तीन आईपीएस समेत कुल पांच अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। जिन दो पीपीएस अधिकारियों को तबादला हुआ है उनमें अनिल कुमार और निहारिका शर्मा शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। शासन ने सोमवार देर रात तीन आईपीएस अधिकारियों समेत कुल पांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस नई सूची में कई जिलों के एसपी और डीआईजी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। राज्य सरकार ने इसे “प्रशासनिक आवश्यकता और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से नियमित प्रक्रिया” बताया है, लेकिन इसके पीछे राजनीतिक और चुनावी समीकरणों की चर्चा भी ज़ोरों पर है।

तबादलों की सूची: कौन कहां गया?
राज्य गृह विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार निम्नलिखित तबादले किए गए हैं:
- आईपीएस मनोज कुमार झा – अभी तक वह मुरादाबाद रेंज के डीआईजी पद पर तैनात थे। उन्हें अब डीआईजी, अयोध्या रेंज के पद पर भेजा गया है। अयोध्या में आगामी धार्मिक आयोजनों को देखते हुए यह एक अहम नियुक्ति मानी जा रही है।
- आईपीएस सुशांत वर्मा – जिन्हें बरेली के एसएसपी पद से हटाकर प्रशिक्षण निदेशालय, लखनऊ में नियुक्त किया गया है। सूत्रों के मुताबिक यह बदलाव हाल ही में हुई एक कानून-व्यवस्था की स्थिति से जुड़ा है।
- आईपीएस निधि निगम – अब तक वह पुलिस अधीक्षक (एसपी), फतेहपुर के रूप में कार्यरत थीं। उन्हें एसपी, मैनपुरी के रूप में स्थानांतरित किया गया है, जहां कुछ संवेदनशील मामलों को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क है।
- एसपी स्तर के अधिकारी मनोज कुमार सिंह – अब तक वह पीएसी बल में कमांडेंट के रूप में तैनात थे। उन्हें एसपी, अमेठी बनाया गया है।
- एसपी राजेश पांडेय – वर्तमान में अमेठी में तैनात थे, उन्हें हटाकर अब मुख्यालय, डीजीपी ऑफिस भेजा गया है।
तबादलों की पृष्ठभूमि और कारण
सरकार ने इस फेरबदल को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया करार दिया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह कदम आगामी निकाय चुनावों, कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और राजनीतिक दबाव के मद्देनजर उठाया गया है। हाल के दिनों में कई जिलों में आपराधिक घटनाओं, सांप्रदायिक तनाव और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।
वहीं अयोध्या, मैनपुरी और अमेठी जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिलों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती को रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस तबादले पर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा गर्म है। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह प्रशासनिक तंत्र को “चुनावी लाभ” के लिए इस्तेमाल कर रही है।
सपा प्रवक्ता ने कहा, “हर चुनाव या बड़े कार्यक्रम से पहले सरकार अधिकारियों को बदलकर अपने मुताबिक तैनाती करती है। यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।”
हालांकि भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि तबादले पूरी तरह कानून-व्यवस्था को बेहतर करने के उद्देश्य से किए गए हैं।
भाजपा प्रवक्ता का कहना था, “राज्य सरकार कानून-व्यवस्था के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह तबादले उसी दिशा में उठाया गया कदम हैं।”
पुलिस महकमे में हलचल
तबादलों की इस लिस्ट ने पुलिस महकमे में भी नई हलचल पैदा कर दी है। अधिकारियों के बीच चर्चा है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े स्तर पर फेरबदल हो सकते हैं, विशेष रूप से उन जिलों में जहां आगामी त्योहारी सीजन और राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने वाली हैं।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में पुलिस अधिकारियों के तबादले कोई नई बात नहीं, लेकिन चुनावी साल और संवेदनशील जिलों में की गई ये तैनातियां विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। इससे यह साफ है कि योगी सरकार राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए गंभीर कदम उठा रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव कानून-व्यवस्था और जनता के भरोसे को कितना मजबूत कर पाता है।
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