मनरेगा बना सियासी हथियार, सड़क पर उतरी कांग्रेस !

मनरेगा की गूंज ,सड़क से सदन तक कांग्रेस का दबाव

राजधानी लखनऊ में सोमवार को कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ ज़ोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उत्तर प्रदेश विधानसभा का घेराव करते हुए मनरेगा, बेरोज़गारी, कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा और विधानसभा के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

मनरेगा बना सियासी हथियार, सड़क पर उतरी कांग्रेस !
मनरेगा बना सियासी हथियार, सड़क पर उतरी कांग्रेस !

कांग्रेस के विधानसभा घेराव कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता लखनऊ पहुंचे। जैसे ही प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़े, पहले से लगाए गए बैरिकेड्स पर पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली। हालात कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गए, जिसके बाद पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इससे मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, हालांकि स्थिति को जल्द ही काबू में कर लिया गया।

मनरेगा बना सियासी हथियार, सड़क पर उतरी कांग्रेस !
मनरेगा बना सियासी हथियार, सड़क पर उतरी कांग्रेस !

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया। इस मौके पर कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि देश में NREGA केवल एक कानून नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए रोज़गार का सबसे बड़ा साधन रहा है। उन्होंने कहा कि लाखों गरीब परिवारों की आजीविका इस योजना से जुड़ी हुई है, लेकिन मौजूदा सरकार की नीतियों के चलते मनरेगा की आत्मा को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

आराधना मिश्रा मोना ने आरोप लगाया कि जिस तरह महात्मा गांधी के नाम को योजना से हटाया गया, उससे सरकार की मंशा साफ झलकती है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी केवल एक नाम नहीं, बल्कि विचारधारा हैं और उनके नाम को हटाना गांधीवादी सोच पर हमला है। उन्होंने यह भी कहा कि AICC के आह्वान पर पूरे देश में आंदोलन चल रहा है और उसी क्रम में उत्तर प्रदेश में विधानसभा घेराव का निर्णय लिया गया, जिसमें कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

वहीं प्रदर्शन को लेकर अजय राय, जो उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विधानसभा के बाहर जिस तरह की बैरिकेडिंग और पुलिस घेरा खड़ा किया गया है, वह जनता की आवाज़ दबाने की कोशिश है। अजय राय ने कहा, “लोकतंत्र में डराने-धमकाने और डंडे के जोर पर हुकूमत करने को राज नहीं कहा जा सकता। सरकारें प्यार, भरोसे और संवाद से चलती हैं, न कि बुलडोजर और खौफ से।”

अजय राय ने आगे कहा कि प्रदेश में युवाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है। न उन्हें समय पर नौकरियां मिल रही हैं और न ही परीक्षाएं ठीक से कराई जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर तरफ डर और अनिश्चितता का माहौल है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सनातन की गुरु-शिष्य परंपरा और लोगों की आस्था को कोई सरकार या अदालत तय नहीं कर सकती। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना गलत है।

अपने संबोधन के अंत में अजय राय ने कहा कि कांग्रेस न तो दबेगी और न ही झुकेगी। उन्होंने कहा, “जब तक गांधी जी का आशीर्वाद और जनता का साथ हमारे साथ है, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। यह लड़ाई हक और सम्मान की है और कांग्रेस इसे आखिरी दम तक लड़ने के लिए तैयार है।”

कुल मिलाकर, विधानसभा घेराव के जरिए कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में प्रदेश में सरकार के खिलाफ आंदोलन और तेज़ हो सकता है। मनरेगा और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों को लेकर सियासी माहौल गरमाता नजर आ रहा है, वहीं प्रशासन भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सतर्क बना हुआ है।

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