पीएम मोदी और श्रीलंका की प्रधानमंत्री की मुलाकात, व्यापार व क्षेत्रीय सहयोग पर हुई अहम चर्चा !

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पीएम मोदी ने शुक्रवार को श्रीलंका की प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या से मुलाकात की। इस दौरान कई मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा की गई।

भारत और श्रीलंका के बीच संबंध एक बार फिर नई ऊंचाई पर पहुंचते नजर आ रहे हैं। श्रीलंका की प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या इन दिनों अपने भारत दौरे पर हैं। अपने इस दौरे के तहत उन्होंने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की। यह बैठक दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

पीएम मोदी और श्रीलंका की प्रधानमंत्री की मुलाकात, व्यापार व क्षेत्रीय सहयोग पर हुई अहम चर्चा !
पीएम मोदी और श्रीलंका की प्रधानमंत्री की मुलाकात, व्यापार व क्षेत्रीय सहयोग पर हुई अहम चर्चा !

बैठक प्रधानमंत्री मोदी के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आधिकारिक आवास पर हुई, जहां दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता, विकास सहयोग, मछुआरा समुदाय से जुड़े मुद्दे और शिक्षा एवं तकनीकी सहयोग जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।

विकास सहयोग और आर्थिक साझेदारी पर जोर

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और श्रीलंका के बीच चल रहे विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका को आश्वासन दिया कि भारत आर्थिक पुनरुत्थान की दिशा में उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा।
भारत ने हाल के वर्षों में श्रीलंका को वित्तीय सहायता, ऋण सुविधा और मानवीय मदद के रूप में लगभग 4 अरब डॉलर का समर्थन दिया है, जिससे आर्थिक संकट से उबरने में उसे काफी मदद मिली।

मोदी ने कहा कि भारत की “पड़ोसी पहले (Neighbourhood First)” नीति के तहत श्रीलंका हमेशा प्राथमिकता पर रहेगा। दोनों देशों ने बुनियादी ढांचा विकास, ऊर्जा सहयोग, और द्वीप के उत्तरी क्षेत्र में कनेक्टिविटी सुधारने से जुड़ी परियोजनाओं पर भी चर्चा की।

अमरसूर्या ने भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का सहयोग श्रीलंका के लिए केवल आर्थिक नहीं, बल्कि जन-जन के जीवन से जुड़ा हुआ समर्थन है। उन्होंने भारतीय निवेशकों को श्रीलंका में नई परियोजनाओं में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया।

भारतीय मछुआरों का मुद्दा और समुद्री सहयोग

बैठक में भारतीय मछुआरों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। तमिलनाडु और श्रीलंका के उत्तरी तटीय इलाकों के बीच मछली पकड़ने को लेकर समय-समय पर तनाव की स्थिति बनती रही है।
दोनों देशों के नेताओं ने इस मसले पर संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति जताई। तय किया गया कि इस मुद्दे को बातचीत के ज़रिए हल किया जाएगा ताकि दोनों देशों के मछुआरों का हित सुरक्षित रहे।

मोदी और अमरसूर्या ने समुद्री सुरक्षा और अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों पर भी चिंता जताई और इसे रोकने के लिए साझा प्रयासों को तेज करने की बात कही।

शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक सहयोग

द्विपक्षीय वार्ता में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। भारत ने श्रीलंका के छात्रों के लिए शैक्षिक छात्रवृत्ति कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाने और डिजिटल लर्निंग नेटवर्क के विस्तार की घोषणा की।
इसके साथ ही भारत श्रीलंका में AI और कौशल विकास केंद्र स्थापित करने में मदद करेगा, ताकि युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

दोनों देशों ने आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के क्षेत्र में भी संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और श्रीलंका का सांस्कृतिक रिश्ता हजारों साल पुराना है, जिसे आधुनिक सहयोग के ज़रिए और भी गहरा किया जा सकता है।

क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक साझेदारी

मोदी और अमरसूर्या ने हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिरता पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के लिए करीबी समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

भारत ने श्रीलंका को सौर ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और आपदा प्रबंधन के क्षेत्रों में सहायता देने का प्रस्ताव रखा। श्रीलंका ने इन प्रस्तावों का स्वागत किया और कहा कि इससे दोनों देशों के बीच साझेदारी और मजबूत होगी।

मुलाकात का महत्व और आगे की राह

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब श्रीलंका आर्थिक संकट से धीरे-धीरे उबर रहा है और क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर नई रणनीतिक संतुलन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
भारत और श्रीलंका की यह बैठक न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को सुदृढ़ करेगी, बल्कि दक्षिण एशिया में स्थिरता और सहयोग के नए आयाम भी खोलेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने अमरसूर्या को भारत में उनके पहले आधिकारिक दौरे के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि आने वाले समय में भारत-श्रीलंका संबंध “विश्वास, विकास और जनकल्याण” पर आधारित नए युग में प्रवेश करेंगे।

अंत में दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को और गहरा करने तथा क्षेत्रीय शांति व प्रगति के लिए मिलकर काम करने का संकल्प दोहराया।

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