बिहार चुनाव में महिला वोटर्स का दबदबा, आंकड़े चौंकाने वाले !

Bihar Assembly Election 2025: बिहार में पहले चरण में कुल 65.08 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें महिलाओं का प्रतिशत 69.04 और पुरुषों का प्रतिशत 61.56 रहा. ये अस्थायी आंकड़ों के अनुसार है.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार मतदाताओं ने लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। दो चरणों में संपन्न हुए इस चुनाव में रिकॉर्ड मतदान हुआ है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि जनता बदलाव और भागीदारी के प्रति पहले से कहीं अधिक उत्साहित है। खास बात यह रही कि इस बार महिलाओं ने मतदान में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार में कुल मतदान प्रतिशत 66.91 दर्ज किया गया, जिसमें 62.8 प्रतिशत पुरुषों ने और 71.6 प्रतिशत महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह आंकड़ा बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर इशारा करता है।

बिहार चुनाव में महिला वोटर्स का दबदबा, आंकड़े चौंकाने वाले !
बिहार चुनाव में महिला वोटर्स का दबदबा, आंकड़े चौंकाने वाले !

महिलाओं की बढ़ी भागीदारी ने बढ़ाया कुल वोट प्रतिशत

महिलाओं की बढ़ी भागीदारी ने बढ़ाया कुल वोट प्रतिशत
महिलाओं की बढ़ी भागीदारी ने बढ़ाया कुल वोट प्रतिशत

पिछले चुनावों की तुलना में इस बार मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। जानकारों के मुताबिक, इस वृद्धि के पीछे महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी एक प्रमुख कारण है। गांव से लेकर शहर तक, महिलाएं सुबह से ही मतदान केंद्रों पर कतारों में दिखाई दीं। कई जिलों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 75 फीसदी के पार भी चला गया। ग्रामीण इलाकों में महिला मतदाताओं का उत्साह देखने लायक था।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्य के लगभग सभी जिलों में महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही। विशेष रूप से गया, सहरसा, दरभंगा, मधुबनी, और पूर्णिया जैसे जिलों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव न सिर्फ राजनीतिक चेतना का प्रतीक है, बल्कि बिहार की सामाजिक संरचना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का भी संकेत है।

महिला मतदाताओं का झुकाव किस ओर?

हालांकि अभी परिणाम घोषित नहीं हुए हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से कई सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं। महिला मतदाता अक्सर विकास, सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर वोट करती हैं। यह प्रवृत्ति पुरुष मतदाताओं से कुछ अलग मानी जाती है, जो कई बार जातीय या राजनीतिक निष्ठा के आधार पर मतदान करते हैं।
चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार महिलाओं के वोट बैंक पर सभी प्रमुख दलों की नज़र थी। महिला सशक्तिकरण, उज्जवला योजना, स्वयं सहायता समूहों, और जनकल्याणकारी योजनाओं का असर वोटिंग पैटर्न में साफ दिखा है।

निर्वाचन आयोग ने दी जानकारी

निर्वाचन आयोग ने बताया कि दो चरणों में मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। पहले चरण में 65.4 प्रतिशत और दूसरे चरण में 68.2 प्रतिशत मतदान हुआ। कुल मिलाकर 66.91 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाला। आयोग ने कहा कि महिलाओं की बढ़ी उपस्थिति लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। आयोग ने उन जिलों को विशेष रूप से सराहा जहां महिला मतदाताओं का प्रतिशत सबसे अधिक रहा।

सामाजिक बदलाव की झलक

महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बिहार की सामाजिक सोच में आए सकारात्मक बदलाव को भी दर्शाती है। पहले जहां ग्रामीण इलाकों में महिलाएं मतदान के प्रति संकोच करती थीं, वहीं अब वे अपनी राजनीतिक जागरूकता का खुलकर प्रदर्शन कर रही हैं। यह न सिर्फ राजनीतिक दलों के लिए चुनौती है बल्कि एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है।

आगे का असर

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार महिलाओं की बढ़ी भागीदारी से कई पारंपरिक सीटों पर अप्रत्याशित नतीजे देखने को मिल सकते हैं। बिहार जैसे राज्य में जहां जाति समीकरण हमेशा चुनावी गणित का अहम हिस्सा रहे हैं, वहां महिला मतदाताओं का यह उभार राजनीतिक पार्टियों के लिए नया संदेश लेकर आया है—अब चुनाव सिर्फ पुरुष मतदाताओं पर नहीं, बल्कि महिला मतदाताओं की प्राथमिकताओं पर भी निर्भर करेगा।

निष्कर्षतः, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 ने एक नया इतिहास रचा है। महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी ने न सिर्फ मतदान प्रतिशत को ऊंचा उठाया, बल्कि यह भी साबित किया कि अब बिहार की राजनीति में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। लोकतंत्र की यह नई तस्वीर न सिर्फ प्रेरक है बल्कि आने वाले समय में भारतीय राजनीति की दिशा तय करने में भी अहम साबित हो सकती है।

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