डिप्टी CM विजय सिन्हा को कड़ी चुनौती, अमरेश अनीश मैदान में !

vijay sinha
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लखीसराय विधानसभा सीट पर इस बार कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। इस सीट पर आमने सामने हैं जदयू के प्रत्याशी है बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और कांग्रेस के अमरेश अनीश। तीसरे प्रत्याशी हैं जनसुराज के सूरज कुमार। कौन जीतेगा लखीसराय सीट?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को होने जा रहा है, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी। इन तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य की सियासी फिज़ा गर्म हो गई है। खासकर लखीसराय विधानसभा सीट इस बार सुर्खियों में है, जहां मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय हो गया है। इस सीट से बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा एक बार फिर एनडीए के प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस ने अमरेश कुमार अनीश पर दांव लगाया है। तीसरे मोर्चे पर प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने सूरज कुमार को टिकट देकर मुकाबले को और रोचक बना दिया है।

डिप्टी CM विजय सिन्हा को कड़ी चुनौती, अमरेश अनीश मैदान में !
डिप्टी CM विजय सिन्हा को कड़ी चुनौती, अमरेश अनीश मैदान में !

लखीसराय की अहमियत

लखीसराय सीट का राजनीतिक महत्व सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि राज्य स्तरीय है। यह वही सीट है जिसने पिछले दो चुनावों में एनडीए, विशेषकर भाजपा को मजबूती दी थी। विजय कुमार सिन्हा, जो वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं, ने 2020 के चुनाव में राजद उम्मीदवार को हराकर शानदार जीत दर्ज की थी। अब वे अपनी साख और उपमुख्यमंत्री पद की प्रतिष्ठा को बनाए रखने की चुनौती से जूझ रहे हैं।

वहीं कांग्रेस के अमरेश अनीश पहली बार बड़े पैमाने पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। वे स्थानीय स्तर पर एक शिक्षित और युवा चेहरा हैं, जिन्होंने हाल के वर्षों में संगठन को मजबूत करने और जनता से जुड़ने पर फोकस किया है। उनकी छवि एक साफ-सुथरे और जमीन से जुड़े नेता की मानी जाती है, जो कांग्रेस के लिए नए वोट बैंक की उम्मीद जगा रही है।

त्रिकोणीय मुकाबले का गणित

अब तक लखीसराय में आम तौर पर भाजपा बनाम राजद या कांग्रेस मुकाबला देखा जाता रहा है, लेकिन इस बार जनसुराज की एंट्री ने समीकरण बदल दिए हैं। प्रशांत किशोर की इस नई पार्टी ने गांव-गांव जाकर जनसंपर्क अभियान चलाया है, जिसका असर युवाओं और पहली बार वोट देने वालों में देखने को मिल रहा है। सूरज कुमार भले ही नया चेहरा हों, लेकिन वे जनसुराज की “नई राजनीति” के प्रतीक बनकर उभरे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर जनसुराज को 8 से 10 प्रतिशत वोट भी मिलते हैं, तो यह कांग्रेस और एनडीए दोनों के लिए चुनौती बन सकता है। इससे वोटों का बंटवारा होने की संभावना बढ़ जाती है, जो परिणाम को अप्रत्याशित बना सकता है।

जातीय समीकरण का प्रभाव

लखीसराय में यादव, भूमिहार, ब्राह्मण, और दलित मतदाताओं की संख्या संतुलित है। विजय सिन्हा को भूमिहार और शहरी वोटों का पारंपरिक समर्थन मिलता रहा है, जबकि कांग्रेस के अमरेश अनीश यादव और अल्पसंख्यक मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। दूसरी ओर, जनसुराज सामाजिक न्याय और युवा रोजगार के मुद्दे पर जातिगत रेखाओं से परे वोट खींचने की कोशिश में है।

मुद्दे और माहौल

लखीसराय के मतदाताओं के बीच इस बार जो मुद्दे प्रमुख हैं, उनमें बेरोजगारी, सड़क और अस्पताल की स्थिति, कानून व्यवस्था, और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली शामिल हैं। एनडीए इन चुनावों में विकास के मुद्दे पर जनता से समर्थन मांग रहा है। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों — जैसे सड़कों का विस्तार, बिजली और रोजगार योजनाओं — को अपनी उपलब्धि के रूप में गिना रहे हैं।

वहीं कांग्रेस के अमरेश अनीश सरकार पर बेरोजगारी, किसानों की समस्या और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर निशाना साध रहे हैं। वे जनता से “परिवर्तन” की अपील कर रहे हैं। जनसुराज के सूरज कुमार विकास और शिक्षा सुधार की बात कर रहे हैं, और खुद को “पुरानी राजनीति के विकल्प” के रूप में पेश कर रहे हैं।

मुकाबला कांटे का, नतीजा दिलचस्प होगा

स्थानीय राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विजय सिन्हा अभी भी मुकाबले में आगे हैं, लेकिन कांग्रेस और जनसुराज दोनों ने इस बार वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। यदि विरोधी वोट एकजुट हुए, तो यह चुनाव किसी भी दिशा में जा सकता है।

चुनाव प्रचार अपने चरम पर है — गांवों में नुक्कड़ सभाएँ, रोड शो और घर-घर प्रचार जोरों पर है। हर पार्टी अपनी पूरी ताकत झोंक रही है, क्योंकि लखीसराय की जीत या हार सिर्फ एक सीट का सवाल नहीं, बल्कि यह बिहार की सियासत की दिशा तय कर सकती है।

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