EC पर हमले का आरोप: 272 प्रमुख हस्तियों ने राहुल गांधी को घेरा, ओपन लेटर से बढ़ी गर्मी !

पत्र में कहा गया कि राहुल गांधी बार-बार वोट चोरी के आरोप लगाते रहे, लेकिन उन्होंने आज तक कोई आधिकारिक शिकायत या एफिडेविट जमा नहीं किया.

देश की सियासत में एक बार फिर से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव परिणामों के बाद बने माहौल में जहां एक ओर नए सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार को लेकर तेजी से गतिविधियाँ चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी पर पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के एक बड़े समूह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। देश के 272 पूर्व शीर्ष अधिकारियों—जिनमें कई जज, राजनयिक, ब्यूरोक्रेट्स और पूर्व सैन्य अफसर शामिल हैं—ने एक ओपन लेटर जारी कर राहुल गांधी और कांग्रेस पर “चुनाव आयोग तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने के प्रयास” का आरोप लगाया है।

EC पर हमले का आरोप: 272 प्रमुख हस्तियों ने राहुल गांधी को घेरा, ओपन लेटर से बढ़ी गर्मी !
EC पर हमले का आरोप: 272 प्रमुख हस्तियों ने राहुल गांधी को घेरा, ओपन लेटर से बढ़ी गर्मी !

यह खुला पत्र सामने आते ही राजनीतिक गलियों में हलचल शुरू हो गई है, क्योंकि यह समूह देश की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभा चुका है। पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी, हार के बाद चुनाव आयोग (EC) की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कमजोर कर रहे हैं।

क्या कहा गया है ओपन लेटर में?

जारी पत्र में हस्ताक्षरकर्ताओं ने लिखा है कि चुनाव प्रक्रिया पर कांग्रेस नेताओं द्वारा लगातार उठाए जा रहे संदेह, तथ्यहीन आरोप और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहें जनता को गुमराह करने का प्रयास हैं।

पत्र में यह भी उल्लेख है कि:

  • चुनाव आयोग दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में एक अत्यंत जटिल चुनाव प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न करता है,
  • हर चरण पर पारदर्शिता, तकनीकी सुरक्षा और मानवीय संसाधनों की व्यापक निगरानी होती है,
  • ऐसे में हार के बाद आयोग पर सवाल उठाना न केवल गलत है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने राहुल गांधी के हालिया बयानों का हवाला दिया, जिनमें उन्होंने चुनाव परिणामों पर संदेह जताया था और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाए थे। वे कहते हैं कि नेता यदि संस्थाओं पर सार्वजनिक रूप से अविश्वास प्रकट करेंगे तो इसका सीधा असर जनता की सोच और लोकतंत्र के प्रति विश्वास पर पड़ेगा।

कौन-कौन शामिल हैं इस समूह में?

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हैं:

  • पूर्व जज
  • पूर्व आईएएस, आईपीएस, और आईएफएस अधिकारी
  • रिटायर्ड सैन्य अधिकारी
  • पूर्व राजनयिक
  • विश्वविद्यालयों और प्रमुख संस्थानों से जुड़ी नामचीन हस्तियाँ

इन सभी का कहना है कि वे किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह सार्वजनिक अपील कर रहे हैं।

कांग्रेस ने क्या कहा?

हालाँकि पत्र पर आधिकारिक रूप से कांग्रेस की प्रतिक्रिया अभी सीमित रही है, कांग्रेस से जुड़े कई नेताओं का कहना है कि:

  • यह “शासक पक्ष के समर्थन में खड़ा किया गया एक सुनियोजित अभियान” है,
  • राहुल गांधी और विपक्ष सिर्फ चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं,
  • सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, न कि संस्थाओं को बदनाम करना।

कांग्रेस यह भी कहती है कि ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच में वास्तविक चिंताएँ हैं और उन्हें दूर करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, न कि विपक्ष की आलोचना की।

राजनीतिक हलचलों के बीच संस्थाओं पर बहस तेज

यह पत्र ऐसे समय आया है जब:

  • देश में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों पर बहस जारी है,
  • विपक्ष लगातार ईवीएम को लेकर सवाल उठा रहा है,
  • सोशल मीडिया पर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के पत्र लोकतंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि ये सार्वजनिक बहस की दिशा को प्रभावित करते हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ विश्लेषकों ने पत्र को “एकतरफा” भी कहा है, क्योंकि उनका मानना है कि चुनाव सुधारों पर संवाद ही बेहतर रास्ता है।

निष्कर्ष

272 पूर्व अधिकारियों का यह खुला पत्र निश्चित ही राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ाने वाला है। एक ओर यह संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखने की अपील करता है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव बताता है। चुनाव परिणामों के बाद उठी इस बहस ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया, संस्थाएँ और राजनीतिक नेतृत्व लगातार जनता की नज़र में बने हुए हैं—और हर कदम पर उनकी परीक्षा होती रहती है।

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