मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहने वाले पहले नेता बन गए हैं। सीएम योगी ने 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। उन्होंने राज्य के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का रिकॉर्ड बना लिया है। यह उपलब्धि न केवल उनकी प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण है, बल्कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर का भी परिचायक है।

7 साल से अधिक का कार्यकाल
योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 2022 में भारी बहुमत के साथ वह दोबारा मुख्यमंत्री बने। अब तक वह सात साल से अधिक समय तक इस पद पर बने रहकर गोविंद बल्लभ पंत, वीर बहादुर सिंह और मायावती जैसी पूर्व मुख्यमंत्रियों को पीछे छोड़ चुके हैं।
गोविंद बल्लभ पंत, जो उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे, ने करीब 6 साल 2 महीने तक मुख्यमंत्री पद संभाला था। वहीं मायावती और मुलायम सिंह यादव का कार्यकाल भी टुकड़ों में बंटा हुआ था, लेकिन योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व निरंतर और स्थिर रहा है।
कैसा रहा योगी का कार्यकाल?
योगी आदित्यनाथ का कार्यकाल कई मायनों में खास रहा है। शुरुआत में उन्हें एक कठोर प्रशासक के रूप में देखा गया, जिसने ‘कानून-व्यवस्था’ को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। माफिया पर नकेल कसना, एनकाउंटर पॉलिसी, राम मंदिर निर्माण की प्रगति, गोरखपुर AIIMS और एक्सप्रेसवे जैसे बुनियादी ढांचे के बड़े प्रोजेक्ट्स उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियाँ रहीं।
उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने Ease of Doing Business रैंकिंग में भी बड़ी छलांग लगाई। निवेश सम्मेलन के जरिए उन्होंने राज्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित किया। साथ ही महिला सुरक्षा, किसानों की योजनाएं, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कई सुधार लागू किए।
प्रदेश के 22वें मुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश के 22वें मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता हैं। राजनीति में आने से पहले, वे गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मठ के महंत यानी मुख्य पुजारी रहे हैं। उन्होंने 1998 में मात्र 26 वर्ष की आयु में गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सियासत में कदम रखा था, जिससे वे देश के सबसे युवा सांसदों में से एक बन गए थे।
अखिलेश, मुलायम सिंह और मायावती हुए पीछे
- मायावती- 7 वर्ष 16 दिन का कार्यकाल
- मुलायम सिंह यादव- 6 वर्ष 274 दिन का कार्यकाल
- डॉ.सम्पूर्णानंद- 5 वर्ष 345 दिन का कार्यकाल
- अखिलेश यादव- 5 वर्ष 4 दिन का कार्यकाल
- नारायण दत्त तिवारी- 3 वर्ष 314 दिन का कार्यकाल
- चंद्रभानु गुप्ता- 3 वर्ष 311 दिन का कार्यकाल
- कल्याण सिंह- 3 वर्ष 217 दिन का कार्यकाल
गोरखपुर से 5 बार के सांसद
योगी आदित्यनाथ लगातार पांच बार गोरखपुर से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान, वे बीजेपी के सबसे प्रमुख और प्रभावशाली चेहरों में शामिल थे। उनके कुशल प्रचार और नेतृत्व का पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने में महत्वपूर्ण योगदान रहा, और इसी के परिणामस्वरूप 19 मार्च 2017 को उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होगा। पिछला विधानसभा चुनाव मार्च 2022 में हुआ था और विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा।
आलोचनाएं और चुनौतियाँ
हालाँकि, उनके कार्यकाल में कुछ विवाद भी रहे। CAA-NRC विरोध प्रदर्शन, हाथरस कांड, COVID-19 की दूसरी लहर में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवालों और कुछ मामलों में प्रशासनिक सख्ती को लेकर विपक्ष ने तीखी आलोचना की। बावजूद इसके, योगी आदित्यनाथ ने लगातार चुनावों में जीत हासिल कर अपनी लोकप्रियता साबित की।
पार्टी का विश्वास और संगठनात्मक मजबूती
योगी आदित्यनाथ न केवल सरकार चला रहे हैं, बल्कि भाजपा के अंदर भी एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरे हैं। पार्टी नेतृत्व, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने हमेशा उनके काम की सराहना की है। यूपी जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में स्थिर और प्रभावशाली नेतृत्व देने के लिए उन्हें बार-बार पार्टी की रणनीतिक बैठकों में प्रमुख भूमिका दी जाती रही है।
जनता का समर्थन
योगी आदित्यनाथ की साफ छवि और निर्णय लेने की तेज़ शैली ने उन्हें जनप्रिय नेता बना दिया है। उनके समर्थकों का मानना है कि वह यूपी को ‘गुंडाराज’ से निकालकर विकास के रास्ते पर ले गए। वहीं कुछ आलोचक उनकी नीतियों को कठोर और केंद्रित बताते हैं, लेकिन यह अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति को एक नई दिशा दी है।
निष्कर्ष
योगी आदित्यनाथ का यह रिकॉर्ड न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक स्थिरता और निरंतर नेतृत्व की क्या अहमियत है। उनके नेतृत्व ने प्रदेश में एक नए युग की शुरुआत की है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वह आने वाले वर्षों में इस विरासत को कैसे और मजबूत बनाते हैं, और क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में तीसरी बार भी इतिहास रचते हैं।
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