इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुरादाबाद सपा कार्यालय को खाली करने के आदेश को रद्द कर दिया है। इससे मुरादाबाद प्रशासन को तगड़ा झटका लगा है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (SP) के लिए शुक्रवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुरादाबाद में सपा कार्यालय को खाली कराने के प्रशासनिक आदेश को रद्द कर दिया है। इस फैसले से जहां समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है, वहीं मुरादाबाद प्रशासन को तगड़ा झटका लगा है। अदालत ने साफ कहा कि प्रशासनिक आदेश उचित प्रक्रिया के बिना जारी किया गया था और यह कानून के अनुरूप नहीं था।

क्या था मामला?
दरअसल, मुरादाबाद शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र में स्थित समाजवादी पार्टी का यह कार्यालय वर्षों से पार्टी की गतिविधियों का केंद्र रहा है। प्रशासन ने हाल ही में दावा किया था कि जिस जमीन पर यह भवन बना है, वह सरकारी भूमि है और इसे खाली कराया जाना चाहिए। इसी आधार पर स्थानीय प्रशासन ने सपा कार्यालय खाली करने का नोटिस जारी किया था।
प्रशासन का कहना था कि यह भवन बिना विधिवत स्वीकृति के सरकारी जमीन पर बना हुआ है। इस नोटिस के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि कार्यालय पार्टी को विधिवत आवंटित है और यह भवन लंबे समय से वैधानिक रूप से उपयोग में लाया जा रहा है।
9 अक्टूबर को लगी थी रोक
इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच — जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह — के समक्ष हुई। कोर्ट ने 9 अक्टूबर को इस पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए प्रशासन को कार्यालय खाली कराने की कार्रवाई से रोक लगा दी थी। साथ ही 28 अक्टूबर की तारीख तय करते हुए विस्तृत सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध किया गया था।
आज की सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। प्रशासन ने दावा किया कि जमीन सरकारी है और कार्यालय अवैध रूप से कब्जे में है। वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से यह तर्क दिया गया कि पार्टी को यह भवन वैधानिक प्रक्रिया से आवंटित किया गया था और दशकों से यह पार्टी का अधिकृत कार्यालय है।
हाईकोर्ट का फैसला और तर्क

सुनवाई पूरी होने के बाद डबल बेंच ने अपने आदेश में कहा कि प्रशासन ने सपा कार्यालय को खाली कराने का आदेश जारी करते समय उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। अदालत ने पाया कि न तो भूमि स्वामित्व का विवाद स्पष्ट रूप से सुलझाया गया था और न ही पार्टी को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया।
अदालत ने कहा, “प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किसी भी प्रशासनिक आदेश को अवैध बना देता है। जब तक भूमि स्वामित्व या लीज से संबंधित विवादों का स्पष्ट निपटारा नहीं हो जाता, तब तक किसी भी पक्ष को जबरन हटाया नहीं जा सकता।”
इस आधार पर हाईकोर्ट ने प्रशासन का आदेश रद्द करते हुए सपा कार्यालय को फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
सपा नेताओं में खुशी की लहर
फैसले के बाद सपा नेताओं ने इसे “न्याय की जीत” बताया। पार्टी के मुरादाबाद जिलाध्यक्ष सतीश यादव ने कहा, “यह फैसला सच्चाई और न्याय की जीत है। प्रशासन ने राजनीतिक दबाव में आकर कार्यालय खाली कराने का नोटिस दिया था, लेकिन अदालत ने सच्चाई सामने रख दी।”
वहीं, सपा प्रवक्ता ने कहा कि “यह कार्यालय सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं का प्रतीक है। पार्टी कानून और व्यवस्था में विश्वास रखती है और अदालत के फैसले का स्वागत करती है।”
प्रशासन को लगा झटका
दूसरी ओर, मुरादाबाद प्रशासन के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जिला प्रशासन अब मामले की कानूनी समीक्षा करवाने की तैयारी में है और जल्द ही इस पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट के आदेश का सम्मान किया जाएगा, लेकिन दस्तावेजों की पुनः जांच कर अगला कदम उठाया जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल मच गई है। भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं ने कहा कि “यह सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया है, इससे राजनीति का कोई लेना-देना नहीं है।” वहीं, कांग्रेस और वामपंथी दलों के नेताओं ने कहा कि “यह फैसला यह दर्शाता है कि प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।”
फिलहाल यथास्थिति बरकरार
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सपा कार्यालय में गतिविधियां पहले की तरह जारी रहेंगी। पुलिस और प्रशासन को स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या राजनीतिक टकराव की स्थिति न बने।
यह फैसला न केवल समाजवादी पार्टी के लिए कानूनी राहत है, बल्कि आने वाले समय में राजनीतिक दृष्टि से भी अहम साबित हो सकता है, क्योंकि चुनावी माहौल में यह घटना राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन चुकी है।
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