पवन सिंह का ऐलान: विधानसभा चुनाव से दूरी, बोले– BJP के लिए ही समर्पित हूं!

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि मैंने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ज्वाइन नहीं किया था। पार्टी का का सच्चा सिपाही हूं और रहूंगा।

भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता पवन सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से खुद को अलग करने का ऐलान किया है। उन्होंने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट शेयर करते हुए स्पष्ट किया कि वह आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके इस फैसले ने बिहार की राजनीतिक हलचल के बीच एक नया मोड़ ला दिया है, क्योंकि पिछले कई दिनों से उनके संभावित चुनावी मैदान में उतरने को लेकर चर्चाएं तेज थीं।

पवन सिंह का ऐलान: विधानसभा चुनाव से दूरी, बोले– BJP के लिए ही समर्पित हूं!
पवन सिंह का ऐलान: विधानसभा चुनाव से दूरी, बोले– BJP के लिए ही समर्पित हूं!

सोशल मीडिया पर किया ऐलान

पवन सिंह ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा,

“मैंने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ज्वॉइन नहीं किया था। मैं भाजपा का सच्चा सिपाही हूं और हमेशा रहूंगा। पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, मैं उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा।”

उनके इस बयान ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें यह कहा जा रहा था कि पवन सिंह इस बार आरा, बक्सर या भोजपुर की किसी सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर

बीते कुछ हफ्तों से यह चर्चा जोरों पर थी कि भाजपा पवन सिंह को अपने स्टार उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतार सकती है, ताकि युवा और भोजपुरी भाषी मतदाताओं को आकर्षित किया जा सके। पार्टी के अंदर भी इसको लेकर हलचल थी, क्योंकि पवन सिंह भोजपुरी सिनेमा के बड़े चेहरे हैं और उनके लाखों प्रशंसक हैं।
हालांकि अब उनके बयान के बाद यह साफ हो गया है कि वह संगठन के साथ रहकर ही काम करेंगे, न कि सीधे चुनावी मैदान में उतरेंगे।

‘पार्टी के प्रति समर्पण’ पर दिया जोर

‘पार्टी के प्रति समर्पण’ पर दिया जोर
‘पार्टी के प्रति समर्पण’ पर दिया जोर

पवन सिंह ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि राजनीति उनके लिए “सेवा का माध्यम” है, न कि “व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का रास्ता।” उन्होंने कहा कि भाजपा के विचारों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और बिहार का विकास देखकर उन्होंने पार्टी से जुड़ने का निर्णय लिया था।
उन्होंने लिखा,

“मेरे लिए पार्टी और राष्ट्र सर्वोपरि हैं। मैंने हमेशा प्रधानमंत्री मोदी जी की नीतियों और देशहित की योजनाओं का समर्थन किया है। मैं पार्टी के आदेशों का पालन करता रहूंगा।”

पार्टी सूत्रों ने क्या कहा

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पवन सिंह को पार्टी बिहार चुनाव में “स्टार प्रचारक” के रूप में इस्तेमाल कर सकती है। पार्टी चाहती है कि वह अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए करें।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “पवन सिंह जैसे लोकप्रिय चेहरों का चुनाव प्रचार में बड़ा असर होता है। वे न केवल भोजपुरी बेल्ट में, बल्कि पूरे उत्तर भारत में बड़ी फैन फॉलोइंग रखते हैं। पार्टी उनके योगदान को संगठन के स्तर पर आगे बढ़ाना चाहती है।”

पवन सिंह का राजनीतिक सफर

भोजपुरी सिनेमा में “लॉलीपॉप लागेलू”, “फाइटर किंग”, “सरकार राज” जैसी हिट फिल्मों से पहचान बनाने वाले पवन सिंह ने कुछ समय पहले ही भाजपा का दामन थामा था। उनके पार्टी में शामिल होने के बाद से ही यह चर्चा शुरू हो गई थी कि वह सक्रिय राजनीति में उतर सकते हैं।
हालांकि उन्होंने अब साफ कर दिया है कि भाजपा से उनका जुड़ाव केवल चुनावी कारणों से नहीं, बल्कि विचारधारा और नेतृत्व में विश्वास की वजह से है।

समर्थकों में मिली-जुली प्रतिक्रिया

पवन सिंह के इस फैसले पर उनके प्रशंसकों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ फैंस ने उनके निर्णय की सराहना की और कहा कि “यह दिखाता है कि पवन सिंह राजनीति को सेवा के रूप में देखते हैं।” वहीं कुछ प्रशंसकों ने निराशा भी जताई कि वे अपने पसंदीदा स्टार को विधानसभा में देखने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
कई यूज़र्स ने X पर लिखा — “पवन सिंह जैसे ईमानदार चेहरों की राजनीति में ज़रूरत है, लेकिन उनका यह फैसला भी सम्मानजनक है क्योंकि उन्होंने व्यक्तिगत लाभ से ऊपर पार्टी को रखा।”

भोजपुरी स्टार्स की राजनीति में बढ़ती भूमिका

यह पहली बार नहीं है जब भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े किसी बड़े स्टार ने राजनीति में रुचि दिखाई हो। इससे पहले रवि किशन, मनोज तिवारी और निरहुआ (दिनेश लाल यादव) जैसे कलाकार भी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं और सांसद बने हैं।
पवन सिंह के भी राजनीति में आने से भाजपा को भोजपुरी बेल्ट में और मजबूती मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब वे संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय रहेंगे।

निष्कर्ष

पवन सिंह का विधानसभा चुनाव न लड़ने का निर्णय यह दर्शाता है कि वे राजनीति को लोकप्रियता का माध्यम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के रूप में देखते हैं। उनका यह बयान भाजपा के प्रति निष्ठा और व्यक्तिगत विनम्रता दोनों को दर्शाता है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा आने वाले दिनों में उन्हें किस भूमिका में पेश करती है — क्या वे स्टार प्रचारक बनकर एनडीए के लिए चुनावी जोश बढ़ाएंगे या संगठन के अंदर किसी अहम जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।
फिलहाल, पवन सिंह का यह ऐलान बिहार की सियासी फिज़ा में एक नया संदेश लेकर आया है — लोकप्रियता से ऊपर है समर्पण और विचारधारा।

Also Read :

फेसबुक ने बहाल किया अखिलेश यादव का अकाउंट, 24 घंटे बाद मिली राहत!