पहली बार दूरदराज के क्षेत्रों में मतदान केन्द्रों पर सुरक्षाकर्मियों को हेलीकॉप्टर से नहीं उतारा जाएगा, क्योंकि सभी बल सड़क मार्ग से अपने तैनाती स्थलों पर पहुंचेंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर राज्य में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। चुनाव आयोग और राज्य सरकार ने मिलकर व्यापक योजना तैयार की है, जिसके तहत चार लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। इनमें पुलिस, अर्धसैनिक बल और केंद्रीय बल शामिल हैं। यह कदम इस बात को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण और निष्पक्ष रूप से संपन्न हो।

सुरक्षा बल की तैनाती का दायरा
सूत्रों के मुताबिक, कुल चार लाख से अधिक सुरक्षाकर्मियों में राज्य पुलिस बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और अर्धसैनिक बल शामिल होंगे।
चुनाव आयोग ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी रखी जाए। केंद्रीय बलों को विशेष सुरक्षा जिम्मेदारी दी गई है, जैसे कि मतदान केंद्रों पर तैनाती, मतदाता और उम्मीदवारों की सुरक्षा, और संभावित हिंसा या दंगा की स्थिति में त्वरित हस्तक्षेप।
चुनाव में सुरक्षा का महत्व
बिहार की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। राज्य में अतीत में चुनाव के दौरान हिंसा, बूथ पर दबाव और मतदाता आतंक के कई मामले सामने आए हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “हम चाहते हैं कि बिहार का हर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग पूरी स्वतंत्रता और सुरक्षा में कर सके। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर मजबूत किया गया है।”
चुनाव की चरणबद्ध रणनीति
बिहार में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होगा। पहले चरण में 121 सीटों और दूसरे चरण में 122 सीटों पर मतदान होगा। सुरक्षा बलों की तैनाती भी इसी के अनुसार की जा रही है।
प्रत्येक चरण में संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती होगी। इसके अलावा, ड्रोन निगरानी और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सभी मतदान केंद्रों पर नजर रखी जाएगी।
विशेष ट्रेनिंग और तैयारी
सुरक्षाकर्मियों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें मतदाता और उम्मीदवारों की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, संकट प्रबंधन और हिंसा रोकथाम के उपाय शामिल हैं। अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर जवान अपने क्षेत्र में पूरी तरह तैयार हो।
साथ ही, सुरक्षा बलों के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम बनाई गई है, जो किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर सके।
सर्वदलीय बैठकें और समन्वय
राज्य चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ सुरक्षा को लेकर बैठकें की हैं। बैठक में उम्मीदवारों और पार्टी कार्यकर्ताओं को भी सुरक्षा नियमों और आदर्श आचार संहिता के पालन की जानकारी दी गई।
मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने कहा कि “सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी दलों को सहयोग करना होगा ताकि चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।”
मतदाता जागरूकता और सहयोग
सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ चुनाव आयोग मतदाताओं को भी जागरूक कर रहा है। लोगों से अपील की गई है कि वे अपने मतदान केंद्रों पर समय पर पहुंचे, किसी भी तरह के अवैध गतिविधि या दबाव की सूचना तुरंत दें।
इस बार चुनाव में नए मतदाताओं की संख्या भी बड़ी है, जिनमें 14 लाख से अधिक युवा पहली बार वोट डालेंगे। आयोग ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं ताकि सभी मतदाता बिना किसी डर के वोटिंग कर सकें।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
राजनीतिक दलों ने सुरक्षा के इन इंतजामों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह कदम चुनाव को निष्पक्ष और लोकतांत्रिक बनाने के लिए जरूरी है।
हालांकि, कुछ दलों ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा बलों की सही तैनाती और निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि मतदान के दौरान किसी तरह की बाधा न आए।
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में चार लाख से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती राज्य की सुरक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा प्रयास है। यह कदम मतदाता और उम्मीदवार दोनों के लिए भरोसे का संदेश है।
सुरक्षा बलों के व्यापक नेटवर्क, तकनीकी निगरानी और प्रशिक्षण के चलते उम्मीद जताई जा रही है कि मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न होगा। यह व्यवस्था बिहार की राजनीति में एक मजबूत और सुरक्षित चुनावी माहौल तैयार करने का प्रयास है।
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