बिहार चुनाव से पहले JDU को बड़ा झटका, पूर्व सांसद लड़ेंगे RJD टिकट पर !

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व जेडीयू के कद्दावर नेता आज राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को ज्वाइन करने वाले हैं। ऐसे में नीतीश कुमार की पार्टी को चुनाव में बड़ा नुकसान हो सकता है।

बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने अब जोर पकड़ लिया है। सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति तय करने के लिए लगातार बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। इसी बीच, सियासी हलचलें भी तेज हो गई हैं। जेडीयू (JDU) के लिए यह समय मुश्किलों भरा साबित हो रहा है क्योंकि पार्टी से बड़े स्तर पर नेताओं का पलायन जारी है। अब खबर आ रही है कि पूर्णिया के पूर्व जेडीयू सांसद संतोष कुशवाहा जल्द ही राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दामन थाम सकते हैं।

बिहार चुनाव से पहले JDU को बड़ा झटका, पूर्व सांसद लड़ेंगे RJD टिकट पर !
बिहार चुनाव से पहले JDU को बड़ा झटका, पूर्व सांसद लड़ेंगे RJD टिकट पर !

विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, संतोष कुशवाहा आज पटना में आरजेडी प्रमुख तेजस्वी यादव की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में जेडीयू के ही एक वरिष्ठ मंत्री के खिलाफ आरजेडी टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं।

नीतीश कैंप में मचा हड़कंप

पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा के पार्टी छोड़ने की खबर से जेडीयू खेमे में हलचल मच गई है। कुशवाहा जेडीयू के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। वे पूर्णिया और सीमांचल इलाके में पार्टी के मजबूत कुशवाहा वोट बैंक पर पकड़ रखते हैं। ऐसे में उनका आरजेडी में जाना न केवल राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है, बल्कि सीमांचल में जेडीयू की स्थिति को भी कमजोर कर सकता है।

नीतीश कैंप में मचा हड़कंप
नीतीश कैंप में मचा हड़कंप

पार्टी सूत्रों का कहना है कि संतोष कुशवाहा पिछले कुछ महीनों से जेडीयू नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। उन्हें संगठन में वह सम्मान और भूमिका नहीं दी जा रही थी, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। खास तौर पर टिकट बंटवारे की अटकलों ने उनके असंतोष को और बढ़ा दिया।

तेजस्वी यादव की रणनीति सफल?

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव लगातार जेडीयू और बीजेपी के असंतुष्ट नेताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश में हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी ने सीमांचल और कोसी क्षेत्र पर विशेष फोकस किया है, क्योंकि इन इलाकों में मुस्लिम और पिछड़ी जातियों का वोट निर्णायक भूमिका निभाता है।

संतोष कुशवाहा जैसे नेताओं का जुड़ना आरजेडी के लिए बड़ा राजनीतिक फायदा साबित हो सकता है। एक ओर इससे पार्टी का सामाजिक समीकरण मजबूत होगा, वहीं दूसरी ओर जेडीयू की पारंपरिक पकड़ वाले इलाकों में भी सेंध लगाई जा सकेगी।

तेजस्वी यादव ने हाल ही में कहा था, “बिहार में बदलाव की हवा चल रही है। जनता अब विकास, रोजगार और शिक्षा पर आधारित राजनीति चाहती है। जो भी इस सोच के साथ आना चाहता है, आरजेडी के दरवाजे सबके लिए खुले हैं।”

कुशवाहा समाज पर नजर

बिहार की राजनीति में कुशवाहा समाज एक मजबूत जातीय समीकरण माना जाता है। यह वर्ग राज्य के कई जिलों में निर्णायक वोटर की भूमिका निभाता है। जेडीयू ने लंबे समय तक इस वोट बैंक को अपने साथ बनाए रखा था, लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं।
संतोष कुशवाहा के आरजेडी में शामिल होने से इस समाज में तेजस्वी यादव की पकड़ और मजबूत हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आरजेडी आगामी चुनाव में कुशवाहा समाज के वोटों का बड़ा हिस्सा अपने पक्ष में करने में सफल रहती है, तो नीतीश कुमार की पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

आने वाले दिनों में और भी बड़े बदलाव संभव

सूत्रों के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में जेडीयू के कुछ और नेता भी पार्टी छोड़ सकते हैं। कई विधायक और पूर्व पदाधिकारी संगठन के कामकाज से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर, आरजेडी लगातार नए नेताओं को जोड़कर अपने संगठन का विस्तार करने में जुटी है।

तेजस्वी यादव की टीम का कहना है कि आगामी चुनाव में आरजेडी “महागठबंधन” के तहत अपनी स्थिति को और मजबूत बनाएगी। वहीं, बीजेपी और जेडीयू ने भी इस घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है और संभावित नुकसान को रोकने के लिए रणनीतिक बैठकें शुरू कर दी हैं।

निष्कर्ष

बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले संतोष कुशवाहा का आरजेडी में शामिल होना राजनीतिक रूप से बड़ा संदेश देता है। यह कदम न केवल जेडीयू के लिए झटका है, बल्कि सीमांचल और कुशवाहा बहुल क्षेत्रों में सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। अब देखना होगा कि इस बदलाव का असर आगामी विधानसभा चुनाव के परिणामों पर कितना पड़ता है।

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