“अखिलेश के पाले में सियासी उलटफेर, कई दलों के नेता सपा में शामिल”

“राज्यसभा के पूर्व सांसद बदरूद्दीन खान समेत कई दिग्गज सपा में शामिल”…..

उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब भाजपा, बसपा और कांग्रेस समेत कई दलों के नेताओं ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने स्वयं सभी नेताओं को सपा की सदस्यता दिलाई और उनका स्वागत किया।

इस मौके पर अखिलेश यादव ने कहा, “यह बदलाव इस बात का संकेत है कि जनता अब सपा की नीतियों और विज़न में भरोसा जता रही है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि 2027 के चुनावों में जनता सपा के साथ खड़ी दिखेगी।

समाजवादी पार्टी कार्यालय, 19 विक्रमादित्य मार्ग, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए सभी नेताओं ने अखिलेश यादव को देश का भविष्य बताते हुए 2027 में उत्तर प्रदेश में सपा सरकार बनाने का संकल्प लिया. अखिलेश यादव ने सभी नए साथियों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा कि ये लोग पार्टी को और ताकत देंगे. उन्होंने कहा, “अब परिवर्तन तय है. आने वाले समय में और भी साथी हमारे साथ जुड़ेंगे और समाजवादी आंदोलन को मजबूत करेंगे.”

इन दिग्गजों ने ली सदस्यता

"अखिलेश के पाले में सियासी उलटफेर, कई दलों के नेता सपा में शामिल"
“अखिलेश के पाले में सियासी उलटफेर, कई दलों के नेता सपा में शामिल”

सपा में शामिल होने वालों में सबसे प्रमुख नाम हैं, बदरूद्दीन खान, जो राज्यसभा में सेवाएं दे चुके हैं और कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मामलों के साक्षी रहे हैं. उनके साथ युवा लोकदल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष वसीम राजा और उनके समर्थक भी सपा में शामिल हुए.
 
बसपा छोड़कर बांदा जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र सिंह वर्मा, कमलेश श्रीवास, राजा राम वर्मा, संतोष तिवारी और कृष्णानंद पांडेय ने भी पार्टी की सदस्यता ली. इनके अलावा रोहित अवस्थी, हर्ष सोनकर, आर्यन सोनकर, आज़ाद अली, रीना गुप्ता, सुमित्रा विश्वकर्मा, शिवानी अवस्थी, ननकई अवस्थी, राज सोनकर और विपिन कांत जैसे कई युवा और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सपा में आस्था जताई.
 

सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव

इस मौके पर अखिलेश यादव को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया. मशहूर शायर स्व. बेकल उत्साही के पुत्र कुंवर अज़ीज़ उत्साही ने ‘वतन के तराने’ नामक पुस्तक भेंट की. समाजवादी लोहिया वाहिनी के नेता लालचंद गौतम ने उन्हें बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा भेंट की.

कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं और समर्थकों से भावनात्मक अपील करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि “हम अपने नेताओं की तुलना किसी दिव्य महापुरुष से न करें. ये सम्माननीय लोग किसी तुलना से बहुत ऊपर होते हैं.”
 

पुरानी यादें और संगठनात्मक मजबूती पर बात

अखिलेश ने पुरानी यादों को साझा करते हुए कहा, “सबसे पहले आंदोलन और प्रदर्शन के लिए नेताजी ने मुझे बिजनौर भेजा था।” उन्होंने कहा कि संतोष तिवारी के सपा में आने से कुशीनगर में पार्टी और मजबूत होगी।

जातीय जनगणना पर बीजेपी को घेरा

जातीय जनगणना पर बीजेपी को घेरा
जातीय जनगणना पर बीजेपी को घेरा

अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना को लेकर बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी अब पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के दबाव में आकर जातीय जनगणना के लिए तैयार हुई है, जबकि समाजवादी पार्टी लंबे समय से इसकी मांग कर रही थी।

उन्होंने कहा, “पहले भी जातीय जनगणना की बात हुई थी, लेकिन कभी आंकड़े सामने नहीं आए।” अंत में अखिलेश ने जातीय जनगणना के समर्थन में खड़े सभी नेताओं को धन्यवाद भी दिया।

पीडीए हेल्पलाइन की सराहना

पीडीए हेल्पलाइन की सराहना
पीडीए हेल्पलाइन की सराहना

इस मौके पर सपा प्रमुख ने मनोज कुमार (पूर्व न्यायाधीश व लोकसभा प्रत्याशी) द्वारा शुरू की गई पीडीए हेल्पलाइन की भी सराहना की, जो आमजन की समस्याओं के समाधान में जुटी है.
 
इस आयोजन में पूर्व सांसद उदय प्रताप सिंह, सांसद राजीव राय, पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी, राजेंद्र चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल, पूर्व सांसद अरविंद कुमार सिंह, विधायक आशु मलिक, पूर्व एमएलसी संजय लाठर, सलामुतउल्ला और अवलेश सिंह समेत सैकड़ों कार्यकर्ता और नेता मौजूद रहे.
 
गौरतलब है कि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद यूपी की राजनीति में नया माहौल बना है. समाजवादी पार्टी के जनाधार और लोकप्रियता में तेजी से इजाफा हुआ है. ऐसे में दूसरे दलों के नेताओं का सपा की ओर झुकाव बताता है कि राज्य में राजनीतिक हवा तेजी से करवट ले रही है. 2027 के चुनाव को लेकर सपा पूरी तरह से एक्टिव हो चुकी है. पार्टी की रणनीति पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग को जोड़कर व्यापक समर्थन हासिल करने की है.

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