समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बिहार की हालिया सियासी स्थिति पर तीखी टिप्पणी की है.
बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और Samajwadi Party के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को अपहरण और फिरौती जैसे शब्दों से जोड़ते हुए Bharatiya Janata Party पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि यह बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा अपहरण है। उन्होंने कहा कि यह दिखने में राजनीतिक अपहरण लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह बिहार का आर्थिक अपहरण है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि भाजपा ने तो फिरौती में पूरा बिहार मांग लिया है। अपने पोस्ट के अंत में उन्होंने संकेत देते हुए लिखा कि “अगला नंबर… समझदार को इशारा काफी।”
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान न केवल बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी है, बल्कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए विपक्षी दलों की रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है।
तेजस्वी यादव का भी बीजेपी पर हमला

इससे पहले बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और Rashtriya Janata Dal के नेता Tejashwi Yadav ने भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा था।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी Janata Dal (United) को कमजोर करने और खत्म करने की साजिश रच रही है। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने ‘2025 से 30 फिर से नीतीश’ का नारा दिया था, लेकिन अब वही गठबंधन अलग दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है।
तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान पूरे सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि उस समय भी उन्होंने कहा था कि भाजपा के लोगों ने नीतीश कुमार को “हाईजैक” कर लिया है और उन्हें दोबारा पूरी तरह से सत्ता में रहने नहीं दिया जाएगा।
‘छह महीने से ज्यादा नहीं रहेंगे’
तेजस्वी यादव ने कहा कि उन्होंने पहले ही यह दावा किया था कि नीतीश कुमार छह महीने से ज्यादा मुख्यमंत्री पद पर नहीं रह पाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जिस भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन करती है, अंततः उसे कमजोर करने का काम करती है।
उन्होंने भाजपा को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), दलित और आदिवासी विरोधी पार्टी बताते हुए कहा कि पार्टी नहीं चाहती कि बिहार में ऐसा कोई मजबूत नेता रहे जो इन वर्गों की आवाज उठाए।
‘रबर स्टांप मुख्यमंत्री’ की राजनीति
तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि भाजपा बिहार में ऐसा मुख्यमंत्री चाहती है जो केवल नाम का हो और वास्तविक निर्णय पार्टी नेतृत्व के हाथ में रहें। उन्होंने इसे “रबर स्टांप मुख्यमंत्री” की राजनीति बताया।
उन्होंने यह टिप्पणी उस समय की जब वह राजद के राज्यसभा उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के नामांकन के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि बिहार की जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी।
बिहार की राजनीति में बढ़ा सियासी तापमान
नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव में नामांकन के बाद बिहार की राजनीति में नया मोड़ आता दिखाई दे रहा है। एक तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन इस कदम को राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे सत्ता के समीकरण बदलने की कोशिश के रूप में देख रहा है।
अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव जैसे विपक्षी नेताओं के बयानों से साफ है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। खासकर तब, जब बिहार की राजनीति लंबे समय से गठबंधन और नेतृत्व के सवालों के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार की सत्ता का संतुलन किस तरह बदलता है और राज्य की राजनीति किस नई दिशा में आगे बढ़ती है।
Also Read :
कांशीराम जयंती पर BSP की बड़ी रैली, सियासी संदेश देने की तैयारी !