खतरे की बात कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष संगठन को अलर्ट मोड में लाकर वोट बढ़ाने की रणनीति पर काम शुरू कर चुका है।

वोट कटने के बाद सियासी घमासान
SIR प्रक्रिया के नए आंकड़े सामने आने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। अखिलेश यादव का कहना है कि बड़ी संख्या में वोट कटने से खासकर PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज प्रभावित हो सकता है।
इसी को देखते हुए उन्होंने “पीडीए प्रहरी” अभियान का आह्वान किया है। अखिलेश ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे हर गांव, हर मोहल्ले और हर बूथ पर जाकर यह सुनिश्चित करें कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से न कटने पाए।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि वोट कटने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर सकती है और इसे लेकर चुनाव आयोग को पारदर्शिता बरतनी चाहिए। सपा लगातार यह सवाल उठा रही है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में वोट क्यों और कैसे कटे।
भाजपा भी हुई सतर्क

वहीं, SIR के आंकड़ों के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी भी पूरी तरह सतर्क हो गई है। पार्टी नेतृत्व को यह आशंका है कि वोटर लिस्ट में बदलाव का सीधा असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सभी जनप्रतिनिधियों, संगठन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे बूथ स्तर पर वोट बढ़ाने पर विशेष ध्यान दें।
हर बूथ पर वोट बढ़ाने का लक्ष्य
भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने निर्देश दिया है कि राज्य के हर बूथ पर 100 से 200 नए वोट जोड़े जाएं। पार्टी का मानना है कि बूथ मजबूत होगा तो चुनावी जीत की नींव भी मजबूत होगी। नए नियमों के मुताबिक, अब हर बूथ पर अधिकतम 1200 वोटर ही हो सकते हैं, इसलिए संगठन को बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
एक महीने तक चलेगा मिशन
भाजपा ने इस अभियान को मिशन मोड में शुरू किया है। अगले एक महीने तक हर बूथ पर मतदाता बढ़ाने का टास्क चलेगा। इस अभियान में सिर्फ जनप्रतिनिधियों ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और मंडल स्तर के पदाधिकारी भी लगाए गए हैं। पार्टी ने साफ कर दिया है कि इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
1.77 लाख से ज्यादा बूथों पर फोकस
उत्तर प्रदेश में इस समय कुल 1,77,516 बूथ हैं। भाजपा का फोकस इन सभी बूथों पर संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ मतदाता सूची को मजबूत करने पर है। पार्टी कार्यकर्ताओं को घर-घर संपर्क, नए मतदाताओं का पंजीकरण और छूटे हुए पात्र लोगों के नाम जुड़वाने की जिम्मेदारी दी गई है।
आने वाले चुनावों की तैयारी
स्पष्ट है कि SIR प्रक्रिया के बाद वोटर लिस्ट अब यूपी की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। जहां सपा इसे जनहित और लोकतंत्र से जोड़कर आंदोलन का रूप देने की तैयारी में है, वहीं भाजपा इसे संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति के तौर पर देख रही है। आने वाले महीनों में वोटर लिस्ट को लेकर यह सियासी जंग और तेज होने के आसार हैं, जिसका असर सीधे आने वाले चुनावों पर पड़ेगा।
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