बाराबंकी की रुलन वर्मा ने जर्मन युवक संग हिंदू रीति-रिवाज से शादी रचाई. दूल्हा 16 परिजनों के साथ जर्मनी से बारात लेकर पहुंचा, विदेशी मेहमानों ने भी देसी रस्मों का आनंद लिया.
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में इन दिनों एक अनोखी और खूबसूरत शादी की खूब चर्चा है। यहां की बेटी रुलन वर्मा ने जर्मनी के युवक के साथ पूरे हिंदू रीति-रिवाज से विवाह रचाया। यह प्रेम कहानी विदेश में शुरू हुई और आखिरकार बाराबंकी आकर अपने मुकाम तक पहुंची। खास बात यह रही कि दूल्हा अपने परिवार के 16 सदस्यों के साथ विशेष तौर पर भारत आया और भारतीय परंपराओं के अनुरूप सात फेरे लिए।

विदेश से बारात, देसी अंदाज़ में स्वागत

जैसे ही जर्मनी से आई बारात शहर के प्रतिष्ठित होटल पहुंची, स्थानीय लोगों की भीड़ इस अनोखी शादी को देखने उमड़ पड़ी। विदेशी मेहमानों के लिए यह अनुभव बिल्कुल नया था, वहीं बाराबंकी के लोगों के लिए यह गर्व और उत्सुकता का विषय। ढोल-नगाड़ों, फूलों और पारंपरिक सजावट के बीच बारात का भव्य स्वागत किया गया।
पढ़ाई के दौरान हुई मुलाकात, प्यार में बदली दोस्ती
रुलन वर्मा रेलवे में असिस्टेंट इंजीनियर राज कुमार वर्मा की बेटी हैं। उन्होंने जर्मनी से पीएचडी की है और वर्तमान में ऑस्ट्रिया के वियाना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर व वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं। पढ़ाई के दौरान ही उनकी मुलाकात जर्मनी के युवक से हुई। पहले दोस्ती और फिर गहरा विश्वास—यही रिश्ता धीरे-धीरे प्यार में बदल गया।
दोनों ने जब शादी का फैसला किया तो परिवारों से खुलकर बात की। सहमति बनने के बाद तय हुआ कि विवाह भारत में, वह भी पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ बाराबंकी में ही होगा। यह फैसला दोनों परिवारों के लिए खास था, क्योंकि इससे परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम संभव हो सका।
हल्दी-मेहंदी से जयमाला तक निभीं सभी रस्में

शादी का आयोजन बाराबंकी के एक नामी होटल में किया गया। हल्दी, मेहंदी, संगीत और जयमाला—हर रस्म पारंपरिक अंदाज में पूरी की गई। जर्मन दूल्हा शेरवानी में बेहद खुश नजर आया और भारतीय गीतों पर झूमता दिखा। वह कार के सनरूफ से बाहर निकलकर बारातियों के साथ नाचता भी नजर आया, जिसे देखकर लोग तालियां बजाने लगे।

विदेशी मेहमानों ने भी भारतीय परिधानों में सजीव रंग भर दिए। किसी ने कुर्ता-पायजामा पहना तो किसी ने साड़ी और दुपट्टे के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। भारतीय खानपान—खासतौर पर पारंपरिक व्यंजन—जर्मनी से आए मेहमानों को खूब भाए।
परिवार का गर्व, शहर की पहचान
दुल्हन के चाचा और कुर्मी नेता आरसी पटेल ने इसे जिले के लिए गर्व की बात बताया। उन्होंने कहा कि बाराबंकी की बेटियां आज विदेशों में नाम रोशन कर रही हैं और अपनी संस्कृति को भी साथ लेकर चल रही हैं। भाषा की थोड़ी दिक्कत जरूर रही, लेकिन मुस्कान और अपनत्व ने हर दूरी को मिटा दिया। मेहमानों ने भारत और भारतीय संस्कृति के प्रति अपना स्नेह खुले दिल से जताया।
दो संस्कृतियों का खूबसूरत संगम
पूरे विधि-विधान से विवाह संपन्न होने के बाद रुलन वर्मा अपने पति के साथ जर्मनी रवाना हो गईं। यह शादी अब सिर्फ दो लोगों के रिश्ते तक सीमित नहीं रही, बल्कि दो देशों और दो संस्कृतियों के मिलन की मिसाल बन गई है।
बाराबंकी में हुई यह अंतरराष्ट्रीय शादी लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी—जहां प्यार ने सरहदें पार कीं और परंपराओं ने रिश्तों को मजबूती दी।