बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक के बाद एक बड़े ऐलान कर रहे हैं। अब नीतीश कैबिनेट ने एक और बड़ा फैसला लिया है और आंगनबाड़ी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाई गई है।
बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग अक्टूबर के आखिर या नवंबर की शुरुआत में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार लगातार बड़े फैसले लेकर सुर्खियों में है। आरक्षण, युवा आयोग और कई कल्याणकारी योजनाओं के बाद मंगलवार को एक बार फिर से नीतीश कैबिनेट ने 26 अहम एजेंडों पर मुहर लगा दी। इनमें सबसे बड़ा फैसला कुछ वर्गों के कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का है, जिसे सरकार ने चुनाव से ठीक पहले जनता को साधने का प्रयास माना जा रहा है।

कैबिनेट की अहम बैठक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 26 प्रस्तावों पर सहमति बनी। बैठक के बाद जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि इनमें प्रशासनिक सुधार, वित्तीय प्रावधान, सामाजिक योजनाएं और कर्मचारियों से जुड़ी घोषणाएं शामिल हैं। सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करने वाला फैसला था—राज्य के कुछ विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की वेतन वृद्धि।
कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत
कैबिनेट ने तय किया कि स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक विभागों में अनुबंध पर कार्यरत और नियमित कर्मचारियों की वेतन संरचना में संशोधन किया जाएगा। नई वेतन वृद्धि से हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। सूत्रों का कहना है कि यह बढ़ोतरी लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने के लिए की गई है। नीतीश सरकार चाहती है कि चुनाव से पहले कर्मचारी वर्ग को अपने पक्ष में किया जाए, क्योंकि यह एक बड़ा वोट बैंक माना जाता है।
26 एजेंडों में और क्या-क्या?
कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने के अलावा कैबिनेट ने जिन प्रस्तावों को मंजूरी दी, उनमें शामिल हैं:
- ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल निर्माण के नए प्रोजेक्ट।
- महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजनाओं का विस्तार।
- युवाओं के लिए नए कौशल विकास केंद्र खोलने का फैसला।
- राज्य में कृषि सिंचाई योजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट आवंटन।
- बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत पैकेज की घोषणा।
इन फैसलों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर “चुनावी स्टंट” का आरोप लगाया है।
विपक्ष का रुख
राजद और कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार अब आखिरी वक्त में घोषणाओं और पैकेजों की राजनीति कर रही है। राजद प्रवक्ता ने कहा, “पिछले पांच साल में सरकार ने कर्मचारियों की मांगों को नज़रअंदाज़ किया, अब चुनाव से पहले उन्हें खुश करने की कोशिश हो रही है। जनता सब जानती है।”
सरकार की दलील
वहीं, जदयू और एनडीए गठबंधन के नेताओं का कहना है कि यह फैसले जनता और कर्मचारियों के हित में हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार लगातार विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में काम कर रही है और यह सिलसिला चुनाव के कारण नहीं रुकेगा। जदयू प्रवक्ता ने कहा, “कर्मचारियों की सैलरी वृद्धि कोई चुनावी फैसला नहीं, बल्कि उनकी जायज़ मांग को पूरा करने का कदम है।”
राजनीतिक महत्व
नीतीश कुमार पिछले कुछ महीनों से लगातार बड़े ऐलान कर रहे हैं—चाहे वह आरक्षण से जुड़ा फैसला हो, युवा आयोग का गठन हो या फिर महिला सशक्तिकरण योजनाएं। अब कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का ऐलान भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार इस बार हर वर्ग को साधकर चुनावी मैदान में उतरना चाहते हैं।
निष्कर्ष
बिहार चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और नीतीश कैबिनेट के ताज़ा फैसलों ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। कर्मचारियों की सैलरी वृद्धि के ऐलान से जहां सरकार ने एक बड़ा संदेश दिया है, वहीं विपक्ष ने इसे चुनावी रणनीति करार दिया है। अब देखना होगा कि ये फैसले जनता के मूड को किस हद तक बदल पाते हैं और चुनावी परिणामों पर कितना असर डालते हैं।
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