लखनऊ के KGMU में आज होने वाली संभावित हड़ताल टल गई है। CM योगी से मुलाकात के बाद VC ने सभी संगठनों से हड़ताल न करने की अपील की है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में बीते दिनों सामने आए महिला रेजिडेंट डॉक्टर से जुड़े यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण (लव जिहाद) के गंभीर आरोपों के मामले में फिलहाल राहत भरी खबर सामने आई है। इस संवेदनशील प्रकरण को लेकर विश्वविद्यालय में डॉक्टरों और कर्मचारियों द्वारा हड़ताल की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद KGMU प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए हड़ताल न करने की अपील की है।

KGMU की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी और विश्वविद्यालय में उत्पन्न हालात पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद कुलपति ने सभी डॉक्टरों, रेजिडेंट्स, संगठनों और कर्मचारियों से मरीजों के हित में हड़ताल न करने की अपील की। कुलपति की इस अपील के बाद यह माना जा रहा है कि आज KGMU में हड़ताल नहीं होगी और स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।
दरअसल, महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि उसके साथ लंबे समय तक यौन शोषण किया गया और उस पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया। मामला सामने आने के बाद KGMU परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया। रेजिडेंट डॉक्टरों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर हड़ताल का संकेत दिया था। इससे मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई थी।
KGMU प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल संस्थान है, जहां प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां न सिर्फ लखनऊ बल्कि प्रदेश के दूर-दराज जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी गंभीर मरीज आते हैं। ऐसे में अगर हड़ताल होती तो ओपीडी, इमरजेंसी और सर्जरी सेवाओं पर गंभीर असर पड़ता और स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती थी। मरीजों की इसी संभावित परेशानी को देखते हुए सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थिति को संभालने की कोशिश तेज कर दी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और दोषी चाहे जो भी हो, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मरीजों के इलाज में किसी तरह की बाधा न आए, यह सरकार की प्राथमिकता है।
कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने डॉक्टरों और कर्मचारियों से संवाद करते हुए कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जांच प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा, लेकिन मरीजों के हित में सेवाएं बाधित नहीं होनी चाहिए। कुलपति की इस अपील के बाद अधिकांश संगठनों ने फिलहाल हड़ताल टालने का मन बनाया है।

हालांकि, विश्वविद्यालय परिसर में अभी भी तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और डॉक्टरों की नजर प्रशासन व सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। सभी की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, पीड़िता को सुरक्षा और न्याय मिले तथा दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। फिलहाल कुलपति की अपील और मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद मरीजों ने राहत की सांस ली है और KGMU में इलाज की व्यवस्था सामान्य बने रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
CM योगी ने STF को सौंपी केस की जांच
मामले पर हो रहे बवाल को देखते हए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच STF को सौंप दी है। कुलपति ने सीएम को फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कैंपस में किसी गैंग की सक्रियता पर सख्त कार्रवाई का संकेत है। विवाद तब और बढ़ा जब 9 जनवरी को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव KGMU पहुंचीं।
वे कुलपति से मुलाकात करना चाहती थीं, लेकिन VC चैंबर के बाहर 10 मिनट तक इंतजार के बाद माहौल बिगड़ गया। आरोप है कि उनके साथ आए लोगों ने हंगामा किया, तोड़फोड़ की और अभद्रता की। KGMU प्रशासन ने इस बाबत चौक थाने में शिकायत दर्ज कराई और अपर्णा यादव के खिलाफ FIR की मांग की।
अपर्णा यादव ने भी लगाए गंभीर आरोप

अपर्णा यादव का कहना है कि विशाखा कमेटी की रिपोर्ट में पीड़िता के धर्मांतरण के आरोप का जिक्र नहीं किया गया, और उनके साथ भी अभद्रता की गई। उन्होंने प्रशासन पर आरोपी को बचाने का आरोप लगाया। अपर्णा ने कहा कि KGMU में महिलाओं का लगातार शोषण हो रहा है और इसके अलावा भी कई अनियमितताएं हैं।
मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात के बाद कुलपति ने सभी संगठनों से हड़ताल न करने की अपील की है। डॉक्टरों की समिति ने पुलिस को FIR के लिए एक और दिन यानी कि 13 जनवरी तक का समय दिया है। यदि अपर्णा यादव के खिलाफ FIR नहीं हुई, तो 14 जनवरी से इमरजेंसी के अलावा सभी OPD सेवाएं बंद रहने का ऐलान किया गया है।
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