पाल समाज पर लाठीचार्ज के बाद अखिलेश यादव का तंज

अखिलेश यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार जन आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है

वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर मूर्ति से जुड़े एक मामले को लेकर पाल समाज द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई के बाद सियासत तेज हो गई है। घाट परिसर और आसपास की संकरी गलियों में बड़ी संख्या में पाल समाज के लोग एकत्र होकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वाराणसी पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भीड़ बढ़ने और रास्ते अवरुद्ध होने के कारण पुलिस ने हस्तक्षेप किया। पुलिस ने लाठीचार्ज कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया और एक दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। इसके बाद घाट क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

पाल समाज पर लाठीचार्ज के बाद अखिलेश यादव का तंज
पाल समाज पर लाठीचार्ज के बाद अखिलेश यादव का तंज

पुलिस प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शन बिना अनुमति के किया जा रहा था और इससे घाट क्षेत्र में श्रद्धालुओं तथा आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी। अधिकारियों के मुताबिक, कई बार समझाने के बावजूद जब भीड़ नहीं मानी, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

अखिलेश यादव का तीखा हमला

इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग तब ले लिया, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई पर सरकार को आड़े हाथों लिया। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए भारतीय जनता पार्टी और सरकार पर तंज कसा।

पाल समाज पर लाठीचार्ज के बाद अखिलेश यादव का तंज
पाल समाज पर लाठीचार्ज के बाद अखिलेश यादव का तंज

अखिलेश यादव ने लिखा,

“समाचार—वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पाल समाज के प्रदर्शन पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज और एक दर्जन से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया। अब भाजपाई कहेंगे ये समाचार भी ‘एआई’ से बना है। अरे कोई इन्हें समझाए: भाई सब कुछ नहीं होता एआई। भाजपाइयों से जनता पूछ रही है कि जब सब कुछ एआई से ही हो रहा है तो आप क्या कर रहे हैं? भाजपाइयों ने कमीशन लेकर कहीं सरकार को ही एआई को आउटसोर्स तो नहीं कर दिया?”

अखिलेश यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार जनता की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है, जबकि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए नए-नए बहाने गढ़ रही है।

विपक्ष बनाम सरकार

समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। पार्टी का आरोप है कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी मांगें रखने वाले लोगों पर लाठीचार्ज करना सरकार की असहिष्णुता को दर्शाता है। विपक्ष का कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते संवाद करता, तो स्थिति बिगड़ती ही नहीं।

वहीं, दूसरी ओर सरकार और पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और बिना अनुमति के किसी भी प्रकार का प्रदर्शन या भीड़ जमा करना स्वीकार्य नहीं है, खासकर संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में।

संवेदनशील इलाका, सख्त नजर

मणिकर्णिका घाट वाराणसी का एक अत्यंत संवेदनशील और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है, जहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में यहां किसी भी तरह का अव्यवस्थित प्रदर्शन सुरक्षा और व्यवस्था के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। प्रशासन का कहना है कि इसी कारण स्थिति बिगड़ने से पहले कार्रवाई की गई।

फिलहाल घाट क्षेत्र में शांति बनी हुई है, लेकिन इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सरकार बनाम विपक्ष की बहस को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे जन आंदोलन और अभिव्यक्ति की आज़ादी से जोड़कर उठा रहा है, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था का हवाला दे रही है।

इस पूरे घटनाक्रम पर अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और राजनीतिक दलों के रुख पर टिकी हुई है।

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