लैंड फॉर जॉब केस में शिकंजा, JDU ने RJD नेतृत्व से मांगा इस्तीफा !

नौकरी के बदले जमीन को लेकर एक तरफ सत्ता पक्ष हमला कर रहा है तो दूसरी ओर आरजेडी ने न्यायालय पर भरोसा जताया है. पढ़िए किसने क्या कहा है.

जमीन के बदले नौकरी यानी ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में आरजेडी सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले में लालू प्रसाद यादव समेत कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ी है, बल्कि देश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। अलग-अलग राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं और बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है।

लैंड फॉर जॉब केस में शिकंजा, JDU ने RJD नेतृत्व से मांगा इस्तीफा !
लैंड फॉर जॉब केस में शिकंजा, JDU ने RJD नेतृत्व से मांगा इस्तीफा !

दरअसल, यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ये जमीनें लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर ट्रांसफर कराई गईं। इसी आधार पर सीबीआई और ईडी ने मामले की जांच की और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार (09 जनवरी, 2026) को इस मामले में सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि होती है और मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने लालू यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। अब इस मामले में नियमित ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इसे नैतिक जीत बताते हुए आरजेडी पर करारा हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि अदालत के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि ‘लैंड फॉर जॉब’ कोई राजनीतिक साजिश नहीं बल्कि ठोस सबूतों पर आधारित मामला है। उन्होंने कहा कि लालू परिवार लंबे समय से इसे बदले की राजनीति बताता रहा है, लेकिन अब कोर्ट ने सच्चाई सामने रख दी है।

प्रभाकर मिश्रा ने आगे कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बीजेपी की लड़ाई जारी रहेगी और कानून अपना काम कर रहा है। उन्होंने यह भी मांग की कि जिन नेताओं पर गंभीर आरोप तय हो चुके हैं, उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता ने तेजस्वी यादव को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि जो नेता खुद को बिहार की राजनीति का भविष्य बताते हैं, उन्हें पहले इन आरोपों का जवाब देना चाहिए।

वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल ने कोर्ट के फैसले पर संयमित प्रतिक्रिया दी है। आरजेडी नेताओं का कहना है कि आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। पार्टी का दावा है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और अंतिम फैसले में सच्चाई सामने आएगी। आरजेडी नेताओं ने यह भी कहा कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार पहले भी ऐसे मामलों का सामना कर चुका है और हर बार न्याय की जीत हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का असर बिहार की राजनीति पर गहराई से पड़ सकता है। आगामी चुनावों से पहले यह मुद्दा एक बार फिर गरमा सकता है और विपक्ष इसे बड़ा हथियार बना सकता है। वहीं आरजेडी के लिए यह मामला छवि और रणनीति दोनों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

कुल मिलाकर, लैंड फॉर जॉब मामले में आरोप तय होने के बाद कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सियासी जंग भी तेज हो गई है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कोर्ट की आगे की सुनवाई में क्या मोड़ आता है और इसका देश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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