यूपी के बागपत में शारीरिक उत्पीड़न से परेशान महिला टीचर ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु मांगी है और खून से लिखा पत्र DM को सौंपा है।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक बेहद चौंकाने और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ प्रशासन बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न से परेशान एक महिला शिक्षिका ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग की है। इतना ही नहीं, अपनी पीड़ा को दिखाने के लिए महिला ने खून से पत्र लिखकर जिले के जिलाधिकारी (DM) को सौंपा, जिसके बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला एक निजी कॉलेज में शिक्षिका के पद पर कार्यरत है। महिला का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा लंबे समय से उसका मानसिक और शारीरिक रूप से उत्पीड़न किया जा रहा है। उसने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद न तो कॉलेज प्रबंधन ने उसकी बात सुनी और न ही संबंधित विभागीय अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई की। लगातार अपमान, दबाव और प्रताड़ना के चलते वह पूरी तरह टूट चुकी है।
महिला शिक्षिका ने अपने खून से लिखे पत्र में कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में उसने कहा है कि उसे बेवजह प्रताड़ित किया जा रहा है, नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है और उसके सम्मान को ठेस पहुंचाई जा रही है। उसने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन ने उसकी शिकायतों को दबाने की कोशिश की और उसे चुप रहने के लिए मानसिक दबाव बनाया गया। महिला का कहना है कि अब उसके पास जीने की कोई वजह नहीं बची है, इसलिए वह राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांग रही है।

खून से लिखा यह पत्र जब डीएम कार्यालय पहुंचा तो प्रशासन में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला से बातचीत की और उसे शांत कराने की कोशिश की। प्रशासन की ओर से महिला को उचित जांच और न्याय का भरोसा दिलाया गया है। डीएम कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, मामले की प्रारंभिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं और संबंधित कॉलेज प्रबंधन से भी जवाब तलब किया जाएगा।
इस घटना के सामने आने के बाद जिले में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन महिला शिक्षिका के समर्थन में सामने आ रहे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते महिला की शिकायतों पर ध्यान दिया गया होता तो शायद उसे इतना बड़ा कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह मामला शिक्षा संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
महिला शिक्षिका के परिजनों का कहना है कि वह पिछले काफी समय से तनाव में थी। घर पर भी वह अक्सर अपने साथ हो रहे उत्पीड़न की बात साझा करती थी, लेकिन उसे यह उम्मीद थी कि प्रशासन से उसे न्याय मिलेगा। परिजनों के मुताबिक, जब उसे कहीं से कोई राहत नहीं मिली तो उसने यह कठोर कदम उठाने का फैसला किया। परिवार ने भी प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी और को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न के मामलों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और पीड़ित को सुरक्षा का भरोसा मिले, तो ऐसे हालात पैदा ही न हों। फिलहाल प्रशासन की ओर से महिला शिक्षिका को काउंसलिंग और सुरक्षा देने की बात कही जा रही है।
बागपत में सामने आया यह मामला न केवल प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और क्या पीड़ित महिला को वास्तव में न्याय मिल पाता है या नहीं।