पुणे में नकली कफ सिरप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। यहां रेडिनेक्स pharmaceutical कंपनी का स्टॉक जब्त किया गया है। खांसी की दवा बनाने वाली कंपनियों की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
महाराष्ट्र के पुणे शहर में स्वास्थ्य विभाग और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की संयुक्त टीम ने नकली कफ सिरप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में रेडिनेक्स फार्मास्युटिकल कंपनी के गोदाम से भारी मात्रा में नकली दवाइयों का स्टॉक जब्त किया गया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ये सिरप बिना आवश्यक गुणवत्ता मानकों के तैयार किए जा रहे थे और इनमें इस्तेमाल की गई रासायनिक सामग्री मानक के अनुरूप नहीं थी। यह मामला सामने आने के बाद पूरे राज्य में दवा निर्माण कंपनियों की जांच तेज कर दी गई है।

छापेमारी की बड़ी कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, पुणे के बाणेर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित रेडिनेक्स फार्मास्युटिकल के परिसर में मंगलवार देर रात एफडीए की टीम ने छापा मारा। यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें बताया गया था कि कंपनी में खांसी की दवा बनाने के नाम पर नकली और घटिया क्वालिटी का सिरप तैयार किया जा रहा है।
जांच के दौरान अधिकारियों को बड़ी मात्रा में खांसी की नकली बोतलें, सील, लेबल और पैकिंग मटेरियल मिले। साथ ही कई तैयार सिरप की बोतलें बिना लाइसेंस और गुणवत्ता परीक्षण के पाए गए। एफडीए अधिकारियों ने मौके से करीब 50,000 बोतलें जब्त कीं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 35 लाख रुपये बताई जा रही है।
गुणवत्ता मानकों की खुली पोल
एफडीए अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए सिरप का कोई गुणवत्ता प्रमाणपत्र नहीं था और न ही कंपनी के पास वैध निर्माण लाइसेंस था। सिरप में कोडीन फॉस्फेट, डेक्स्ट्रोमेथॉर्फन और क्लोरफेनिरामाइन जैसे तत्वों का उपयोग किया गया था, लेकिन उनकी मात्रा खतरनाक स्तर पर पाई गई।
अधिकारियों ने कहा कि “इन सिरप का सेवन करने से मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य नुकसान हो सकता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता था।”
कंपनी पर मामला दर्ज
पुणे पुलिस ने रेडिनेक्स फार्मास्युटिकल के निदेशकों और संबंधित प्रबंधकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। एफडीए की शिकायत पर दवा और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 274, 275 और 420 के तहत केस दर्ज किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी के कुछ कर्मचारी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। वहीं, मुख्य प्रबंधक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
संपूर्ण नेटवर्क की जांच शुरू
एफडीए ने संकेत दिया है कि यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। जांच में पता चला है कि नकली सिरप का यह नेटवर्क महाराष्ट्र के कई जिलों तक फैला हुआ हो सकता है।
पुणे एफडीए कमिश्नर डॉ. संजय शिंदे ने बताया, “हम इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। जिन मेडिकल स्टोर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इन सिरप की बिक्री की है, उनके लाइसेंस की भी जांच की जा रही है। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता बढ़ी
इस घटना के बाद महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों में दवा निर्माण इकाइयों की अचानक जांच के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से खांसी की दवाओं, एंटीबायोटिक्स और बच्चों के सिरप की गुणवत्ता जांच की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत ने कहा, “राज्य सरकार किसी भी हालत में नकली दवा कारोबार को बर्दाश्त नहीं करेगी। जिन अधिकारियों या कंपनियों की लापरवाही पाई जाएगी, उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
एफडीए ने आम लोगों से अपील की है कि वे दवा खरीदते समय हमेशा लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही दवा लें और उसकी बैच नंबर, निर्माता कंपनी और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें। यदि किसी सिरप या दवा की गुणवत्ता संदिग्ध लगे तो तुरंत स्थानीय एफडीए कार्यालय या पुलिस को सूचित करें।
निष्कर्ष
पुणे में हुई यह कार्रवाई नकली दवा कारोबार के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नकली सिरप और दवाइयां स्वास्थ्य के लिए घातक होती हैं और इन पर सख्त निगरानी जरूरी है।
रेडिनेक्स फार्मास्युटिकल पर हुई कार्रवाई के बाद अब अन्य फार्मा कंपनियों पर भी जांच का शिकंजा कस सकता है। सरकार का दावा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, वहीं जनता से भी सतर्क रहने की अपील की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।