आनंदीबेन पटेल का चेतावनी भरा संदेश — लिव-इन कल्चर समाज के लिए चिंता का विषय !

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि बेटियों को अपने निर्णय सोच-समझकर लेने चाहिए। लिव-इन-रिलेशनशिप जैसे कल्चर से दूर रहना चाहिए।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने युवतियों को ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ जैसे चलन से दूर रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि आज समाज में तेजी से बदलती जीवनशैली और आधुनिकता के नाम पर कुछ प्रवृत्तियां युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए खतरनाक साबित हो रही हैं। इसलिए लड़कियों को अपने भविष्य, सम्मान और सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

आनंदीबेन पटेल का चेतावनी भरा संदेश — लिव-इन कल्चर समाज के लिए चिंता का विषय !
आनंदीबेन पटेल का चेतावनी भरा संदेश — लिव-इन कल्चर समाज के लिए चिंता का विषय !

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल वाराणसी में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 47वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर उन्होंने छात्र-छात्राओं को जीवन के मूल्य, शिक्षा की भूमिका और नैतिक जिम्मेदारियों के बारे में मार्गदर्शन दिया।

राज्यपाल ने जताई चिंता, कहा—‘लिव-इन’ से बढ़ रहे शोषण के मामले

राज्यपाल ने जताई चिंता, कहा—‘लिव-इन’ से बढ़ रहे शोषण के मामले
राज्यपाल ने जताई चिंता, कहा—‘लिव-इन’ से बढ़ रहे शोषण के मामले

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि आजकल युवाओं में लिव-इन रिलेशनशिप का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जो समाज के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के संबंधों में अक्सर लड़कियां भावनात्मक और सामाजिक रूप से शोषण की शिकार होती हैं, और बाद में उन्हें गंभीर मानसिक और कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा, “लड़कियों को अपने जीवन के फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। कुछ लोग प्यार और आज़ादी के नाम पर उनका इस्तेमाल करते हैं और बाद में छोड़ देते हैं। ऐसे में न केवल लड़की की प्रतिष्ठा बल्कि उसके परिवार की भावनाएं भी आहत होती हैं।”

राज्यपाल ने अभिभावकों और शिक्षकों से भी अपील की कि वे युवाओं के जीवन में संस्कार और नैतिक शिक्षा को प्राथमिकता दें ताकि वे सही निर्णय लेने में सक्षम बन सकें।

महिलाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर

महिलाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर
महिलाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज दोनों का दायित्व है कि बेटियों को सुरक्षित माहौल, बेहतर शिक्षा और अवसर मिलें।

उन्होंने कहा, “लड़कियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी भी होनी चाहिए। आत्मनिर्भर बनने के बाद ही वे गलत रास्तों और शोषण से खुद को बचा सकती हैं।”

राज्यपाल ने यह भी कहा कि महिलाओं को कानून के प्रति जागरूक रहना चाहिए — चाहे वह घरेलू हिंसा अधिनियम हो, महिला संरक्षण कानून हो या साइबर अपराध से जुड़ी धाराएं, सभी का ज्ञान होना आवश्यक है।

दीक्षांत समारोह में दिए प्रेरक संदेश

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में हजारों छात्र-छात्राओं को डिग्रियां और पुरस्कार वितरित किए गए। इस दौरान राज्यपाल ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाना है।

उन्होंने छात्रों से कहा, “देश आज आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ रहा है। ऐसे में युवा वर्ग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपको केवल नौकरी पाने की नहीं, बल्कि दूसरों को रोजगार देने की सोच रखनी चाहिए।”

राज्यपाल ने गांधीजी के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा वही सार्थक है जो व्यक्ति के अंदर सेवा, करुणा और समाज के प्रति समर्पण की भावना पैदा करे। उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ को “संस्कारों की भूमि” बताते हुए कहा कि यहां से निकलने वाला हर छात्र समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का वाहक बने।

‘सावधानी ही सुरक्षा’ — युवतियों के लिए विशेष संदेश

अपने संबोधन के अंत में आनंदीबेन पटेल ने एक बार फिर युवतियों को चेताया कि वे भावनाओं में बहकर किसी भी निर्णय न लें। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास और संयम दोनों जरूरी हैं।

उन्होंने कहा, “आज सोशल मीडिया और दिखावे के इस दौर में कई बार युवतियां झूठे रिश्तों और झूठे वादों में फंस जाती हैं। इसलिए बेटियों को सतर्क रहना होगा, और माता-पिता को भी अपनी बेटियों से खुलकर संवाद करना चाहिए।”

राज्यपाल ने समाज से अपील की कि महिलाओं के प्रति सम्मान, सुरक्षा और समानता का वातावरण बनाया जाए। उन्होंने कहा कि “सशक्त बेटियां ही सशक्त भारत की पहचान हैं।”

निष्कर्ष

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का यह बयान न केवल लिव-इन रिलेशनशिप के खतरों पर चेतावनी है, बल्कि यह एक सामाजिक संदेश भी है कि बदलते दौर में आधुनिकता के साथ संस्कार और सतर्कता का संतुलन जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि लड़कियों को अपने आत्मसम्मान, सुरक्षा और भविष्य को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहिए।

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