देवरिया में नकली पनीर फैक्ट्री का पर्दाफाश, लोगों की सेहत खतरे में !

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यूपी में खाद्य विभाग ने नकली बनाने वाले बड़े सिंडिकेट का खुलासा किया है. विभाग ने देवरिया में एक फैक्ट्री पर छापेमारी की, जिसमें नकली पनीर का पूरा खेल सामने आ गया.

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (FSSAI) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली पनीर बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों ने इस फैक्ट्री से भारी मात्रा में स्किम्ड मिल्क पाउडर और पाम ऑयल से बने नकली पनीर को जब्त कर नष्ट कर दिया। यह घटना न केवल खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर है, बल्कि स्थानीय लोगों की सेहत के लिए भी खतरे का संकेत देती है।

देवरिया में नकली पनीर फैक्ट्री का पर्दाफाश, लोगों की सेहत खतरे में !
देवरिया में नकली पनीर फैक्ट्री का पर्दाफाश, लोगों की सेहत खतरे में !

फैक्ट्री का तरीका और सामग्री

सूत्रों के मुताबिक, आरोपी मिलावटखोर हरियाणा के कारीगरों से नकली पनीर बनाने की तकनीक सीखकर देवरिया में फैक्ट्री स्थापित करने आए। इस फैक्ट्री में स्किम्ड मिल्क पाउडर और पाम ऑयल को मिलाकर पनीर तैयार किया जाता था। इसे बाजार में बेचने के लिए तैयार किया जाता था। पनीर को आकर्षक और असली दिखाने के लिए सेफोलाइट और टीनोपाल का इस्तेमाल भी किया जाता था, जिससे पनीर का पीलापन और बनावट असली पनीर जैसी दिखाई देती थी।

पुलिस और खाद्य विभाग की टीम ने बताया कि यह नकली पनीर पूरी तरह से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक था। पाम ऑयल और रसायनों के मिश्रण से पनीर का रंग और बनावट भले ही असली जैसी लगती हो, लेकिन यह लंबे समय तक खाने पर पेट और लीवर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

जाँच और कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग ने फैक्ट्री पर छापेमारी के दौरान मशीनरी और उत्पादन सामग्री भी जब्त की। अधिकारी फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, कंटेनरों और रसायनों की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि नकली पनीर कब से तैयार हो रहा था और इसका कितना बड़ा नेटवर्क था।

फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ आईपीसी और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई अन्य राज्यों में नकली खाद्य उत्पाद बनाने वालों के लिए भी चेतावनी है।

स्थानीय बाजार में खतरा और सुरक्षा

देवरिया में यह फैक्ट्री बड़ी संख्या में नकली पनीर उत्पादन कर रही थी, जो स्थानीय दुकानों और बाजारों में सप्लाई किया जाता था। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे बाजार से पनीर खरीदते समय सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध या अत्यधिक सस्ता पनीर लेने से बचें।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने बताया कि इस मामले में जनता की शिकायत और नियमित निरीक्षण के आधार पर कार्रवाई की गई। विभाग ने भविष्य में इस तरह की मिलावटखोर गतिविधियों की निगरानी और भी कड़ी कर दी है।

हरियाणा से तकनीक लाकर फैक्ट्री चलाने का मामला

यह मामला इस दृष्टि से भी गंभीर है कि आरोपी पहले हरियाणा के कारीगरों से नकली पनीर बनाने की तकनीक सीखते थे और फिर उसे यूपी में लागू करते थे। इस तरह यह एक संगठित मिलावटखोरी का मामला है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के नकली पनीर में इस्तेमाल होने वाले रसायन और पाम ऑयल लंबे समय तक खाने पर लीवर और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

भविष्य की निगरानी और चेतावनी

खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि देवरिया में इस तरह की किसी भी फैक्ट्री के फिर से संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। विभाग लगातार निगरानी रखेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई करेगा।

स्थानीय नागरिकों को भी सतर्क रहने और अगर किसी दुकान पर संदिग्ध पनीर बेचा जा रहा हो तो तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचित करने की सलाह दी गई है।

निष्कर्ष

देवरिया में नकली पनीर फैक्ट्री का भंडाफोड़ यह दिखाता है कि खाद्य सुरक्षा पर सतत नजर रखने की जरूरत है। मिलावटखोरों द्वारा पाम ऑयल और स्किम्ड मिल्क पाउडर का उपयोग करके जहरीला पनीर बनाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता की सेहत के लिए भी गंभीर खतरा है। खाद्य विभाग की यह कार्रवाई एक चेतावनी है कि मिलावटखोरी के खिलाफ प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ कार्रवाई कर रहा है।

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