संसद में पीएम मोदी का संबोधन: “मानसून सत्र लोकतंत्र की विजय का उत्सव” !

मानसून सत्र की शुरुआत में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में देश को संबोधित किया है। उन्होंने इस मानसून सत्र को एक विजय उत्सव की तरह बताया है।

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया को संबोधित किया और सत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे लोकतंत्र की “विजय का उत्सव” बताया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने सभी सांसदों से अनुरोध किया कि वे सकारात्मक चर्चा और रचनात्मक सुझावों के साथ सदन की कार्यवाही में भाग लें, जिससे देश को नई दिशा और ऊर्जा मिल सके।

संसद में पीएम मोदी का संबोधन: "मानसून सत्र लोकतंत्र की विजय का उत्सव" !
संसद में पीएम मोदी का संबोधन: “मानसून सत्र लोकतंत्र की विजय का उत्सव” !

प्रधानमंत्री ने कहा, “संसद का मानसून सत्र लोकतंत्र की विजय का उत्सव है। यह वह समय होता है जब देश की जनता ने जिन जनप्रतिनिधियों को चुनकर भेजा है, वे उनकी आशाओं और आकांक्षाओं को व्यक्त करते हैं। संसद देश के भविष्य को दिशा देने वाली सबसे बड़ी संस्था है, और इसमें जनहित में निर्णय लेने की क्षमता है।” पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि यह सत्र देश के लिए महत्वपूर्ण फैसलों और सार्थक चर्चाओं से भरा रहेगा। उन्होंने कहा कि देश आज वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है और ऐसे समय में संसद की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा, “हम सबका यह दायित्व है कि हम संसद में बहस करें, आलोचना करें, लेकिन लोकतांत्रिक मर्यादा और गरिमा को बनाए रखें। संसद चर्चा का मंच है, अवरोध का नहीं।” उन्होंने विपक्ष से भी आग्रह किया कि वह जनहित के मुद्दों को उठाए, लेकिन सकारात्मक सोच के साथ।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने बीते वर्षों में संसद द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल क्रांति, महिलाओं के अधिकारों और किसानों की भलाई की दिशा में कई कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आगामी सत्रों में भी इसी प्रकार देशहित के निर्णय होंगे।

प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों को यह भी याद दिलाया कि उनकी भूमिका केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि वे देश की जनता की आवाज हैं। उन्होंने कहा, “आपका एक-एक शब्द देश की जनता सुनती है, इसलिए हमारी भाषा, आचरण और व्यवहार में परिपक्वता होनी चाहिए।”

पीएम मोदी ने इस अवसर पर ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर भी संकेत किया और कहा कि लोकतंत्र को और अधिक प्रभावशाली और व्यावहारिक बनाने के लिए चर्चा और सुझावों का स्वागत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को मिलकर इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में भारत विश्व में एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, और दुनिया की नजरें भारत पर टिकी हैं। ऐसे में संसद में लिए गए निर्णय वैश्विक प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे इस जिम्मेदारी को समझें और पूरी निष्ठा से संसद कार्यवाही में हिस्सा लें।

पीएम मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह सत्र युवाओं, महिलाओं, किसानों और समाज के हर वर्ग के लिए नई उम्मीदें लेकर आए। उन्होंने कहा, “हम सभी को यह सुनिश्चित करना है कि संसद का यह सत्र ऐतिहासिक बने – ऐसा सत्र जो विकास, समावेश और संवाद का प्रतीक हो।”

प्रधानमंत्री के इस प्रेरणादायक और सकारात्मक संदेश के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की निगाहें अब इस बात पर हैं कि संसद में किस प्रकार की चर्चाएं और निर्णय देखने को मिलते हैं। जहां सरकार इसे विकास का सत्र मान रही है, वहीं विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। अब देखना होगा कि मानसून सत्र वास्तव में लोकतंत्र की विजय का उत्सव बनता है या फिर राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ता है।

पीएम मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें

पीएम मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें
पीएम मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें
  • “संसद का यह मानसून सत्र एक विजय उत्सव की तरह है। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भारत का झंडा फहराया जाना प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का क्षण है। सभी सांसद और देशवासी एक स्वर में इस उपलब्धि का गुणगान करेंगे। यह हमारे भावी अभियानों के लिए प्रेरणादायी होगा।”
  • “यह मानसून सत्र जीत का जश्न है। पूरी दुनिया ने भारत की सैन्य शक्ति का लोहा माना है। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना द्वारा निर्धारित लक्ष्य को 100% हासिल किया गया। ऑपरेशन सिंदूर के तहत, आतंकवादियों के आकाओं के घरों को 22 मिनट के भीतर जमींदोज कर दिया गया।”
  • “ऑपरेशन सिंदूर के तहत, आतंकवादियों के आकाओं के घरों को 22 मिनट के भीतर ही जमींदोज कर दिया गया। मेड इन इंडिया सैन्य शक्ति के इस नए स्वरूप की ओर दुनिया बहुत आकर्षित हुई है। इन दिनों, जब भी मैं दुनिया के लोगों से मिलता हूँ, तो भारत द्वारा बनाए जा रहे मेड इन इंडिया हथियारों के प्रति दुनिया का आकर्षण बढ़ता ही जा रहा है।”
  • “आर्थिक क्षेत्र में, जब 2014 में आप सभी ने हमें ज़िम्मेदारी दी थी, तब देश Fragile Five के चरण से गुज़र रहा था। 2014 से पहले, हम वैश्विक अर्थव्यवस्था में दसवें नंबर पर थे। आज भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है।”
  • “आज हमारे सुरक्षा बल एक नए आत्मविश्वास और नक्सलवाद को समाप्त करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आज कई जिले नक्सलवाद से मुक्त हैं। हमें गर्व है कि भारतीय संविधान नक्सलवाद के विरुद्ध विजयी हो रहा है। ‘लाल गलियारे’ ‘हरित विकास क्षेत्रों’ में बदल रहे हैं।”
  • “2014 से पहले देश में एक समय ऐसा था जब मुद्रास्फीति की दर दोहरे अंकों में थी। आज, यह दर घटकर लगभग दो प्रतिशत रह जाने से, देश के आम लोगों के जीवन में राहत और सुविधा आई है। 25 करोड़ गरीब लोग गरीबी से बाहर आ गए हैं, जिसकी सराहना दुनिया की कई संस्थाएं कर रही हैं।”
  • “पहलगाम में हुए क्रूर अत्याचार और नरसंहार ने पूरे विश्व को हिलाकर रख दिया है। दलगत स्वार्थ को परे रखकर, देशहित में, हमारे अधिकांश दलों के प्रतिनिधियों ने, दुनिया के अनेक देशों में जाकर, एक स्वर में, पाकिस्तान को दुनिया के सामने बेनकाब करने का एक बहुत ही सफल अभियान चलाया। मैं उन सभी सांसदों की, सभी दलों की, राष्ट्रहित में किए गए इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए सराहना करना चाहता हूं और इससे देश में एक सकारात्मक माहौल बना है।”

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