भोजपुरी पावर स्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह भी चुनावी मैदान में खड़ी हैं। वह काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन अब उनका कहना है कि चुनाव लड़ने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। उन्होंने जनता से मदद मांगते हुए एक पोस्ट भी शेयर किया, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया।
भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह इस बार बिहार विधानसभा चुनाव के लिए रोहतास जिले की काराकाट विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरीं ज्योति सिंह ने अपने प्रचार अभियान से चुनावी माहौल को और भी गर्मा दिया है। हालांकि, हाल ही में उन्होंने एक ऐसी समस्या का खुलासा किया है, जिसने उनके प्रचार अभियान की चुनौतियों को उजागर किया है।

नामांकन के समय संपत्ति का खुलासा
ज्योति सिंह ने हाल ही में नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि उनके पास कुल 18 लाख रुपये की संपत्ति है। उन्होंने कहा कि यह संपत्ति उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक खर्चों के लिए है, लेकिन चुनावी अभियान चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने साफ किया कि प्रचार और मतदाता संपर्क के लिए उन्हें अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है।
निर्दलीय प्रत्याशी होने के नाते ज्योति सिंह को चुनावी प्रचार के लिए किसी बड़े राजनीतिक दल का समर्थन नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि उनके पति पवन सिंह, जो भोजपुरी सिनेमा में सुपरस्टार हैं, से भी फिलहाल कोई वित्तीय मदद नहीं मिली है। इस स्थिति ने उनके चुनाव प्रचार को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
जनता से मदद की गुहार
ज्योति सिंह ने इस वित्तीय संकट का समाधान खोजने के लिए जनता से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि चुनावी प्रचार में उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और अगर जनता उनकी पसंद करती है तो उन्हें सहयोग देना चाहिए। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने यह पोस्ट हटा दिया, जिससे चर्चा का विषय बन गया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम उनकी स्थिति और चुनावी रणनीति को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में प्रचार करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब बड़े राजनीतिक दलों के मुकाबले संसाधनों की कमी हो।
चुनावी रणनीति और प्रचार
ज्योति सिंह ने अपने प्रचार अभियान में जोर-शोर से जनता से संपर्क स्थापित किया है। उन्होंने गांव-गांव जाकर मतदाताओं से संवाद किया और स्थानीय समस्याओं को समझने की कोशिश की। उनका अभियान मुख्य रूप से महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर केंद्रित है।
हालांकि, प्रचार अभियान में वित्तीय कमी ने उनके कार्यक्रमों और जनसभाओं को प्रभावित किया है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग भी सीमित संसाधनों के कारण चुनौतीपूर्ण हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि निर्दलीय प्रत्याशी के लिए पैसा और संसाधन चुनावी सफलता के लिए अहम होते हैं, और इनकी कमी उनकी पहुंच और प्रभाव को सीमित कर सकती है।
पवन सिंह का राजनीतिक समर्थन

पवन सिंह की लोकप्रियता और स्टार पावर निश्चित रूप से ज्योति सिंह के प्रचार में मददगार साबित हो सकती है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी वित्तीय मदद नहीं की गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि ज्योति सिंह को मुख्य रूप से स्वयं और जनता के सहयोग पर निर्भर रहना होगा।
विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए आम है। बड़े दलों के प्रत्याशी को पार्टी के संसाधन, प्रचार सामग्री और वित्तीय सहायता मिलती है, जबकि स्वतंत्र उम्मीदवार को खुद अपने प्रचार को संचालित करना पड़ता है।
जनता की प्रतिक्रिया
ज्योति सिंह के पोस्ट को हटाने के बाद सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ समर्थकों ने उनके साहस की सराहना की और कहा कि उन्होंने अपने संसाधनों के बावजूद जनता से सीधे संपर्क स्थापित करने की कोशिश की। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि पोस्ट हटाना संकेत है कि शायद प्रत्याशी अभी रणनीति बदल रही हैं या वित्तीय संकट को सार्वजनिक रूप से उजागर करना नहीं चाहती।
निष्कर्ष
ज्योति सिंह का यह खुलासा दर्शाता है कि निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए चुनावी अभियान में संसाधन और वित्तीय समर्थन कितना महत्वपूर्ण होता है। पवन सिंह की स्टार पावर से उन्हें एक निश्चित पहचान मिली है, लेकिन चुनावी मैदान में सफलता पाने के लिए उन्हें जनता का समर्थन और सहयोग अत्यंत आवश्यक होगा।
रोहतास की काराकाट विधानसभा सीट पर यह चुनाव न केवल उम्मीदवारों की लोकप्रियता बल्कि वित्तीय संसाधनों और प्रचार की ताकत की परीक्षा भी लेगा। ज्योति सिंह की मेहनत और जनता से जुड़ने की रणनीति उनकी सफलता में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
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