कांग्रेस ने इस बार महा विकास अघाड़ी से अलग होकर चुनाव लड़ा. पार्टी को 24 सीटें मिलीं, जो 2017 के मुकाबले कम हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उसने वोट बचाए.
मुंबई की राजनीति में करीब तीन दशक बाद बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। देश की सबसे अमीर नगर निकाय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर अब भारतीय जनता पार्टी का दबदबा स्थापित हो गया है। महायुति गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे BJP पहली बार मुंबई में मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। इस चुनावी नतीजे ने न केवल महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण गढ़े हैं, बल्कि ठाकरे परिवार की परंपरागत सियासी पकड़ को भी बड़ा झटका दिया है।

227 सदस्यीय BMC सदन में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है। शुक्रवार को आए नतीजों में महायुति गठबंधन इस आंकड़े को पार करने में सफल रहा। चुनाव परिणामों के मुताबिक BJP ने सबसे ज्यादा 89 सीटें जीतीं, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटों पर जीत मिली। इस तरह गठबंधन के पास बहुमत तो है, लेकिन यह बढ़त बहुत बड़ी नहीं है। ऐसे में साफ है कि बड़े फैसलों के लिए BJP को अपने सहयोगी शिंदे गुट पर निर्भर रहना पड़ेगा।
इन नतीजों के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि मुंबई का अगला मेयर BJP का होगा। BJP विधायक और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मेयर पद पर पार्टी का ही उम्मीदवार बैठेगा। इस बयान से साफ हो गया है कि BJP अब मुंबई की सत्ता में निर्णायक भूमिका निभाने जा रही है। वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा अहम मुंबईकरों के जीवन में बदलाव लाना है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिंदे गुट स्टैंडिंग कमेटी जैसे अहम पदों पर अपनी दावेदारी मजबूत कर सकता है, ताकि नगर निगम के फैसलों में उसकी प्रभावी भूमिका बनी रहे।

इस चुनाव में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए भी काफी कुछ दांव पर लगा हुआ था। शिवसेना में टूट के बाद यह पहला बड़ा मौका था, जब उनके गुट की असली ताकत का आकलन होना था। 29 सीटें जीतकर शिंदे गुट ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह अब भी मुंबई की राजनीति में एक मजबूत खिलाड़ी है। इन नतीजों को शिंदे की सियासी साख बचने के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर तब जब उनके सामने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) की चुनौती बनी हुई थी।
दूसरी ओर, ठाकरे भाइयों—उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—के लिए यह चुनाव बड़ा झटका लेकर आया है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को मिलाकर कुल 71 सीटें मिलीं। इनमें से उद्धव गुट ने 65 सीटें जीतीं, जबकि राज ठाकरे की MNS को महज 6 सीटों पर संतोष करना पड़ा। हालांकि सीटों के लिहाज से नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन मुंबई के पारंपरिक मराठी इलाकों में ठाकरे परिवार की पकड़ अब भी बनी हुई है। दादर, परेल, लालबाग, वरली और शिवड़ी जैसे क्षेत्रों में उद्धव गुट ने अच्छा प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि वरली में शिंदे गुट के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा, जिसे ठाकरे खेमे के लिए नैतिक जीत माना जा रहा है।
वहीं ठाणे और नवी मुंबई जैसे इलाकों में ठाकरे भाइयों का प्रभाव पहले जैसा नजर नहीं आया। इन क्षेत्रों में महायुति गठबंधन ने बढ़त बनाकर यह संकेत दे दिया है कि मुंबई महानगर क्षेत्र की राजनीति में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है।
इस चुनाव का एक और चौंकाने वाला पहलू असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का प्रदर्शन रहा। AIMIM ने अपेक्षा से बेहतर नतीजे हासिल करते हुए कई सीटों पर बढ़त दर्ज की और यह साबित किया कि मुंबई की राजनीति में अब नए खिलाड़ी भी अपनी जगह बनाने लगे हैं। ओवैसी की पार्टी की इस बढ़त ने पारंपरिक दलों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।
कुल मिलाकर, BMC चुनाव के नतीजों ने मुंबई की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत कर दी है। BJP के लिए यह ऐतिहासिक सफलता है, शिंदे गुट के लिए साख की लड़ाई में राहत, जबकि ठाकरे परिवार के लिए आत्ममंथन का समय। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि महायुति इस बहुमत को किस तरह स्थिर सरकार और ठोस फैसलों में बदल पाती है।