‘तिरंगे का सम्मान सर्वोपरि’, सपा नेताओं ने घेरा धीरेंद्र शास्त्री को !

समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधा और कहा कि वो आरएसएस के प्रवक्ता बन गए हैं और देश में हिन्दू-मुस्लिम में तनाव पैदा कर रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान ने सियासी हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। उनके बयान को लेकर समाजवादी पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया है और इसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बताया है। धीरेंद्र शास्त्री के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है और इसे लेकर सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

‘तिरंगे का सम्मान सर्वोपरि’, सपा नेताओं ने घेरा धीरेंद्र शास्त्री को !
‘तिरंगे का सम्मान सर्वोपरि’, सपा नेताओं ने घेरा धीरेंद्र शास्त्री को !

दरअसल, बांदा में एक कार्यक्रम के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था, “जिस दिन तिरंगे में चांद आ गया, उस दिन न शर्मा बचेंगे और न वर्मा।” इस बयान को लेकर समाजवादी पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सपा नेताओं का आरोप है कि इस तरह के बयान देश में नफरत फैलाने और हिंदू-मुस्लिम के बीच तनाव पैदा करने का काम करते हैं। बयान सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई और विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर सांप्रदायिक सोच से जोड़कर देखा।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक और लखनऊ मध्य से विधायक रविदास मेहरोत्रा ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री लगातार ऐसे बयान देते रहे हैं, जिनसे समाज में नफरत बढ़ती है। रविदास मेहरोत्रा ने कहा, “धीरेंद्र शास्त्री अब RSS के प्रवक्ता बन गए हैं। वे देश में ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे हिंदू और मुस्लिम के बीच तनाव पैदा हो। इस तरह के बयान लोगों को आपस में तोड़ने और सांप्रदायिक सद्भाव को खराब करने वाले हैं।”

रविदास मेहरोत्रा ने आगे कहा कि कोई भी सच्चा धार्मिक गुरु इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करता। उन्होंने कहा कि धार्मिक गुरुओं की भूमिका समाज को जोड़ने की होती है, न कि समाज को बांटने की। सपा विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “धार्मिक गुरु का काम सभी धर्मों का सम्मान करना होता है। वह प्रेम, भाईचारे और सद्भाव की बात करता है, न कि नफरत और डर का माहौल बनाता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक विविधताओं वाला देश है, जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंचों से इस तरह के बयान बेहद गैर-जिम्मेदाराना हैं। रविदास मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को भड़काकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी ऐसी राजनीति का विरोध करती रहेगी।

सपा विधायक ने यह भी कहा कि देश का तिरंगा सभी भारतीयों की शान और पहचान है। तिरंगे को किसी भी धर्म या समुदाय से जोड़कर देखना गलत है। उन्होंने कहा कि तिरंगा सभी धर्मों, जातियों और वर्गों का प्रतीक है और उसका सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। इस तरह की टिप्पणियां न केवल आपत्तिजनक हैं, बल्कि देश की एकता और अखंडता के लिए भी खतरा पैदा करती हैं।

इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी जाहिर की है। पार्टी का कहना है कि मौजूदा समय में जब देश को एकजुट रहने की जरूरत है, तब इस तरह के बयान समाज को बांटने का काम कर रहे हैं। सपा नेताओं ने मांग की है कि ऐसे बयानों पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को सार्वजनिक रूप से संयम बरतना चाहिए।

वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक नेताओं के बयानों का राजनीतिकरण होना अब आम बात हो गई है। ऐसे बयान अक्सर चुनावी माहौल या राजनीतिक एजेंडे को साधने के लिए दिए जाते हैं, लेकिन इसका असर समाज के ताने-बाने पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नेताओं और धार्मिक गुरुओं दोनों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए, क्योंकि उनके शब्दों का असर लाखों लोगों पर पड़ता है।

फिलहाल, पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बयान को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है और आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

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