मद्रास हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने जन नायकन फिल्म की रिलीज की अनुमति दे दी थी, लेकिन डिवीजन बेंच ने उस पर रोक लगा दी.
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित और चर्चित फिल्म ‘जन नायकन’ की रिलीज फिलहाल कानूनी पचड़े में फंस गई है। अब इस मामले पर देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को सुनवाई करने जा रही है। फिल्म के निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस ने मद्रास हाईकोर्ट के एक अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है। इस याचिका पर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑग्स्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ सुनवाई करेगी।

दरअसल, पूरा विवाद फिल्म को मिलने वाले सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर है। ‘जन नायकन’ को शुरुआत में यू/ए सर्टिफिकेट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कुछ शिकायतों के बाद मामला उलझता चला गया। निर्माताओं ने 18 दिसंबर को फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के समक्ष प्रस्तुत किया था। बोर्ड ने कुछ कट्स और बदलावों के साथ फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की थी। इसके बाद प्रोड्यूसर्स ने बोर्ड द्वारा सुझाए गए सभी जरूरी बदलाव कर दिए, लेकिन इसके बावजूद सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया।
इसके बाद CBFC ने फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया। इस फैसले से असंतुष्ट होकर फिल्म निर्माताओं ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया। उनका कहना था कि जब सभी कट्स पूरे कर दिए गए हैं, तो सर्टिफिकेट जारी करने में देरी करना गलत है और इससे फिल्म की रिलीज प्रभावित हो रही है।

इस मामले में 9 जनवरी 2026 को मद्रास हाईकोर्ट की जस्टिस पी.टी. आशा की सिंगल बेंच ने बड़ा आदेश दिया। कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को तुरंत फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि किसी फिल्म के खिलाफ आई शिकायतों पर बार-बार विचार करना एक चिंताजनक रुझान पैदा कर सकता है, जिससे रचनात्मक स्वतंत्रता प्रभावित होगी।
हालांकि, उसी दिन CBFC ने इस आदेश को चुनौती देते हुए मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील दायर कर दी। डिवीजन बेंच ने यह कहते हुए सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी कि सेंसर बोर्ड को अपना पक्ष पूरी तरह रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था। डिवीजन बेंच की इस रोक के चलते फिल्म की रिलीज अनिश्चित हो गई।
गौरतलब है कि ‘जन नायकन’ पहले 9 जनवरी को ही रिलीज होने वाली थी, लेकिन हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश के बाद फिल्म की रिलीज टालनी पड़ी। इसके बाद फिल्म के निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस ने 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
‘जन नायकन’ को लेकर चर्चा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इसे थलपति विजय की राजनीति में पूरी तरह एंट्री से पहले की आखिरी फिल्म माना जा रहा है। हाल ही में विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ की शुरुआत की है और संकेत दिए हैं कि वह आने वाले समय में सक्रिय राजनीति में उतरेंगे। ऐसे में इस फिल्म को उनके फिल्मी करियर का अहम पड़ाव माना जा रहा है।
फिल्म का निर्माण केवीएन प्रोडक्शंस ने किया है और इसका निर्देशन मशहूर निर्देशक एच. विनोद ने संभाला है। फिल्म में थलपति विजय के साथ पूजा हेगड़े मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। निर्माता पक्ष के अनुसार, ‘जन नायकन’ को 22 देशों में चार भाषाओं में रिलीज किया जाना है, जिससे इसका दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है।
अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। शीर्ष अदालत का फैसला न सिर्फ ‘जन नायकन’ की रिलीज तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि सेंसर सर्टिफिकेशन से जुड़े मामलों में रचनात्मक स्वतंत्रता और प्रक्रिया की सीमाएं कहां तक हैं। फिल्म इंडस्ट्री और विजय के प्रशंसक बेसब्री से अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
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