बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए नामांकन कल समाप्त हो गया लेकिन महागठबंधन में लगता है सब ठीक नहीं। आठ सीटों पर फ्रेंडली फाइट होगी। वहीं, सीटों की रस्साकशी के बाद एनडीए में अब शांति है। जानें पल पल के अपडेट्स…
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का चुनावी संग्राम अब पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। पहले चरण की 121 सीटों पर नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस चरण की सीटों पर अब सभी राजनीतिक दलों के उम्मीदवार मैदान में हैं। एनडीए की ओर से सीट बंटवारे का विवाद खत्म हो गया है और गठबंधन ने एकजुट होकर चुनाव प्रचार तेज कर दिया है। लेकिन दूसरी ओर महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वामदल और वीआईपी) के भीतर सीट शेयरिंग का मामला अब भी पूरी तरह सुलझा नहीं है।

इस असमंजस का नतीजा यह हुआ है कि पहले चरण की कई सीटों पर महागठबंधन के घटक दलों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। इन सीटों पर अब ‘फ्रेंडली फाइट’ यानी आपसी मुकाबला देखने को मिलेगा, जिससे विपक्षी एकता पर सवाल उठने लगे हैं।
एनडीए में सुलझा सीट बंटवारा, सभी दल मैदान में

नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (एनडीए) में पिछले कुछ दिनों से चल रहा सीट शेयरिंग का घमासान आखिरकार समाप्त हो गया है। भाजपा, जदयू, हम और रालोसपा के बीच फॉर्मूला तय कर लिया गया है। पहले चरण की सभी 121 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए गए हैं।
भाजपा ने रणनीतिक रूप से अपने पुराने गढ़ों में मजबूत उम्मीदवार उतारे हैं, वहीं जदयू ने अपने पारंपरिक क्षेत्रों में सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए टिकट वितरण किया है।
गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक साथ एनडीए की एकजुटता का संदेश दिया है। दोनों नेताओं ने चुनाव प्रचार की शुरुआत करते हुए कहा कि बिहार में विकास, सुशासन और स्थिरता का सिलसिला जारी रहेगा।
एनडीए ने अपने प्रचार अभियान में “विकसित बिहार, स्थिर सरकार” का नारा दिया है और पीएम मोदी की योजनाओं को जनता के बीच प्रमुखता से रखा जा रहा है।
महागठबंधन में उलझा सीट बंटवारा
वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन में अभी भी सीटों को लेकर पूरी सहमति नहीं बन पाई है। पहले चरण के नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद सीट शेयरिंग का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ। हालांकि, अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में राजद को 72, कांग्रेस को 26, वामदल (भाकपा, भाकपा-माले और माकपा) को 21 सीटें, और वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) को 6 सीटें दी गई हैं।
लेकिन सीटों के बंटवारे में देरी और समन्वय की कमी ने कई जगहों पर गठबंधन की एकता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
आठ सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ — सहयोगी ही बने प्रतिद्वंद्वी
महागठबंधन के घटक दलों के बीच तालमेल न बैठने का सीधा असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। पहले चरण में आठ विधानसभा सीटों पर राजद और कांग्रेस के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं।
ये सीटें हैं —
वैशाली, लालगंज, राजापाकड़, बछवाड़ा, रोसड़ा, तारापुर और कहलगांव।
इन सीटों पर दोनों दलों ने अपने प्रत्याशियों को नामांकन करा दिया है।
ऐसे में अब इन इलाकों में ‘फ्रेंडली फाइट’ देखने को मिलेगी, यानी गठबंधन के ही उम्मीदवार एक-दूसरे को हराने की कोशिश करेंगे। इस स्थिति से विपक्षी मतों का बंटवारा होने की पूरी संभावना है, जिसका सीधा फायदा एनडीए को मिल सकता है।
कांग्रेस के कई स्थानीय नेताओं ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई है। वहीं राजद का कहना है कि ये केवल “तकनीकी कारणों” से हुई गड़बड़ी है और जल्द ही समाधान निकाल लिया जाएगा।
वामदल और वीआईपी की रणनीति
वामपंथी दल — भाकपा, माकपा और भाकपा-माले — महागठबंधन के तहत कुल 21 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें कई सीटें ऐसी हैं, जहां 2020 के चुनाव में इन दलों ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया था।
भाकपा-माले ने पहले ही 20 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है और पार्टी ने दावा किया है कि वह जनता के मुद्दों पर मजबूती से चुनाव लड़ेगी।
वीआईपी पार्टी, जो पहले एनडीए में थी और अब महागठबंधन का हिस्सा है, उसे छह सीटें मिली हैं। लेकिन पार्टी प्रमुख मुकेश सहनी कुछ सीटों को लेकर नाखुश बताए जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सहनी का महागठबंधन से मोहभंग हो रहा है और वे चुनाव के बाद फिर से एनडीए का रुख कर सकते हैं।
एनडीए ने तेज किया प्रचार अभियान
एनडीए ने सीट बंटवारे के बाद तेजी से प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। भाजपा और जदयू के शीर्ष नेता हर जिले में जनसभाएं कर रहे हैं।
नीतीश कुमार अपने “विकास यात्रा” के जरिए राज्य की उपलब्धियां गिना रहे हैं, जबकि भाजपा “डबल इंजन सरकार” की उपलब्धियों को केंद्र में रखकर प्रचार कर रही है।
दूसरी ओर, महागठबंधन अब भी तालमेल और सीटों के विवाद में उलझा है। अगर यह स्थिति लंबी चली, तो इसका सीधा असर विपक्षी एकता और मतदाताओं के विश्वास पर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही बिहार चुनाव की तस्वीर साफ होने लगी है। एनडीए पूरी तरह एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतर चुका है, जबकि महागठबंधन अब भी आंतरिक खींचतान से जूझ रहा है।
आठ सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ और सीट बंटवारे को लेकर असहमति ने विपक्ष की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि महागठबंधन इन मतभेदों को दूर कर एकजुटता दिखा पाता है या नहीं — क्योंकि बिहार की जनता अब तैयार है, और रण का बिगुल बज चुका है।
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