अयोध्या में ऐतिहासिक पल: PM मोदी का भावुक संबोधन

यूपी के अयोध्या स्थित राम मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि सदियों के घाव भर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संपूर्ण भारत राममय है। भगवान राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं। धर्मध्वज दूर से ही रामलला के दर्शन करवाएगा।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मंगलवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक पल देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य राम मंदिर के सबसे ऊँचे शिखर पर भगवा “धर्म ध्वज” फहराया। इस अनूठे समारोह में उनके साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे, जिससे इस मौके का महत्व और भी गहराया।

अयोध्या में ऐतिहासिक पल: PM मोदी का भावुक संबोधन
अयोध्या में ऐतिहासिक पल: PM मोदी का भावुक संबोधन

महोत्सव का पवित्र आयोजन

यह ध्वजारोहण कार्यक्रम मंदिर निर्माण की आधिकारिक “समाप्ति” का प्रतीक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से भावुक भाव व्यक्त करते हुए कहा कि यह ध्वज सिर्फ एक झंडा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, धर्म और संवेदना की पुनरजागरण की शुरुआत है। उन्होंने यह भी कहा कि “आज संपूर्ण विश्व राममय है, रामभक्तों के दिलों में असीम संतोष बसा है”।

उन्होंने आगे कहा कि “सदियों के घाव भर रहे हैं” — यह वक्त धार्मिक आस्था की जीत और भारत की आत्मविश्वासी पहचान का है।

ध्वज का प्रतीकवाद

यह ध्वज एक तिकोना भगवा ध्वज है, जिसकी ऊँचाई लगभग 10 फीट और लंबाई लगभग 20 फीट है। ध्वज पर सूर्य, और कोविदार वृक्ष के प्रतीक अंकित हैं, जो राम के सूर्यवंशी वंश, आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रकृति-प्रेम का चिन्ह हैं।

ध्वज का प्रतीकवाद
ध्वज का प्रतीकवाद

PMO की जानकारी के अनुसार, ध्वज को इस तरह बनाया गया है कि वह भारतीय सभ्यता के पुनरजागरण, धार्मिक अखंडता और रामराज्य की आदर्शों का संदेश आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाता रहे।

संभावना और एकता का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में न केवल आस्था की बात की, बल्कि देश में जागृति, स्वाभिमान और नए भारत के निर्माण की बात भी उठाई। उन्होंने कहा कि यह झंडा “भारतीय सभ्यता के पुनर-जागरण का ध्वज” है।

संभावना और एकता का संदेश
संभावना और एकता का संदेश

एक और गहरा संदेश उन्होंने “गुलामी की मानसिकता” को छोड़ने का भी दिया—उनके अनुसार, भारत को अब आत्म-निर्भर, सम्मानित और गर्वित राष्ट्र के रूप में नई पहचान बनानी है।

सरकार और राज्य नेतृत्व की भागीदारी

राज्य सरकार से, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह समारोह “नए युग की शुरुआत” है, न कि सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान का समापन।

सरकार और राज्य नेतृत्व की भागीदारी
सरकार और राज्य नेतृत्व की भागीदारी

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी भाषण दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि यह झंडा 500 साल से चली आ रही आस्था-यात्रा का निष्कर्ष है। भागवत ने श्रद्दालुओं और उन तमाम लोगों को याद किया जिन्होंने इस मंदिर निर्माण आंदोलन में अपना जीवन और प्रयास समर्पित किए।

धार्मिक और सांस्कृतिक पुनराभिव्यक्ति

इस आयोजन में कई संत, शिक्षक और श्रद्धालु मौजूद थे, और चारों ओर भावनाओं का माहौल था। मोदी ने भक्तों, दाताओं और श्रमिकों का धन्यवाद किया, जिन्होंने मंदिर निर्माण में भाग लिया और इसे संभव बनाया।

उन्होंने यह विश्वास जताया कि यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है — यह चिरस्थायी विरासत, राष्ट्रीय आत्मा और भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनेगा, जो आने वाले समय में दुनिया को एक नई मिसाल देगा।

नई शुरुआत का प्रतीक

यह ध्वजारोहण समारोह सिर्फ मंदिर निर्माण की पूर्ति नहीं, बल्कि उन मूल्यों की जीत है जिन्हें राम ने अपनी कथाओं और जीवन से सिखाया — धर्म, त्याग, सेवा और नैतिकता। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी यह यात्रा “राम के आदर्शों से प्रेरित भारत” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उनका यह संदेश साफ था कि आज न सिर्फ भारतीय धर्म-परंपराओं का पुनरुत्थान हो रहा है, बल्कि भारत एक ऐसा देश बनने को है जहाँ आस्था और आधुनिकता, परंपरा और प्रगति साथ-साथ चलें।

यह पल इतिहास में दर्ज किया जाएगा — एक युग-परिवर्तन, एक राष्ट्रीय आत्म-पुनरावर्तन और वह संवेदनशील शक्ति जो भारतीय चेतना को नई ऊँचाइयों तक ले जा रही है।

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