सुप्रिया सुले ने राज ठाकरे की एमवीए में संभावित एंट्री पर तोड़ी चुप्पी !

राज ठाकरे के महा विकास आघाड़ी में शामिल होने की अटकलों के बीच सुप्रिया सुले ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ये बड़े राजनीतिक फैसले हैं।

महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों सबसे चर्चित मुद्दा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे की विपक्षी महा विकास आघाड़ी (MVA) में संभावित एंट्री को लेकर है। राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा तेज़ है कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज ठाकरे विपक्षी गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने बुधवार को इस मुद्दे पर एक बड़ा बयान देकर राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।

सुप्रिया सुले ने राज ठाकरे की एमवीए में संभावित एंट्री पर तोड़ी चुप्पी !
सुप्रिया सुले ने राज ठाकरे की एमवीए में संभावित एंट्री पर तोड़ी चुप्पी !

सुप्रिया सुले ने मीडिया से बातचीत में कहा, “राष्ट्रहित में अगर सभी ताकतें एक साथ आती हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है। देश और राज्य के हित में जो भी फैसला होगा, हम उसका स्वागत करते हैं।” उनके इस बयान को राज ठाकरे की संभावित एंट्री पर अप्रत्यक्ष रूप से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी अटकलें

दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों से यह चर्चा चल रही है कि राज ठाकरे की पार्टी MNS, जो पहले से ही भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) से दूरी बना चुकी है, अब विपक्षी MVA के करीब आ सकती है। MVA में फिलहाल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट), कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) शामिल हैं। अगर राज ठाकरे इस गठबंधन में आते हैं, तो यह विपक्षी खेमे के लिए एक बड़ा राजनीतिक सिग्नल होगा।

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के रिश्ते पहले बेहद तल्ख रहे हैं, लेकिन हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच की राजनीतिक भाषा में नरमी देखी गई है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बदलाव आने वाले चुनावी समीकरणों के तहत रणनीतिक है।

सुप्रिया सुले का संतुलित बयान

सुप्रिया सुले का बयान इस पूरे घटनाक्रम के बीच बेहद अहम माना जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर MNS के MVA में शामिल होने की पुष्टि नहीं की, लेकिन उनका यह कहना कि “राष्ट्रहित में साथ आना गलत नहीं” कई मायनों में संकेत देता है कि NCP (शरद गुट) किसी भी सहयोग की संभावना से इंकार नहीं कर रही।
उन्होंने यह भी कहा, “राजनीति में संवाद का रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए। अगर कोई भी ताकत राज्य के विकास और जनहित के लिए काम करना चाहती है, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।”

MVA के भीतर अलग-अलग सुर

हालांकि, MVA के अन्य घटक दलों के भीतर राज ठाकरे को लेकर मतभेद भी हैं। शिवसेना (उद्धव गुट) के कुछ नेताओं का मानना है कि राज ठाकरे की राजनीति अक्सर मराठी अस्मिता और आक्रामक हिंदुत्व के मुद्दों पर केंद्रित रही है, जो कांग्रेस और NCP के उदारवादी रुख से मेल नहीं खाती। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अभी इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

फिर भी, कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर राज ठाकरे विपक्षी खेमे में आते हैं, तो मुंबई और शहरी महाराष्ट्र के मराठी वोट बैंक पर इसका असर पड़ सकता है। MVA के लिए यह एक रणनीतिक लाभ हो सकता है, खासकर तब जब भाजपा और शिंदे गुट की जोड़ी सत्ता में बने रहने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

राज ठाकरे का रुख अब तक अस्पष्ट

उधर, राज ठाकरे ने अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, उन्होंने हाल में कुछ सार्वजनिक कार्यक्रमों में केंद्र सरकार और महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार की नीतियों की आलोचना की है। इससे यह संकेत मिला कि वे विपक्षी रुख अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

राज ठाकरे, जो कभी शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के करीबी रहे हैं, ने 2006 में अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की स्थापना की थी। उनकी पार्टी ने शुरुआती दौर में मराठी अस्मिता को लेकर मजबूत राजनीति की थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में MNS का जनाधार काफी कमजोर हुआ है। ऐसे में, विपक्षी गठबंधन में शामिल होना उनके लिए राजनीतिक पुनर्जीवन का अवसर हो सकता है।

निष्कर्ष

सुप्रिया सुले के बयान के बाद अब यह साफ है कि महा विकास आघाड़ी इस मुद्दे पर पूरी तरह दरवाजा बंद करने के मूड में नहीं है। अगर राज ठाकरे विपक्षी गठबंधन में शामिल होते हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में MNS और MVA के बीच होने वाली चर्चाएं तय करेंगी कि यह गठबंधन केवल अटकल है या वाकई एक नई राजनीतिक सच्चाई बनने जा रहा है।

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