UP में इंटरनेशनल टच! यमुना एक्सप्रेस-वे पर बसेंगी दो हाई-टेक सिटी !

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यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने जापान सिटी और सिंगापुर सिटी विकसित करने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा है. ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 5A और 7 में 500-500 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है.

यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक और अंतरराष्ट्रीय निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने जापान सिटी और सिंगापुर सिटी के विकास को लेकर औपचारिक प्रस्ताव उत्तर प्रदेश शासन को भेज दिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र में लगभग 1000 एकड़ भूमि पर दो हाई-टेक अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक शहर विकसित किए जाने की तैयारी है।

UP में इंटरनेशनल टच! यमुना एक्सप्रेस-वे पर बसेंगी दो हाई-टेक सिटी !
UP में इंटरनेशनल टच! यमुना एक्सप्रेस-वे पर बसेंगी दो हाई-टेक सिटी !

18 फरवरी 2026 को जारी पत्र के माध्यम से यीडा ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश शासन को अवगत कराया है कि प्राधिकरण क्षेत्र में जापान सिटी और सिंगापुर सिटी के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है। यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आरके सिंह ने बताया कि इन दोनों सिटीज को लेकर भूमि अधिग्रहण से संबंधित पूरी योजना तैयार कर ली गई है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के दौरे से जुड़ा प्रस्ताव

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रस्तावित जापान और सिंगापुर यात्रा के संदर्भ में प्राधिकरण से यह अपेक्षा की गई थी कि वह अपने क्षेत्र में जापान सिटी और सिंगापुर सिटी के लिए उपयुक्त क्षेत्र चिन्हित कर शासन को सूचना उपलब्ध कराए। इसी क्रम में यीडा ने ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के सेक्टर-5ए और सेक्टर-7 को इन दोनों अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित किया है।

सेक्टर-5ए और सेक्टर-7 का नया खाका

यीडा की महायोजना के अनुसार सेक्टर-5ए और सेक्टर-7 को मल्टीपर्पज औद्योगिक क्षेत्र के रूप में नियोजित किया गया है। इन सेक्टरों में औद्योगिक उपयोग के लिए न्यूनतम 70 प्रतिशत भूमि निर्धारित की गई है। इसके अलावा आवासीय उपयोग अधिकतम 12 प्रतिशत, वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए अधिकतम 13 प्रतिशत और संस्थागत सुविधाओं के लिए न्यूनतम 5 प्रतिशत भूमि उपयोग का प्रावधान रखा गया है। प्राधिकरण का मानना है कि इन सेक्टरों को एक इंटीग्रेटेड औद्योगिक सिटी के रूप में विकसित किया जा सकता है, जहां उद्योग, आवास, वाणिज्य और संस्थागत सुविधाएं संतुलित रूप से मौजूद होंगी।

1000 एकड़ में दो अंतरराष्ट्रीय सिटीज

योजना के तहत जापान सिटी के लिए ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-5ए में लगभग 500 एकड़ भूमि प्रस्तावित की गई है। इसी तरह सिंगापुर सिटी के लिए सेक्टर-7 में 500 एकड़ क्षेत्र चिह्नित किया गया है। दोनों परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण किए जाने का प्रस्ताव है, जिसकी प्रक्रिया को लेकर यीडा पहले से ही तैयारी कर चुका है। प्राधिकरण अधिकारियों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की योजना पहले से तैयार होने के कारण परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

EPC मॉडल पर होगा विकास

जापान सिटी और सिंगापुर सिटी का विकास ईपीसी यानी इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन मॉडल के तहत किए जाने का प्रस्ताव है। इस मॉडल के तहत एक ही एजेंसी डिजाइन, निर्माण और आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति की जिम्मेदारी संभालेगी, जिससे परियोजना की गुणवत्ता और समय-सीमा दोनों पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि ईपीसी मॉडल से हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक औद्योगिक इकाइयों और स्मार्ट सुविधाओं के विकास में तेजी आएगी।

निवेश और रोजगार की बड़ी संभावनाएं

यीडा के अनुसार, जापान और सिंगापुर जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के मॉडल पर बनने वाली ये सिटीज अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करेंगी। खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, आईटी और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही, इन परियोजनाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है।

यमुना एक्सप्रेस-वे बनेगा ग्लोबल कॉरिडोर

इन दो हाई-टेक सिटीज के विकसित होने से यमुना एक्सप्रेस-वे को एक अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक और निवेश कॉरिडोर के रूप में पहचान मिलने की उम्मीद है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ यह क्षेत्र विदेशी निवेशकों के लिए और भी आकर्षक बन सकता है। शासन स्तर पर प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इस मेगा प्रोजेक्ट पर काम तेज़ी से शुरू होने की संभावना है, जिससे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को एक नई दिशा मिलेगी।

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