लंबे इंतज़ार के बाद JPNIC को मिलेगा नया रूप
लखनऊ में 8 साल बाद जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय सेंटर (JPNIC) को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वर्ष 2017 से अधूरा पड़ा यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब 2026 में आगे बढ़ने की तैयारी में है।
लंबे समय से बंद पड़े जेपीएनआईसी को लेकर अब एक नई योजना तैयार कर ली गई है, जिसके तहत परिसर की खाली जमीन का इस्तेमाल पार्किंग एरिया के रूप में किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, जेपीएनआईसी परिसर में सड़क पर खड़ी गाड़ियों की वजह से होने वाले यातायात अवरोध को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। राजधानी के इस इलाके में अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है, ऐसे में परिसर की खाली जगह को पार्किंग के रूप में विकसित कर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने की योजना है। इसके लिए सेंटर परिसर की साफ-सफाई का काम पूरा कर लिया गया है और पार्किंग के लिए जगह चिन्हित कर दी गई है।
हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल JPNIC की मुख्य इमारत के अधूरे निर्माण कार्य और उसके विधिवत संचालन को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। यानी आने वाले समय में सेंटर को किस रूप में और कब तक पूरी तरह शुरू किया जाएगा, इस पर अभी भी असमंजस बना हुआ है।
LDA के पास है JPNIC की जिम्मेदारी
जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय सेंटर के संचालन और देखरेख की जिम्मेदारी पहले ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंपी जा चुकी है। ऐसे में अब एलडीए इस परियोजना को लेकर आगे की रणनीति पर काम कर रहा है।
एलडीए अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल प्राथमिकता परिसर के बेहतर उपयोग और यातायात व्यवस्था को सुधारने की है, जिसके तहत पार्किंग की योजना पर अमल किया जा रहा है।

गौरतलब है कि JPNIC का निर्माण कार्य वर्ष 2013 में शुरू हुआ था। यह परियोजना समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान शुरू की गई थी और इसे एक वर्ल्ड क्लास इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना थी। लेकिन वर्ष 2017 में सरकार बदलने के बाद यह प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले ही रोक दिया गया। तब से लेकर अब तक यह इमारत अधूरी पड़ी हुई है।
आज भी JPNIC की बिल्डिंग में फिनिशिंग, इंटीरियर और कई तकनीकी कार्य अधूरे हैं। लंबे समय तक बंद रहने के कारण भवन के रखरखाव और संरचना को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट था JPNIC
जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय सेंटर को समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। अपने कार्यकाल के दौरान अखिलेश यादव ने लखनऊ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से इस सेंटर की परिकल्पना की थी। योजना थी कि JPNIC को एक ऐसी आधुनिक सुविधा के रूप में विकसित किया जाए, जहाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सेमिनार और बड़े आयोजन किए जा सकें।

जेपीएनआईसी में अत्याधुनिक ऑडिटोरियम, कन्वेंशन हॉल, प्रदर्शनी स्थल, गेस्ट हाउस और अन्य विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना थी। लेकिन सरकार बदलने के बाद बजट और प्राथमिकताओं में बदलाव के चलते यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया।
2026 में आगे बढ़ेगा प्रोजेक्ट?
अब 8 साल बाद जेपीएनआईसी को लेकर फिर से गतिविधियां शुरू होने से यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में इस परियोजना पर कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि फिलहाल पार्किंग के रूप में परिसर के उपयोग का फैसला लिया गया है, लेकिन भविष्य में इस अंतरराष्ट्रीय सेंटर को किस रूप में विकसित किया जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
शहरवासियों को उम्मीद है कि जिस प्रोजेक्ट को कभी लखनऊ की पहचान बनाने का सपना दिखाया गया था, वह आने वाले वर्षों में अधूरा नहीं रहेगा और राजधानी को एक बार फिर एक भव्य सार्वजनिक सुविधा मिल सकेगी।
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