यूपी चुनाव से पहले भगवा गढ़ में सपा की एंट्री, बीजेपी की बढ़ी टेंशन !

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने अखिलेश यादव से मुलाकात की, जिससे उनके बीजेपी से मोहभंग और सपा में वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज होनी शुरू हो गई हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दल अपनी-अपनी बिसात बिछाने में जुट गए हैं। इसी बीच सियासत के गलियारों में हलचल मचाने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। बीते निकाय चुनाव में समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की है। इस मुलाकात को 2027 की सियासी दिशा तय करने वाला अहम संकेत माना जा रहा है।

यूपी चुनाव से पहले भगवा गढ़ में सपा की एंट्री, बीजेपी की बढ़ी टेंशन !
यूपी चुनाव से पहले भगवा गढ़ में सपा की एंट्री, बीजेपी की बढ़ी टेंशन !

हेमराज वर्मा और अखिलेश यादव की इस मुलाकात के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पूर्व मंत्री का अब बीजेपी से मोहभंग हो चुका है और वह एक बार फिर समाजवादी पार्टी में ‘घर वापसी’ के मूड में हैं। सूत्रों की मानें तो हेमराज वर्मा आने वाले समय में खुलकर सपा में वापसी का ऐलान कर सकते हैं। इतना ही नहीं, यह भी चर्चा है कि वह पीलीभीत की सदर विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर अपनी दावेदारी भी ठोक सकते हैं।

ढाई साल पहले छोड़ा था सपा का साथ

ढाई साल पहले छोड़ा था सपा का साथ
ढाई साल पहले छोड़ा था सपा का साथ

हेमराज वर्मा ने साल 2023 के निकाय चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी से नाता तोड़ लिया था और बीजेपी का दामन थाम लिया था। उस वक्त इसे सपा के लिए बड़ा झटका माना गया था, क्योंकि हेमराज वर्मा को पार्टी का जमीनी और मजबूत नेता माना जाता रहा है। बीजेपी में शामिल होने के बाद हालांकि वह ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आए। लंबे समय तक शांत रहने के बाद अब अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात ने एक बार फिर पीलीभीत की राजनीति में पारा चढ़ा दिया है। इस घटनाक्रम से बीजेपी के अंदरूनी सियासी समीकरणों में भी हलचल मानी जा रही है।

कौन हैं हेमराज वर्मा?

हेमराज वर्मा को एक जमीनी नेता के तौर पर जाना जाता है। उनका सियासी सफर गांव की राजनीति से शुरू हुआ था। उन्होंने प्रधान पद से राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। विधायक के रूप में उनका राजनीतिक करियर सपा के दौर में ही शुरू हुआ, जिसे खुद अखिलेश यादव का संरक्षण मिला।

साल 2012 के विधानसभा चुनाव में हेमराज वर्मा ने बरखेड़ा विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें करीब 69 हजार वोट मिले और वह पहली बार विधायक बने। यह जीत उनके राजनीतिक जीवन का अहम मोड़ साबित हुई और सपा में उनकी मजबूत पकड़ बन गई।

मॉर्निंग वॉक से मंत्री पद तक

हेमराज वर्मा के राजनीतिक करियर से जुड़ा एक किस्सा काफी चर्चित रहा है। कहा जाता है कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार के गठन के दौरान अचानक ही हेमराज वर्मा को मंत्री बना दिया गया था। बताया जाता है कि वह उस समय मॉर्निंग वॉक कर रहे थे, तभी अखिलेश यादव का फोन आया और उन्हें दोपहर में लखनऊ बुलाया गया। उसी दिन उन्हें खाद्य एवं रसद विभाग का राज्यमंत्री पद संभालने की शपथ दिला दी गई। यह घटना सपा के भीतर उनके कद को दर्शाती है।

चुनावी उतार-चढ़ाव

हालांकि इसके बाद हेमराज वर्मा का सियासी सफर आसान नहीं रहा। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में वह जीत दर्ज नहीं कर सके और उन्हें करीब 47 हजार वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। इसके बाद अगले विधानसभा चुनाव में उनके वोटों की संख्या बढ़कर 71 हजार से अधिक हो गई, लेकिन इसके बावजूद जीत उनसे दूर रही। लगातार हार के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे।

2027 से पहले बदले सियासी समीकरण

अब अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद हेमराज वर्मा की संभावित सपा वापसी को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। अगर वह दोबारा समाजवादी पार्टी में शामिल होते हैं, तो इससे पीलीभीत और आसपास की सीटों पर सपा को मजबूती मिल सकती है। वहीं, बीजेपी के लिए यह एक संभावित झटका भी साबित हो सकता है।

फिलहाल, हेमराज वर्मा की अगली सियासी चाल पर सभी की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में अगर उनकी ‘घर वापसी’ होती है, तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बनते नजर आ सकते हैं।

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