सीएम योगी के जापान विज़िट पर अखिलेश की चुटकी !

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे पर तंज कसा है. सपा चीफ ने कहा है कि शहरों को आगे बढ़ाने का सकारात्मक सबक लेते आइएगा.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे को लेकर तीखा सियासी तंज कसा है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक के बाद एक पोस्ट करते हुए न सिर्फ इस विदेश यात्रा पर सवाल उठाए, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से भी जोड़ दिया। उनके बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ा दी है।

सीएम योगी के जापान विज़िट पर अखिलेश की चुटकी !
सीएम योगी के जापान विज़िट पर अखिलेश की चुटकी !

अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा कि अगर मुख्यमंत्री जापान जा ही रहे हैं तो “क्योटो भी चले जाइएगा।” उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि भारत का प्रधान-संसदीय क्षेत्र काशी, क्योटो जैसा क्यों नहीं बन पाया या फिर उसकी ऐतिहासिक विरासत कैसे बिगड़ गई। उन्होंने यह भी कहा कि जापान जैसे देश से विरासतों को बचाने, शहरों को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने और आधुनिक विकास के साथ संस्कृति को सहेजने का सकारात्मक सबक लेकर लौटना चाहिए।

अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री की यात्रा को सिर्फ औपचारिक विदेश दौरा मानने से इनकार करते हुए उस पर राजनीतिक टिप्पणी भी की। उन्होंने लिखा कि 2027 के चुनावी संदर्भ में देखा जाए तो अब “चला-चली की बेला” है और अपने अंतिम वर्ष में कौन सा मुख्यमंत्री विदेश जाकर कोई बड़ा अध्ययन कर पाएगा या कोई दूरगामी योजना बना सकेगा। अखिलेश ने इस यात्रा को मुख्यमंत्री का “मनसुख-पर्यटन” करार देते हुए कहा कि अगर योगी आदित्यनाथ इसे खुले तौर पर स्वीकार कर लें, तो जाते-जाते कम से कम एक सच बोलने के लिए लोग उन्हें याद रखेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह संकेत देने की कोशिश की कि मौजूदा सरकार अब आखिरी दौर में है और ऐसे समय में विदेश दौरों से ज्यादा प्रदेश की जमीनी समस्याओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी लिखा कि मुख्यमंत्री इस यात्रा से “वनस्पति के विशेष अध्ययन” का व्यक्तिगत लाभ ही उठाएंगे या फिर अपने करीबी लोगों के साथ भी इसे साझा करेंगे। यह टिप्पणी सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती नजर आई।

अखिलेश यादव के इस बयान को सियासी हलकों में 2027 के चुनावी माहौल की शुरुआती झलक के तौर पर देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी पहले से ही योगी सरकार के कामकाज, निवेश, विकास और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर हमलावर रही है। जापान दौरे को लेकर किया गया यह तंज उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए अखिलेश सरकार के फैसलों और यात्राओं को जनता के बीच सवालों के घेरे में लाना चाहते हैं।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जापान दौरा सरकार की नजर में निवेश, तकनीक और औद्योगिक सहयोग के लिहाज से अहम माना जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से पहले भी यह कहा जाता रहा है कि विदेश दौरों का मकसद उत्तर प्रदेश में निवेश आकर्षित करना, आधुनिक तकनीक को समझना और विकास मॉडल को मजबूत करना है। हालांकि विपक्ष इसे अलग नजरिए से देख रहा है और इसे चुनावी वर्ष के करीब आते ही राजनीतिक हमलों का जरिया बना रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं है, बल्कि इसके जरिए वह एक बड़ा सियासी संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। काशी और क्योटो की तुलना कर उन्होंने विकास बनाम विरासत का मुद्दा उठाया है, जो आने वाले चुनावों में अहम भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही “मनसुख-पर्यटन” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर उन्होंने सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं पर भी सीधा सवाल दागा है।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे ने जहां सरकार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्तर प्रदेश की संभावनाएं दिखाने का मौका दिया है, वहीं विपक्ष के लिए यह एक नया सियासी हथियार भी बन गया है। अखिलेश यादव के तंज से साफ है कि जैसे-जैसे 2027 का चुनाव नजदीक आएगा, ऐसे बयान और तीखे होते जाएंगे और प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर और तेज होगा।

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