‘मुझे शर्म आती है’, ग्रेटर नोएडा हादसे पर नितिन गडकरी का सख्त संदेश !

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. मैं इस बात को इसलिए समझ सकता हूं क्योंकि मैं भी सड़क हादसे का पीड़ित रहा हूं. मेरा पैरा चार जगह टूटा था.

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत पर गहरी संवेदना जताते हुए सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सिस्टम की खामियों पर खुलकर बात की है। बुधवार, 21 जनवरी 2026 को एबीपी नेटवर्क की ओर से आयोजित इंडिया 2047 यूथ कॉन्क्लेव के मंच से उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और बतौर सड़क हादसे के पीड़ित वह इस दर्द को अच्छी तरह समझते हैं।

‘मुझे शर्म आती है’, ग्रेटर नोएडा हादसे पर नितिन गडकरी का सख्त संदेश !
‘मुझे शर्म आती है’, ग्रेटर नोएडा हादसे पर नितिन गडकरी का सख्त संदेश !

नितिन गडकरी ने भावुक होते हुए कहा कि वह खुद भी एक गंभीर सड़क हादसे का शिकार रह चुके हैं। उनके पैर चार जगह से टूट गए थे और लंबे समय तक इलाज चला। उन्होंने कहा, “इसलिए जब मैं इस तरह की घटनाओं के बारे में सुनता हूं, तो मुझे केवल एक मंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक पीड़ित के तौर पर भी दर्द महसूस होता है।” गडकरी ने साफ शब्दों में कहा कि युवराज मेहता की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी चूक को उजागर करती है।

केंद्रीय मंत्री ने मंच से देश में सड़क हादसों के भयावह आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने कहा, “मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता, बल्कि यह कहते हुए मुझे शर्म आती है कि हमारे देश में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें लगभग 1 लाख 80 हजार लोगों की मौत हो जाती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन मौतों में 18 से 30 साल के युवाओं की हिस्सेदारी करीब 66 प्रतिशत है।” उन्होंने कहा कि यह आंकड़े किसी भी जिम्मेदार सरकार और समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं।

गडकरी ने कहा कि सड़क हादसों को रोकना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। इसके लिए सड़क डिजाइन, इंजीनियरिंग, निर्माण गुणवत्ता, साइनबोर्ड, लाइटिंग और सेफ्टी ऑडिट जैसे पहलुओं पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। उन्होंने माना कि केवल कानून बनाना काफी नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही तय करना भी उतना ही जरूरी है। ग्रेटर नोएडा जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि कहीं न कहीं निगरानी और जिम्मेदारी की कड़ी कमजोर पड़ जाती है।

अपने संबोधन में नितिन गडकरी ने सड़क हादसों में घायलों की मदद को लेकर समाज में मौजूद डर और भ्रांतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आम लोगों के मन में यह डर रहता है कि अगर वे किसी घायल की मदद करेंगे तो पुलिस, कोर्ट-कचहरी और कानूनी झंझटों में फंस जाएंगे। इसी वजह से कई बार लोग घायल को देखकर भी आगे नहीं आते, जिससे कीमती समय बर्बाद हो जाता है और जान चली जाती है।

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इस डर को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए गडकरी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और कानून में किए गए संशोधनों के तहत मदद करने वाले व्यक्ति को पूरी सुरक्षा दी गई है। उन्होंने कहा, “अगर कोई व्यक्ति सड़क हादसे में घायल किसी इंसान को उठाकर तुरंत किसी भी अस्पताल में पहुंचाता है, तो हम उसे ‘राहवीर’ घोषित करते हैं। ऐसे व्यक्ति को 25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाता है और सबसे अहम बात यह है कि उससे किसी भी तरह की पूछताछ नहीं होती, न पुलिस परेशान करती है और न ही कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं।”

गडकरी ने युवाओं से भी अपील की कि वे सड़क सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार नागरिक बनें। हेलमेट, सीट बेल्ट, स्पीड लिमिट और ट्रैफिक नियमों का पालन केवल जुर्माने से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की जान बचाने के लिए करें। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी तरफ से इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार रही है, लेकिन जब तक समाज खुद जागरूक नहीं होगा, तब तक हादसों पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल है।

ग्रेटर नोएडा में युवराज मेहता की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम हर हादसे के बाद ही जागेंगे या समय रहते खतरनाक सड़कों और लापरवाह सिस्टम को सुधारेंगे। नितिन गडकरी का यह बयान न सिर्फ संवेदना है, बल्कि सड़क सुरक्षा को लेकर एक सख्त और आत्ममंथन करने वाला संदेश भी है।

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