बॉलीवुड आइकन एआर रहमान के बयान से राजनीतिक संग्राम !

 एआर रहमान के बॉलीवुड में काम कम मिलने वाले बयान से राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ. विपक्ष ने समर्थन किया, जबकि बीजेपी नेताओं ने आरोप खारिज किए और देश में भेदभाव न होने की बात कही.

ऑस्कर विजेता और विश्वप्रसिद्ध संगीतकार एआर रहमान के एक हालिया इंटरव्यू ने देश की सियासत और फिल्म इंडस्ट्री—दोनों में हलचल पैदा कर दी है। इंटरव्यू में रहमान ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में उन्हें बॉलीवुड में पहले की तुलना में कम काम मिला है। इसके साथ ही उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि सत्ता में बदलाव का असर देश के रचनात्मक माहौल पर सकारात्मक नहीं रहा। रहमान के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया है और यह मुद्दा अब केवल कला और सिनेमा तक सीमित नहीं रहा।

बॉलीवुड आइकन एआर रहमान के बयान से राजनीतिक संग्राम !
बॉलीवुड आइकन एआर रहमान के बयान से राजनीतिक संग्राम !

एआर रहमान का नाम भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित संगीतकारों में शुमार है। ‘रोजा’, ‘बॉम्बे’, ‘दिल से’, ‘लगान’, ‘रंग दे बसंती’ जैसी फिल्मों से लेकर हॉलीवुड की ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ तक, रहमान ने अपनी संगीत प्रतिभा से वैश्विक पहचान बनाई है। ऐसे में उनका यह कहना कि उन्हें बीते कुछ वर्षों में अपेक्षाकृत कम काम मिला, कई लोगों के लिए चौंकाने वाला रहा। रहमान ने इंटरव्यू में यह भी संकेत दिया कि रचनात्मक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति का माहौल पहले जैसा नहीं रहा, जिसका असर कलाकारों के अवसरों पर पड़ा है।

उनके इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रिया शुरू हो गई। विपक्षी दलों ने रहमान के बयान को सरकार की नीतियों और मौजूदा माहौल पर सवाल उठाने के तौर पर देखा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने कहा कि जब देश के इतने बड़े कलाकार इस तरह की बात कह रहे हैं, तो यह संकेत देता है कि रचनात्मक और सांस्कृतिक क्षेत्र में दबाव का माहौल है। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि कला और संस्कृति को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए, लेकिन अगर कलाकार खुद असहज महसूस कर रहे हैं, तो इस पर गंभीर चर्चा जरूरी है।

वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं ने एआर रहमान के बयान पर आपत्ति जताई है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि किसी कलाकार को काम मिलना या न मिलना बाजार की मांग, दर्शकों की पसंद और फिल्म इंडस्ट्री के ट्रेंड पर निर्भर करता है, न कि राजनीति पर। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि रहमान ने अपने बयान में कोई ठोस उदाहरण या तथ्य पेश नहीं किए। कुछ नेताओं ने इसे “राजनीतिक रंग देने की कोशिश” करार दिया और कहा कि देश में रचनात्मकता के लिए आज भी भरपूर अवसर मौजूद हैं।

बॉलीवुड आइकन एआर रहमान के बयान से राजनीतिक संग्राम !
बॉलीवुड आइकन एआर रहमान के बयान से राजनीतिक संग्राम !

फिल्म इंडस्ट्री के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ फिल्मकारों और कलाकारों का मानना है कि रहमान जैसे अनुभवी और सम्मानित कलाकार की बात को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल का असर कला पर पड़ता है, चाहे वह सीधे तौर पर दिखे या नहीं। वहीं कुछ लोग इसे इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड और नए संगीतकारों के उभरने से जोड़कर देख रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एआर रहमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़े सवाल को सामने लाता है कि क्या राजनीति और सत्ता परिवर्तन का असर सचमुच रचनात्मक अभिव्यक्ति पर पड़ता है। कला और सिनेमा हमेशा से समाज और राजनीति का प्रतिबिंब रहे हैं, और ऐसे में कलाकारों की राय को नजरअंदाज करना आसान नहीं है।

कुल मिलाकर, एआर रहमान का यह बयान एक बार फिर यह बहस छेड़ गया है कि कला, सिनेमा और राजनीति के बीच की रेखा कितनी स्पष्ट है। जहां एक ओर विपक्ष इसे रचनात्मक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे सामान्य पेशेवर उतार-चढ़ाव बता रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बहस सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहती है या फिर कला और संस्कृति से जुड़े व्यापक मुद्दों पर किसी ठोस चर्चा की दिशा में आगे बढ़ती है।

Also Read :

संभल पुलिस पर गंभीर आरोप, अखिलेश बोले– कानून से ऊपर कोई नहीं !