सुभासपा इस रैली के जरिए राजभर, ब्राह्मण, क्षत्रिय, चौहान, नाई, निषाद समेत समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाकर प्रदेश भर में राजनीतिक संदेश देने की कोशिश में है.
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर एक बार फिर पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी में हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह शक्ति प्रदर्शन बेहद अहम माना जा रहा है। एनडीए गठबंधन का हिस्सा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) 22 फरवरी 2026 को आजमगढ़ जिले की अतरौलिया विधानसभा सीट में एक विशाल ‘सामाजिक समरसता महारैली’ का आयोजन करने जा रही है। यह रैली अहिरौला स्थित जनता इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित होगी।

पार्टी का दावा है कि इस महारैली में एक लाख से अधिक लोगों की मौजूदगी रहेगी। इसके साथ ही करीब दस हजार प्रबुद्ध ब्राह्मणों के शामिल होने की बात भी कही जा रही है। सुभासपा इस रैली के जरिए राजभर समाज के साथ-साथ ब्राह्मण, क्षत्रिय, चौहान, नाई, निषाद और अन्य पिछड़े व अति पिछड़े वर्गों को एक मंच पर लाकर सामाजिक समरसता और राजनीतिक एकजुटता का संदेश देना चाहती है। पार्टी नेतृत्व इसे सिर्फ एक रैली नहीं, बल्कि 2027 के चुनावी रण का आगाज मान रहा है।
आजमगढ़ में सुभासपा का बड़ा शक्ति प्रदर्शन

इस महारैली में राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना के हजारों कमांडर भी शामिल होंगे। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इन कमांडरों की मौजूदगी संगठन की अनुशासन क्षमता और जमीनी ताकत का प्रदर्शन करेगी। सुभासपा का कहना है कि यह रैली पूर्वांचल की राजनीति में एक बड़ा संकेत देगी और यह दिखाएगी कि एनडीए गठबंधन न सिर्फ मजबूत है, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों को साथ लेकर चलने की रणनीति पर भी काम कर रहा है।
राजनीतिक रूप से आजमगढ़ को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने आजमगढ़ की सभी 10 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं लोकसभा चुनाव में भी आजमगढ़ सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी। ऐसे में सुभासपा द्वारा आजमगढ़ को केंद्र बनाकर इतनी बड़ी रैली करना सियासी मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है।
अतरौलिया पर खास फोकस
2022 में योगी आदित्यनाथ सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद ओम प्रकाश राजभर समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर एनडीए में शामिल हो गए थे। इसके बाद से ही उन्होंने आजमगढ़, खासकर अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, ओम प्रकाश राजभर कई बार यहां लंबे समय तक डेरा डाल चुके हैं और लगातार क्षेत्रीय नेताओं व कार्यकर्ताओं से संपर्क में हैं।
अरुण राजभर का आठ महीने से डेरा
ओम प्रकाश राजभर के छोटे बेटे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर भी पिछले करीब आठ महीनों से आजमगढ़ में डेरा डाले हुए हैं। वे लगातार गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत करने, सामाजिक बैठकों और जनसंपर्क कार्यक्रमों में जुटे हुए हैं। पार्टी का मानना है कि इस लंबे प्रवास से सुभासपा को क्षेत्र में मजबूत आधार बनाने में मदद मिली है।
संगठन पूरी ताकत से जुटा
इस महारैली को सफल बनाने की जिम्मेदारी सुभासपा के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर संभाल रहे हैं। वे लगातार कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। अरविंद राजभर का दावा है कि आजमगढ़ में अब तक किसी भी पार्टी ने इतनी बड़ी रैली नहीं की है। उनके मुताबिक, यह महारैली न सिर्फ आजमगढ़ बल्कि पूरे पूर्वांचल में बड़ा सियासी संदेश देगी।
2027 की रणनीति
पार्टी नेताओं का कहना है कि इस रैली के जरिए सुभासपा यह दिखाना चाहती है कि एनडीए गठबंधन 2027 के चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। अरविंद राजभर ने दावा किया कि इस महारैली के बाद राजनीतिक समीकरण बदलेंगे और 2027 में एनडीए आजमगढ़ की सभी सीटों पर जीत दर्ज करेगा।
कुल मिलाकर, आजमगढ़ में होने वाली ‘सामाजिक समरसता महारैली’ को ओम प्रकाश राजभर और सुभासपा के लिए एक बड़े शक्ति परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है। यह रैली न सिर्फ पूर्वांचल की राजनीति की दिशा तय कर सकती है, बल्कि 2027 के चुनावी माहौल की झलक भी पेश करेगी।