बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर कल अधिसूचना जारी कर दी जाएगी और नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उससे पहले सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों सियासी गठबंधन में अब तक फैसला नहीं हो पाया है। जानें कहां फंसा है पेंच?
बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की औपचारिक शुरुआत कल यानी 10 अक्टूबर से हो जाएगी। चुनाव आयोग पहले चरण की अधिसूचना जारी करेगा, जिसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। इस बार का चुनाव दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है, और पहले चरण में कुल 121 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। आयोग की घोषणा के बाद राजनीतिक दलों में सीट बंटवारे, उम्मीदवार चयन और प्रचार रणनीति को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।

पहले चरण की पूरी समय-सारिणी
चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण की अधिसूचना 10 अक्टूबर को जारी होगी। इसके बाद उम्मीदवारों को 17 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल करने की अनुमति होगी। 18 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 20 अक्टूबर को नाम वापस लेने की अंतिम तिथि तय की गई है।
पहले चरण के तहत 6 नवंबर को मतदान होगा और 14 नवंबर को मतगणना की जाएगी। आयोग के मुताबिक, इस चरण में उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने के बाद अधिकतम 15 दिनों का समय प्रचार के लिए मिलेगा। वहीं, 4 नवंबर शाम 5 बजे चुनाव प्रचार थम जाएगा।
121 सीटों पर होगी वोटिंग
पहले चरण में राज्य के कुल 243 में से 121 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। इनमें से अधिकांश सीटें उत्तर बिहार, मगध और सीमांचल क्षेत्रों में आती हैं। आयोग ने बताया है कि सभी जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।
केंद्रीय बलों की 700 से अधिक कंपनियां पहले चरण में तैनात की जाएंगी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या हिंसा की संभावना को रोका जा सके। संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथों की पहचान कर ली गई है, जहां विशेष निगरानी रखी जाएगी।
पहली बार वोट डालने वालों की संख्या 14 लाख से अधिक
इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में नए मतदाताओं की बड़ी संख्या शामिल हो रही है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 14 लाख से अधिक मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। इनमें 18 से 19 वर्ष आयु वर्ग के युवक-युवतियों की भागीदारी सबसे ज्यादा है।
वहीं, बिहार के लोकतांत्रिक इतिहास में यह भी खास है कि इस बार 14,000 से अधिक मतदाता ऐसे हैं जिनकी उम्र 100 साल से ज्यादा है। आयोग ने कहा है कि इन वरिष्ठ मतदाताओं के लिए विशेष प्रबंध किए जाएंगे, जिनमें घर-घर जाकर मतदान की सुविधा और व्हीलचेयर सहायता शामिल है।
डिजिटल और पेपरलेस चुनाव की दिशा में कदम
चुनाव आयोग इस बार बिहार में कई नई तकनीकी सुविधाओं का उपयोग कर रहा है। मतदाताओं को वोटिंग की जानकारी देने के लिए cVIGIL ऐप, Voter Helpline ऐप और PwD ऐप जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
आयोग ने बताया कि इस बार “पेपरलेस” चुनाव प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाएगा। नामांकन से लेकर शिकायत निवारण तक अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन होंगी, जिससे पारदर्शिता और समय की बचत सुनिश्चित हो सकेगी।
सभी दलों में बढ़ी हलचल
अधिसूचना जारी होने से पहले ही बिहार के प्रमुख राजनीतिक दलों—एनडीए और इंडिया गठबंधन—में हलचल तेज हो गई है। एनडीए में भाजपा और जदयू के बीच सीट बंटवारे पर अंतिम दौर की बातचीत चल रही है, जबकि इंडिया गठबंधन में राजद और कांग्रेस के बीच कुछ सीटों पर सहमति नहीं बन पाई है।
सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में आने वाली सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा 11 से 13 अक्टूबर के बीच की जा सकती है। दोनों गठबंधन अपने-अपने स्टार प्रचारकों की सूची पर भी अंतिम मुहर लगाने में जुटे हैं।
आयोग ने दिए सख्त निर्देश
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि बिहार में इस बार निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना प्राथमिकता है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन कराया जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तरह के कैश, शराब, या उपहार वितरण की कोशिश को तुरंत रोका जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
निष्कर्ष
10 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होते ही बिहार में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच जाएगी। पहले चरण में 121 सीटों पर होने वाले मतदान के लिए अब सभी राजनीतिक दल पूरी तैयारी में जुट गए हैं।
नए मतदाताओं की बड़ी संख्या, वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी और आधुनिक तकनीकी साधनों के उपयोग के चलते यह चुनाव राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। 6 नवंबर को जब मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, तो बिहार की सियासत का नया समीकरण तय होना शुरू हो जाएगा — और 14 नवंबर को यह साफ हो जाएगा कि इस बार जनता ने किसे चुना है अपने राज्य का भविष्य संवारने के लिए।
Also Read :
तेजस्वी का चुनावी दांव: 20 दिन में बनेगा हर घर सरकारी नौकरी कानून !