हरियाणा के सोनीपत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती। राष्ट्र ही संन्यासी का स्वाभिमान है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े हालिया विवाद के बीच ‘संत और सनातन’ को लेकर एक बड़ा और सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि संन्यासी और संत के लिए धर्म सर्वोपरि होता है और एक सच्चे संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्र ही संन्यासी का स्वाभिमान होता है, और जो लोग धर्म की आड़ में सनातन परंपरा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, वे समाज और संस्कृति दोनों के लिए खतरा हैं।

हरियाणा के सोनीपत में दिया बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को हरियाणा के सोनीपत पहुंचे थे, जहां उन्होंने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब संत अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर धार्मिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज है। सीएम योगी ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि आज के समय में “बहुत से कालनेमि सनातन को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं”।
उन्होंने रामायण के पात्र कालनेमि का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कालनेमि ने साधु का वेश धारण कर हनुमान को भ्रमित करने की कोशिश की थी, वैसे ही आज भी कुछ लोग संतों का रूप लेकर सनातन धर्म को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

संन्यासी का जीवन और राष्ट्रभाव
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में संन्यासी जीवन की व्याख्या करते हुए कहा कि संन्यासी का जीवन त्याग, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक होता है। उन्होंने कहा, “संन्यासी के लिए न कोई व्यक्तिगत लाभ होता है और न ही कोई निजी स्वार्थ। उसका सम्मान और आत्मगौरव केवल राष्ट्र से जुड़ा होता है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग धर्म को निजी एजेंडे के लिए इस्तेमाल करते हैं, वे न तो धर्म के सच्चे प्रतिनिधि हो सकते हैं और न ही समाज के मार्गदर्शक।
राम मंदिर का जिक्र
अपने भाषण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में बने राम मंदिर का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब राम मंदिर का निर्माण केवल एक कल्पना माना जाता था। वर्षों तक इसे लेकर विवाद, संघर्ष और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे। लेकिन आज, एक मजबूत और निर्णायक सरकार के कारण अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हो सका है।
उन्होंने कहा, “आज अयोध्या में रामलला विराजमान हैं और उनकी पताका पूरे गौरव के साथ लहरा रही है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है।”
प्रयागराज और सनातन की विरासत
मुख्यमंत्री ने प्रयागराज का भी जिक्र किया और कहा कि यह शहर सनातन संस्कृति की जीवंत पहचान है। कुंभ और महाकुंभ जैसे आयोजनों ने पूरी दुनिया को यह दिखाया है कि सनातन परंपरा कितनी विशाल, समावेशी और अनुशासित है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है।
सनातन को कमजोर करने की साजिश का आरोप
सीएम योगी ने अपने भाषण में दो टूक कहा कि आज एक संगठित प्रयास के तहत सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग धर्म की आड़ लेकर भ्रम फैलाते हैं और समाज को बांटने का काम करते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने संत समाज से भी अपील की कि वे अपनी मर्यादा और परंपराओं की रक्षा करें और समाज को सही दिशा दिखाने का काम करें।
राजनीतिक और सामाजिक संकेत
मुख्यमंत्री का यह बयान न केवल धार्मिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ का यह संदेश सीधे तौर पर सनातन संस्कृति के समर्थकों को एकजुट करने और धार्मिक पहचान को लेकर स्पष्ट रुख दिखाने की कोशिश है। संत अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के संदर्भ में यह बयान सरकार की सोच और दिशा को भी दर्शाता है।
कुल मिलाकर, योगी आदित्यनाथ का यह बयान सनातन धर्म, संत समाज और राष्ट्रवाद को एक सूत्र में बांधने वाला माना जा रहा है, जिसने धार्मिक और राजनीतिक विमर्श को एक बार फिर तेज कर दिया है।
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