“रातों-रात मुख्तार का बेटा उमर अंसारी गाजीपुर से कासगंज जेल शिफ्ट, क्या है वजह?”

बाहुबली नेता रहे मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी को शुक्रवार रात ही कासगंज जेल में शिफ्ट किया गया है। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स की तैनाती रही।

उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध जगत से जुड़े चर्चित नाम मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी को अचानक गाजीपुर जेल से कासगंज जेल शिफ्ट कर दिया गया। यह कदम देर रात सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच उठाया गया। प्रशासन ने इस फैसले को “सुरक्षा कारणों” और “कानून-व्यवस्था बनाए रखने” की दृष्टि से जरूरी बताया है। उमर अंसारी के जेल ट्रांसफर ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि जनता के बीच भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार सरकार को इतना बड़ा फैसला लेने की जरूरत क्यों पड़ी।

"रातों-रात मुख्तार का बेटा उमर अंसारी गाजीपुर से कासगंज जेल शिफ्ट, क्या है वजह?"
“रातों-रात मुख्तार का बेटा उमर अंसारी गाजीपुर से कासगंज जेल शिफ्ट, क्या है वजह?”

कौन हैं उमर अंसारी?

उमर अंसारी, दिवंगत बाहुबली और पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के बेटे हैं। मुख्तार अंसारी का नाम दशकों तक पूर्वांचल की राजनीति और अपराध की दुनिया में गूंजता रहा। जेल में रहते हुए भी मुख्तार पर अपराध जगत से संपर्क बनाए रखने के आरोप लगते रहे। मुख्तार की मौत के बाद परिवार पर राजनीतिक और कानूनी दबाव और बढ़ गया। उमर अंसारी पर भी कई गंभीर मामले दर्ज हैं और वे इन दिनों जेल में बंद हैं।

क्यों लिया गया ट्रांसफर का फैसला?

क्यों लिया गया ट्रांसफर का फैसला?
क्यों लिया गया ट्रांसफर का फैसला?

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, गाजीपुर जेल में उमर अंसारी को रखने को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने चिंता जताई थी। खुफिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई गई कि उमर जेल के अंदर से अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सकते हैं और गाजीपुर में उनके समर्थक या गिरोह सक्रिय हो सकते हैं। इस कारण जेल और शहर की कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना बनी हुई थी।
इसके अलावा, हाल ही में कुछ संवेदनशील इनपुट मिले थे कि उमर अंसारी की सुरक्षा को भी खतरा है। गाजीपुर जेल में मौजूद अन्य आपराधिक गिरोहों से उनके टकराव की संभावना बताई गई थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने देर रात ही उनका तबादला कर दिया।

कैसे हुई शिफ्टिंग?

शनिवार देर रात भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में उमर अंसारी को गाजीपुर जेल से बाहर निकाला गया। गुप्त रूप से बनाए गए सुरक्षा रूट से उन्हें सड़क मार्ग के जरिए कासगंज जेल पहुंचाया गया। इस दौरान सुरक्षा इतनी कड़ी थी कि रास्ते में कई जगह बैरिकेडिंग की गई और किसी को भी करीब नहीं आने दिया गया। प्रशासन का कहना है कि अचानक और गुप्त तरीके से शिफ्टिंग का मकसद सुरक्षा चूक से बचना था।

सरकार का रुख

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पहले ही यह साफ कर चुकी है कि अपराधियों और माफिया परिवारों पर लगातार शिकंजा कसना उसकी प्राथमिकता है। मुख्तार अंसारी के परिवार और उससे जुड़े नेटवर्क पर बीते कुछ वर्षों में बड़ी कार्रवाई हुई है। संपत्तियों की जब्ती, अवैध कब्जों पर बुलडोजर और अब जेल में सुरक्षा सख्ती इसी नीति का हिस्सा बताया जा रहा है। उमर अंसारी का अचानक ट्रांसफर भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक हलचल

उमर अंसारी के जेल ट्रांसफर पर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि योगी सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है और अंसारी परिवार को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं बीजेपी का कहना है कि सरकार का मकसद सिर्फ और सिर्फ कानून-व्यवस्था को मजबूत करना है। पार्टी नेताओं ने कहा कि जो भी अपराध से जुड़ा है, चाहे उसका परिवार कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे कानून का सामना करना पड़ेगा।

जनता और स्थानीय प्रतिक्रिया

गाजीपुर और आसपास के इलाकों में उमर अंसारी के शिफ्ट होने की चर्चा जोर पकड़ रही है। समर्थक गुट इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि आम लोग मानते हैं कि इससे जिले में शांति बनी रहेगी। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक अंसारी परिवार के सदस्य गाजीपुर में रहते हैं, तब तक अपराध और डर का माहौल बना रहता है।

निष्कर्ष

उमर अंसारी का रातों-रात गाजीपुर से कासगंज जेल ट्रांसफर योगी सरकार की अपराध और माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है। यह फैसला प्रशासनिक दृष्टि से भले ही सुरक्षा कारणों से लिया गया हो, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ भी गहरे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अंसारी परिवार और उससे जुड़े मामलों पर और कौन-से कदम उठाती है।

Also Read :

यूपी में बड़ा फैसला: मंत्री के बेटे को प्रोटोकॉल देने पर निजी सचिव पर एक्शन !