पीआईसीयू वार्ड में स्टाफ नर्स ने तीन बच्चों को इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद 3 महीने की वैष्णवी, 11 महीने के अर्थ और 9 महीने के ऋषभ के मुंह से झाग निकला. 15 मिनट में ही वैष्णवी की मौत.
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले स्थित महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज एक दर्दनाक घटना को लेकर चर्चा में है। मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) वार्ड में उस समय हड़कंप मच गया, जब इंजेक्शन लगाए जाने के बाद तीन महीने की दुधमुंही बच्ची की मौत हो गई, जबकि दो अन्य मासूम बच्चों की हालत नाजुक बनी हुई है। इस घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मृत बच्ची की पहचान तीन माह की वैष्णवी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, वैष्णवी को रोने और दूध न पीने की शिकायत के चलते मंगलवार तड़के महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया था। बच्ची की हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे निगरानी में रखा और इलाज शुरू किया गया।
परिजनों का आरोप है कि दोपहर के समय डॉक्टर राउंड पर आए और वार्ड में भर्ती कई बच्चों को देखा। इसके बाद डॉक्टर ने स्टाफ नर्स को बच्चों को इंजेक्शन देने के निर्देश दिए। आरोप है कि उसी दौरान स्टाफ नर्स ने वैष्णवी के साथ-साथ 11 महीने के अर्थ और 9 महीने के ऋषभ को भी इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही समय बाद वैष्णवी की हालत अचानक बिगड़ने लगी।

परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन के बाद बच्ची की सांस तेज हो गई, शरीर में हरकत कम होने लगी और वह बेहोश सी हो गई। परिजन बार-बार नर्स और डॉक्टरों से गुहार लगाते रहे, लेकिन आरोप है कि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कुछ देर बाद इलाज के दौरान वैष्णवी ने दम तोड़ दिया।
मासूम की मौत की खबर जैसे ही परिजनों को मिली, पूरे परिवार में कोहराम मच गया। पीआईसीयू वार्ड के बाहर परिजनों और रिश्तेदारों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने स्टाफ नर्स पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि गलत इंजेक्शन या गलत मात्रा में दवा देने की वजह से बच्ची की जान गई है। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की।
घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन में भी अफरा-तफरी मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने सीएमएस (चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट) से लिखित शिकायत की। शिकायत मिलते ही सीएमएस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच टीम गठित कर दी है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और अगर किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, इंजेक्शन लगाए जाने के बाद बीमार हुए दो अन्य बच्चे—अर्थ और ऋषभ—की हालत भी चिंताजनक बनी हुई है। दोनों बच्चों का इलाज पीआईसीयू में जारी है और डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, बच्चों को फिलहाल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम इलाज में जुटी हुई है।
घटना ने एक बार फिर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि पहले भी मेडिकल कॉलेज में इलाज को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से ऐसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं।
फिलहाल वैष्णवी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिससे मौत के असली कारणों का पता चल सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच टीम की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि बच्ची की मौत इंजेक्शन की वजह से हुई या किसी अन्य मेडिकल कारण से।
इस दर्दनाक घटना ने पूरे बस्ती जिले को झकझोर कर रख दिया है। अब सभी की नजरें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं कि क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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