सेवा एवं समरसता के भाव से भारत विकास परिषद ने मनाई विवेकानंद जयंती
नरेंद्र त्रिपाठी रायबरेली
भारत विकास परिषद, शाखा रायबरेली के तत्वावधान में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर शहर के प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान कृपलानी सरस्वती विद्या मंदिर में एक भव्य विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समरसता, सेवा और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के विचारों को समाज तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भारत विकास परिषद द्वारा परिसर में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर परिषद के पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।

कार्यक्रम में परिषद के अध्यक्ष अरविंद श्रीवास्तव ने उपस्थित अतिथियों, वक्ताओं और परिषद सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने युवाओं से कौशल विकास अभियानों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया और कहा कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब युवा अपने कौशल को पहचानकर उसे विकसित करेंगे। अध्यक्ष ने कहा कि भारत विकास परिषद समाज के हर वर्ग को साथ लेकर सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में निरंतर सक्रिय है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात कथावाचक स्वामी गोविन्द जी महाराज ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि प्रत्येक युवा को जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और अनुशासन व आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। स्वामी गोविन्द जी महाराज ने कहा कि आत्मबल, चरित्र निर्माण और राष्ट्रप्रेम स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन के प्रमुख स्तंभ हैं, जिन्हें अपनाकर युवा न केवल अपना बल्कि समाज और देश का भी उत्थान कर सकते हैं।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचंद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन को आत्मसात करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्म और राष्ट्रगौरव को विश्व पटल पर स्थापित किया। उनके विचारों को अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान मकर संक्रांति उत्सव भी बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समरसता भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया। यह आयोजन समाज में सामाजिक समरसता और भाईचारे के संदेश को मजबूत करने का प्रतीक रहा। परिषद के सदस्यों ने इसे सामाजिक एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम के उपरांत भारत विकास परिषद द्वारा समाज सेवा के अंतर्गत एक सराहनीय पहल की गई। न्यायाधीश राजेन्द्र नाथ की स्मृति में विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ठंड से बचाव हेतु कंबलों का वितरण किया गया। परिषद के इस कार्य की उपस्थित जनसमूह ने मुक्तकंठ से सराहना की। परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा ही सच्ची राष्ट्रसेवा है।
कार्यक्रम का संचालन परिषद के पूर्व अध्यक्ष राकेश कक्कड़ ने कुशलतापूर्वक किया, जबकि परिषद के संरक्षक सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों, वक्ताओं और सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत विकास परिषद आगे भी सेवा, संस्कार और समरसता के ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश देता रहेगा।
इस अवसर पर परिषद के पूर्व क्षेत्रीय संरक्षक डॉ. आर. बी. श्रीवास्तव, प्रांतीय उपाध्यक्ष नवल किशोर बाजपेई, सचिव अजय त्रिवेदी, पूर्व अध्यक्ष उमेश अग्रवाल, विजय सिंह, शाखा सेवा संयोजक राजा राम मौर्य, निशा सिंह, राकेश मिश्रा, वाणी पाण्डेय, नीरज गुप्ता, वी. के. अग्निहोत्री, दिवाकर द्विवेदी, विनोद दुबे, देवेंद्र श्रीवास्तव, बी. के. गर्ग, पवन श्रीवास्तव, नीरज श्रीवास्तव, शकुन प्रसाद पांडे, सुरेश चंद्र शुक्ला सहित बड़ी संख्या में परिषद सदस्य और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ समाज सेवा की भावना को और सशक्त किया।
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